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AceVector IPO: Snapdeal की पैरेंट कंपनी ने ₹30-₹32 तय किया प्राइस बैंड, ₹420 करोड़ जुटाने की तैयारी

Snapdeal की पैरेंट कंपनी AceVector Limited ने अपने आगामी IPO के लिए ₹30 से ₹32 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। करीब ₹420 करोड़ के इस पब्लिक इश्यू में ₹287 करोड़ तक का फ्रेश इश्यू और लगभग ₹133 करोड़ का ऑफर फॉर सेल शामिल है। IPO 25 सितंबर 2026 को खुलेगा और 29 सितंबर को बंद होगा।

AceVector IPO: Snapdeal की पैरेंट कंपनी ने ₹30-₹32 तय किया प्राइस बैंड, ₹420 करोड़ जुटाने की तैयारी
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Inc42

नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Snapdeal की पैरेंट कंपनी AceVector Limited ने अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए ₹30 से ₹32 प्रति इक्विटी शेयर का प्राइस बैंड तय कर दिया है। ऊपरी प्राइस बैंड ₹32 के आधार पर कंपनी इस IPO के जरिए करीब ₹420 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है।

IPO आम निवेशकों के लिए 25 सितंबर 2026 को खुलेगा और 29 सितंबर 2026 को बंद होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 24 सितंबर को होगी। मौजूदा कार्यक्रम के मुताबिक AceVector के शेयरों की BSE और NSE पर लिस्टिंग 5 अक्टूबर 2026 को होने की उम्मीद है।

₹420 करोड़ के IPO की संरचना क्या है?

AceVector का IPO फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल (OFS), दोनों का मिश्रण है।

कंपनी ₹287 करोड़ तक के नए शेयर जारी करेगी। इसके अलावा मौजूदा शेयरधारकों द्वारा करीब 4.16 करोड़ शेयरों की बिक्री OFS के जरिए की जाएगी, जिसकी कीमत ऊपरी प्राइस बैंड पर लगभग ₹133 करोड़ बैठती है। इस तरह ₹32 प्रति शेयर के ऊपरी स्तर पर कुल IPO का आकार करीब ₹420 करोड़ होगा।

शेयर की फेस वैल्यू ₹1 है। निवेशकों के लिए न्यूनतम लॉट 468 शेयरों का रखा गया है। इसलिए ₹32 के ऊपरी प्राइस बैंड पर एक लॉट के लिए न्यूनतम निवेश ₹14,976 होगा।

IPO का आकार पहले के प्रस्ताव से घटाया गया

AceVector ने अपने IPO का आकार पहले की योजना की तुलना में कम किया है।

कंपनी ने पहले ₹300 करोड़ के फ्रेश इश्यू और लगभग 6.38 करोड़ शेयरों के OFS की योजना बनाई थी। मौजूदा ऑफर में फ्रेश इश्यू ₹287 करोड़ और OFS लगभग 4.16 करोड़ शेयरों तक सीमित हो गया है।

AceVector पहले ही प्री-IPO प्लेसमेंट के जरिए ₹13 करोड़ जुटा चुकी है और इस रकम को फ्रेश इश्यू के आकार से घटाया गया है।

SoftBank समेत मौजूदा निवेशक बेचेंगे शेयर

OFS के तहत AceVector के कई मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे।

इनमें SoftBank से जुड़ी Starfish I Pte Ltd, Nexus Venture Partners, FIH Business Global, Kenneth Stuart Glass, Jason Ashok Kothari, Rupen Investment and Industries, Centaurus Trading and Investments तथा Laurent Bernard Amouyal शामिल हैं।

Starfish AceVector की सबसे बड़ी शेयरधारक है और IPO से पहले उसकी हिस्सेदारी लगभग 30.11% बताई गई है। Kunal Bahl की हिस्सेदारी 12.19% और Rohit Kumar Bansal की 10.93% है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सह-संस्थापक Kunal Bahl और Rohit Bansal IPO में अपने शेयर नहीं बेच रहे हैं

IPO के बाद AceVector की वैल्यूएशन कितनी होगी?

₹32 प्रति शेयर के ऊपरी प्राइस बैंड पर AceVector का पोस्ट-इश्यू मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1,741.4 करोड़ रहने का अनुमान है, जो करीब $182 मिलियन के बराबर है।

यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि IPO में केवल कंपनी द्वारा जुटाई जाने वाली रकम ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक बाजार AceVector के पूरे कारोबार को किस मूल्य पर देखता है, वह भी सामने आएगा।

कंपनी IPO से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल कहां करेगी?

