Vinesh Phogat Maternity Policy Plea: महिला खिलाड़ियों के अधिकारों पर दिल्ली हाई कोर्ट में अहम सुनवाई
नई दिल्ली: भारतीय पहलवान विनेश फोगाट की एक याचिका ने महिला खिलाड़ियों के मातृत्व के बाद प्रतिस्पर्धी खेलों में लौटने से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत सवाल को दिल्ली हाई कोर्ट के सामने ला दिया है।
विनेश ने मांग की है कि गर्भावस्था, बच्चे के जन्म और postpartum recovery के कारण प्रतियोगिताओं से दूर रहने वाली महिला खिलाड़ियों की वापसी के लिए एक fair, transparent और structured framework तैयार किया जाए।
1 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने केंद्र सरकार, Wrestling Federation of India (WFI) और Indian Olympic Association (IOA) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
केवल विनेश का मामला नहीं, महिला खिलाड़ियों से जुड़ा बड़ा नीतिगत सवाल
विनेश की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट राजशेखर राव ने अदालत में कहा कि मामला केवल एक खिलाड़ी को राहत देने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला खिलाड़ियों के मातृत्व अवकाश और उसके बाद खेल में वापसी से जुड़ा व्यापक प्रश्न उठाता है।
राव ने अदालत में कहा:
“This is a larger question on lady athletes and maternity leave and impact on their ability to participate in the sport.”
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए कहा कि maternity leave लेने वाली महिला खिलाड़ियों को कुछ व्यवस्थाओं में ranking समेत विभिन्न प्रकार की सुरक्षा और लाभ दिए जाते हैं।
याचिका का मूल सवाल भी इसी बिंदु पर केंद्रित है—क्या किसी महिला खिलाड़ी की pregnancy और maternity के कारण हुई अनुपस्थिति उसके competitive career में नुकसान का कारण बननी चाहिए?
जुलाई 2025 में मां बनी थीं विनेश फोगाट
विनेश फोगाट ने जुलाई 2025 में अपने पहले बच्चे को जन्म दिया था।
इसके बाद उन्होंने प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी की प्रक्रिया शुरू की।
उनकी याचिका के अनुसार, वापसी के दौरान उन्हें उसी competitive pathway में प्रवेश करना पड़ा, लेकिन maternity के कारण जिस अवधि में वह प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकीं, उसके लिए अलग व्यवस्था या accommodation उपलब्ध नहीं कराया गया।
विनेश का दावा है कि eligibility framework में उन प्रतियोगिताओं के प्रदर्शन को महत्व दिया गया जो उनकी maternity-related absence के दौरान आयोजित हुई थीं।
उनका तर्क है कि ऐसी स्थिति में महिला खिलाड़ी ऐसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा न लेने के कारण selection race में पिछड़ सकती हैं, जबकि उनकी अनुपस्थिति खेल संबंधी खराब प्रदर्शन के कारण नहीं बल्कि pregnancy और childbirth से जुड़ी थी।
ये विनेश की याचिका में किए गए दावे हैं; अदालत ने अभी इस विवाद पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है।
विनेश ने कोर्ट से क्या-क्या मांगा?
याचिका में केवल maternity policy बनाने की मांग नहीं की गई है।
विनेश ने महिला खिलाड़ियों की वापसी के लिए निष्पक्ष और व्यवस्थित framework के साथ transparent और objectively verifiable selection तथा nomination process की मांग की है।
इसके अलावा maternity-related absence के कारण disadvantage झेलने वाली खिलाड़ियों के लिए एक alternative mechanism उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
विनेश ने यह भी कहा है कि जिन competitions के लिए वह अन्यथा eligible हैं, उनके लिए उनके नाम पर विचार किया जाए।
साथ ही उन्होंने घरेलू प्रतियोगिताओं के लिए एक निश्चित और समयबद्ध calendar की भी मांग की है।
पहले भी विनेश के पक्ष में अहम टिप्पणी कर चुका है हाई कोर्ट
विनेश और WFI के बीच maternity-related selection dispute इससे पहले भी दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच चुका है।
मई 2026 में Asian Games Selection Trials से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने विनेश को trials में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी।
उस आदेश में अदालत ने motherhood और महिला खिलाड़ियों के professional opportunities को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की थीं।
अदालत ने कहा था कि “becoming mother can never become a disability.”
