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रेणुका सिंह वनडे सीरीज से बाहर, जिंतिमनी कलिता को मौका; भारत की तेज गेंदबाजी में बदलाव

जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की महिला वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम में बदलाव हुआ है। तेज गेंदबाज रेणुका सिंह ठाकुर इस सीरीज में नहीं खेलेंगी। महिला चयन समिति ने उनकी जगह जिंतिमनी कलिता को टीम में शामिल किया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने 22 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। रेणुका फिलहाल बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में वनडे क्रिकेट के लिए जरूरी गेंदबाजी कार्यभार हासिल करने की तैयारी कर रही हैं।

रेणुका सिंह वनडे सीरीज से बाहर, जिंतिमनी कलिता को मौका; भारत की तेज गेंदबाजी में बदलाव
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: Cricbuzz.com, bcci.tv, Rediff Cricket, ICC, bcci.tv

यह बदलाव भारत के लिए अनुभवी गेंदबाज की अनुपलब्धता और एक युवा खिलाड़ी के लिए अवसर, दोनों मायनों में अहम है। हालांकि, रेणुका के बाहर होने को किसी नई गंभीर चोट से जोड़ना सही नहीं होगा। बोर्ड की सूचना में मुख्य बात 50 ओवर के प्रारूप के अनुरूप उनकी गेंदबाजी की तैयारी है।

रेणुका के बाहर होने की वजह क्या है?

बीसीसीआई के मुताबिक, रेणुका अभी उतनी गेंदबाजी का कार्यभार विकसित कर रही हैं, जितना वनडे प्रारूप के लिए आवश्यक है। जारी बयान में किसी नई चोट का नाम या उनकी वापसी की निश्चित तारीख नहीं बताई गई है। इसलिए उनकी स्थिति को लेकर उपलब्ध आधिकारिक जानकारी से आगे कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

क्रिकेट के लिहाज से देखें तो टी20 और वनडे की जरूरतों में अंतर होता है। टी20 में एक गेंदबाज अधिकतम चार ओवर डालता है, जबकि पूरे वनडे मुकाबले में उसे दस ओवर तक गेंदबाजी करनी पड़ सकती है। अलग-अलग स्पेल में लौटकर नियंत्रण बनाए रखना भी चुनौती होती है। इसी कारण छोटे प्रारूप में उपलब्ध होना अपने आप में लंबे प्रारूप की पूरी तैयारी का प्रमाण नहीं होता।

हाल के महीनों में सीमित रही भागीदारी

क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, रेणुका मार्च में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की पिछली महिला वनडे सीरीज का हिस्सा थीं। जून में हुए महिला टी20 विश्व कप में उन्होंने दो मुकाबले खेले थे। जुलाई में लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ महिला टेस्ट के लिए भी उनका चयन हुआ था, लेकिन वह उस मैच में नहीं खेली थीं। यह पृष्ठभूमि उनकी मौजूदा तैयारी को समझने में उपयोगी है।

टीम संयोजन के नजरिए से उनकी गैरमौजूदगी दूसरे तेज गेंदबाजों की जिम्मेदारी बढ़ा सकती है। शुरुआती ओवरों में दबाव बनाना और बल्लेबाजों को आसानी से रन न बनाने देना महत्वपूर्ण रहेगा। हालांकि, इस बदलाव का वास्तविक असर परिस्थितियों, चुने गए गेंदबाजी संयोजन और मैदान पर प्रदर्शन से ही स्पष्ट होगा।

जिंतिमनी कलिता के करियर में महत्वपूर्ण अवसर

असम की जिंतिमनी कलिता के लिए वनडे दल में शामिल होना करियर का अहम पड़ाव है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वह असम के मंगलदै से आती हैं और महिला प्रीमियर लीग में खरीदी जाने वाली अपने राज्य की पहली खिलाड़ी रही हैं। राष्ट्रीय टीम तक उनका सफर असम की महिला क्रिकेट के लिए भी उल्लेखनीय उपलब्धि है।

कलिता को जिम्बाब्वे के खिलाफ इससे पहले हुई टी20 सीरीज के दल में भी जगह मिली थी। क्रिकबज के अनुसार, उस सीरीज में उन्हें खेलने का अवसर नहीं मिला। वह सितंबर में ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ सीमित ओवरों की सीरीज में खेली थीं और उससे पहले भारत ए के साथ इंग्लैंड भी गई थीं। मुंबई इंडियंस के लिए दो सत्रों में उनके नाम 13 डब्ल्यूपीएल मुकाबलों में एक विकेट दर्ज है।

इन आंकड़ों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी सफलता का फैसला नहीं किया जा सकता। युवा गेंदबाज के लिए घरेलू और ए टीम क्रिकेट से मिली सीख को अधिक प्रतिस्पर्धी माहौल में लागू करना अगली चुनौती होती है। गेंद की दिशा, अनुशासन और दबाव में सही निर्णय जैसे पहलू उनके विकास में महत्वपूर्ण होंगे।

टी20 की जीत के बाद वनडे की चुनौती

आईसीसी के मुताबिक, भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पिछली टी20 सीरीज 3-0 से जीती थी। कलिता उस दल का हिस्सा थीं और टीम के साथ वडोदरा पहुँचीं। वनडे सीरीज आईसीसी महिला चैंपियनशिप का हिस्सा है, इसलिए इन मुकाबलों का महत्व द्विपक्षीय प्रतिस्पर्धा से आगे भी जाता है।

टी20 में मिली सफलता सकारात्मक पृष्ठभूमि जरूर देती है, लेकिन वनडे में बल्लेबाजी और गेंदबाजी की लय अलग होती है। लंबे समय तक साझेदारियाँ रोकना, मध्य ओवरों में रन नियंत्रित करना और आखिरी चरण के लिए विकल्प बचाकर रखना जरूरी होता है। भारतीय टीम के लिए अपने उपलब्ध संसाधनों का संतुलित इस्तेमाल अहम रहेगा।

कब और कहाँ होंगे मुकाबले?

आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, तीनों वनडे वडोदरा में 23, 25 और 28 अक्टूबर को निर्धारित हैं। प्रत्येक मुकाबले का निर्धारित समय भारतीय समयानुसार दोपहर दो बजे है। संशोधित दल की कप्तान स्मृति मंधाना और उपकप्तान दीप्ति शर्मा हैं। टीम में हरमनप्रीत कौर, शैफाली वर्मा, प्रतिका रावल और ऋचा घोष जैसी खिलाड़ी भी शामिल हैं।

रेणुका की अनुपलब्धता से भारत को अपनी गेंदबाजी योजना में समायोजन करना होगा। वहीं, कलिता के चयन ने युवा प्रतिभा के लिए आगे बढ़ने का रास्ता खोला है। अब ध्यान उपलब्ध गेंदबाजों की जिम्मेदारियों और सीरीज में उनके प्रदर्शन पर रहेगा। रेणुका की वापसी के बारे में स्पष्ट तस्वीर बोर्ड की अगली आधिकारिक जानकारी से ही सामने आएगी।

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