फ्रेश इश्यू से प्राप्त नेट प्रॉसीड्स में से AceVector ने करीब ₹132 करोड़ अपने मार्केटप्लेस बिजनेस की मार्केटिंग और बिजनेस प्रमोशन पर खर्च करने की योजना बनाई है।

इसके अलावा करीब ₹50 करोड़ मार्केटप्लेस बिजनेस की टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर लागत के लिए निर्धारित किए गए हैं। बाकी रकम का इस्तेमाल संभावित अधिग्रहण सहित इनऑर्गेनिक ग्रोथ और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाना है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि OFS से मिलने वाली रकम कंपनी को नहीं मिलती; वह उन मौजूदा शेयरधारकों को जाती है जो अपने शेयर बेच रहे हैं।

AceVector का कारोबार सिर्फ Snapdeal तक सीमित नहीं

AceVector का नाम सबसे ज्यादा Snapdeal से जुड़ा है, लेकिन समूह का कारोबार इससे व्यापक है।

कंपनी एक डिजिटल कॉमर्स इकोसिस्टम संचालित करती है जिसमें Snapdeal का वैल्यू-केंद्रित ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस, ई-कॉमर्स टेक्नोलॉजी एवं SaaS समाधान और Stellaro Brands के तहत कंज्यूमर ब्रांड्स शामिल हैं।

Snapdeal का फोकस खास तौर पर वैल्यू-कॉन्शियस ग्राहकों और Tier-2 तथा छोटे शहरों के बाजार पर रहा है। FY26 में Snapdeal ने भारत के 18,972 पिन कोड में ग्राहकों को सेवा दी।

FY26 में बढ़ी आय, लेकिन कंपनी अभी भी घाटे में

AceVector की वित्तीय स्थिति में FY26 के दौरान सुधार के संकेत दिखाई दिए, हालांकि कंपनी लाभ में नहीं आई।

उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार FY26 में कंपनी की कुल आय ₹537.67 करोड़ रही, जो FY25 के ₹406.77 करोड़ की तुलना में लगभग 32% अधिक थी। इसी अवधि में नेट लॉस ₹126.31 करोड़ से घटकर ₹45.51 करोड़ रह गया।

वहीं कंपनी का FY26 का रेवेन्यू लगभग ₹510.38 करोड़ बताया गया है। अलग-अलग रिपोर्ट्स में “revenue”, “revenue from operations” और “total income” जैसे अलग accounting measures इस्तेमाल किए गए हैं, इसलिए इन आंकड़ों को एक-दूसरे का सीधा विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

निवेशकों के लिए किन बातों पर नजर रहेगी?

AceVector IPO में तीन पहलू खास तौर पर ध्यान देने योग्य हैं—कंपनी के कारोबार में हो रही राजस्व वृद्धि, घाटे में आई कमी और IPO के जरिए नए पूंजी निवेश की योजना।

इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि कंपनी अभी भी घाटे में है और IPO का एक हिस्सा OFS है, जिसमें मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं।

IPO खुलने के बाद संस्थागत, गैर-संस्थागत और रिटेल श्रेणियों में मिलने वाली मांग से बाजार की दिलचस्पी का एक माप मिलेगा। कंपनी ने इश्यू का 75% हिस्सा Qualified Institutional Buyers (QIBs), 15% Non-Institutional Investors (NIIs) और 10% रिटेल निवेशकों के लिए निर्धारित किया है।

AceVector IPO की प्रमुख तारीखें

Anchor Investors Bidding: 24 सितंबर 2026
IPO Opening Date: 25 सितंबर 2026
IPO Closing Date: 29 सितंबर 2026
Price Band: ₹30–₹32 प्रति शेयर
Minimum Lot Size: 468 शेयर
ऊपरी प्राइस बैंड पर एक लॉट: ₹14,976
Fresh Issue: ₹287 करोड़ तक
Offer for Sale: लगभग ₹133 करोड़
कुल IPO Size: लगभग ₹420 करोड़
Expected Listing: 5 अक्टूबर 2026

निष्कर्ष

AceVector का ₹420 करोड़ का IPO Snapdeal की पैरेंट कंपनी को सार्वजनिक बाजार में ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कंपनी ने अपने पहले प्रस्ताव की तुलना में इश्यू का आकार घटाया है और ₹30-₹32 का प्राइस बैंड तय किया है।

AceVector की FY26 आय में वृद्धि और घाटे में कमी वित्तीय प्रदर्शन के दो महत्वपूर्ण संकेतक हैं, जबकि कंपनी का अब भी घाटे में होना, OFS के जरिए मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी बिक्री और IPO के बाद की वैल्यूएशन भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण तथ्य होंगे।

निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले निवेशकों को कंपनी के Red Herring Prospectus में दिए गए वित्तीय आंकड़ों, जोखिम कारकों, IPO के उद्देश्यों और अन्य खुलासों को ध्यान से देखना चाहिए।


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