कोर्ट ने यह भी कहा था कि motherhood को किसी महिला खिलाड़ी के professional career में बाधा या प्रतिकूल व्यवहार का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
हालांकि उस आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया था कि उसकी टिप्पणियां उस समय सामने मौजूद सीमित मुद्दे के संदर्भ में थीं और लंबित मुख्य विवाद का फैसला merits पर अलग से होना था।
अंतरराष्ट्रीय खेल व्यवस्थाओं का भी दिया गया हवाला
विनेश की पूर्व कानूनी दलीलों में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय sporting frameworks का भी उल्लेख किया गया है।
अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, उनकी ओर से BWF, WTA, ITTF और WKF जैसी संस्थाओं की व्यवस्थाओं का हवाला दिया गया था, जिनमें pregnancy, childbirth या maternity-related absence की स्थिति में protected ranking, accommodation अथवा structured return-to-competition mechanisms जैसे प्रावधान होने की बात कही गई।
यही तुलना मौजूदा विवाद को एक खिलाड़ी बनाम federation के सामान्य selection dispute से आगे ले जाती है।
सवाल यह है कि भारतीय खेल संस्थाओं में maternity के कारण competitive calendar से बाहर रहने वाली elite महिला खिलाड़ियों के लिए स्पष्ट और समान रूप से लागू होने वाला framework होना चाहिए या नहीं।
WFI के दो Show-Cause Notices पर अलग कानूनी लड़ाई
Maternity policy की मांग से अलग विनेश फोगाट ने WFI द्वारा जारी किए गए दो show-cause notices और उनसे जुड़ी disciplinary proceedings को भी चुनौती दी है।
ये notices 9 मई और 17 जून को जारी किए गए थे।
विनेश ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि ये कार्रवाइयां arbitrary और mala fide हैं तथा competitive wrestling में उनकी वापसी को प्रभावित कर रही हैं।
WFI का पक्ष अलग है।
1 सितंबर की सुनवाई के दौरान federation के वकील ने अदालत को बताया कि disciplinary matter में दो बार hearing रखी गई थी, लेकिन विनेश उपस्थित नहीं हुईं। WFI ने कहा कि उन्हें एक अंतिम अवसर दिया गया है।
इस अलग याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट ने उस चरण पर formal notice जारी नहीं किया और WFI के वकील से instructions लेने को कहा।
यह मामला 29 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।
इसलिए maternity-policy petition और disciplinary proceedings से संबंधित petition को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।
ITA से जनवरी 2026 में प्रतिस्पर्धा की पात्रता का मुद्दा
विनेश की कानूनी दलीलों में International Testing Agency (ITA) से संबंधित एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है।
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, 3 जुलाई 2025 की communication में यह पुष्टि की गई थी कि विनेश 1 जनवरी 2026 से competitive participation फिर शुरू करने के लिए eligible होंगी।
विनेश का आरोप है कि इसके बावजूद बाद में अपनाए गए WFI eligibility framework ने उनके selection opportunities को प्रभावित किया।
हालांकि WFI से जुड़े selection और disciplinary disputes अभी न्यायिक विचाराधीन हैं और अंतिम कानूनी निष्कर्ष आना बाकी है।
यह मामला महिला खिलाड़ियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
Elite sport में pregnancy केवल कुछ महीनों की अनुपस्थिति का मामला नहीं होती।
एक महिला खिलाड़ी को pregnancy, childbirth और postpartum recovery के दौरान लंबे समय तक training और competition से दूर रहना पड़ सकता है। इस बीच rankings, qualification tournaments और selection windows आगे बढ़ते रहते हैं।
ऐसे में यदि selection criteria केवल हाल की competitions, rankings या qualification events पर आधारित हों, तो maternity break लेने वाली खिलाड़ी स्वाभाविक रूप से disadvantage में आ सकती है।
विनेश की याचिका इसी structural problem पर सवाल उठाती है।
यदि अदालत या संबंधित खेल संस्थाओं के स्तर पर स्पष्ट maternity-return framework विकसित होता है, तो इसका प्रभाव केवल wrestling तक सीमित रहने के बजाय भारतीय खेल व्यवस्था में महिला खिलाड़ियों के selection और return-to-competition policies पर व्यापक चर्चा को प्रभावित कर सकता है।
लेकिन फिलहाल कोर्ट ने नीति बनाने का अंतिम निर्देश नहीं दिया है। इस चरण में केंद्र सरकार, WFI और IOA से जवाब मांगा गया है, और मामले पर आगे की सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
