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स्टार्टअप

भारतीय Space-Tech Startup InspeCity ने जुटाए ₹100 करोड़, अब अंतरिक्ष में सैटेलाइट की ‘सर्विसिंग’ की तैयारी

भारतीय स्पेस-टेक स्टार्टअप InspeCity ने Pre-Series A फंडिंग राउंड में ₹100 करोड़ जुटाए हैं। इस निवेश का इस्तेमाल कंपनी अपनी इन-स्पेस सर्विसिंग टेक्नोलॉजी को ऑर्बिट में ले जाने, चार प्रस्तावित मिशनों, टीम विस्तार और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए करेगी।

भारतीय Space-Tech Startup InspeCity ने जुटाए ₹100 करोड़, अब अंतरिक्ष में सैटेलाइट की ‘सर्विसिंग’ की तैयारी
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द्वारा Jeet Nirmal

स्रोत: Janta Scope

भारत के तेजी से उभरते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ी फंडिंग डील सामने आई है। स्पेस-टेक स्टार्टअप InspeCity ने अपने Pre-Series A राउंड में ₹100 करोड़ (लगभग $10.5 मिलियन) जुटाए हैं।

इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Speciale Invest और निवेशक Ashish Kacholia ने किया। इसमें Antler Elevate, Antler India, Manish Gandhi और Shastra VC समेत अन्य निवेशकों ने भी भाग लिया।

नई पूंजी के साथ InspeCity अब अपनी तकनीकों को लैब और व्यक्तिगत परीक्षणों से आगे ले जाकर वास्तविक अंतरिक्ष मिशनों में साबित करने की दिशा में बढ़ रही है। कंपनी का लक्ष्य ऐसी तकनीक विकसित करना है जो भविष्य में ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट्स की जांच, जीवनकाल बढ़ाने, डॉकिंग और अन्य सर्विसिंग गतिविधियों में इस्तेमाल की जा सके।

अगले 12-18 महीनों में चार मिशन की योजना

InspeCity के संस्थापक और CEO Arindrajit Chowdhury के अनुसार, कंपनी अगले 12 से 18 महीनों में लगभग चार अंतरिक्ष मिशन करने की योजना बना रही है।

रणनीति यह है कि हर मिशन पिछले मिशन से मिली सीख पर आधारित हो और धीरे-धीरे अधिक जटिल तकनीकों का परीक्षण किया जाए।

कंपनी शुरुआत में अपने RIG (Remote Inspection and Guidance) प्लेटफॉर्म से संबंधित मिशनों के जरिए rendezvous और proximity operations जैसी क्षमताओं को प्रदर्शित करना चाहती है।

इसके बाद कंपनी अपने VEDA — Vehicle for Life Extension and Deorbiting Activities प्लेटफॉर्म की क्षमताओं को अंतरिक्ष में प्रदर्शित करने की दिशा में बढ़ेगी।

कंपनी की योजना आगे चलकर दो अंतरिक्ष यानों को करीब लाने और फिर docking जैसी अधिक जटिल प्रक्रियाओं को प्रदर्शित करने की है।

आखिर क्या बना रही है InspeCity?

InspeCity का फोकस केवल नए सैटेलाइट बनाने पर नहीं, बल्कि पहले से अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स की उपयोगिता और जीवनकाल बढ़ाने वाली तकनीकों पर है।

कंपनी मुख्य रूप से propulsion, sensing/navigation, robotics और rendezvous-proximity-docking से जुड़ी तकनीकों पर काम कर रही है।

इसके तकनीकी प्लेटफॉर्म में GITA नाम का propulsion system, CHAKSU sensing और navigation से जुड़ा सिस्टम तथा RAMA robotic manipulation technology शामिल हैं। इन क्षमताओं को VEDA जैसे बड़े servicing architecture में एकीकृत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी अभी अपनी इन-स्पेस सर्विसिंग क्षमताओं को वास्तविक ऑर्बिटल मिशनों के जरिए साबित करने की प्रक्रिया में है। इसलिए भविष्य की servicing, refuelling या अन्य उन्नत क्षमताओं को वर्तमान में व्यावसायिक रूप से सिद्ध सेवा मानना सही नहीं होगा।

सैटेलाइट की उम्र बढ़ाने पर बड़ा दांव

आधुनिक अर्थव्यवस्था में संचार, नेविगेशन, मौसम, पृथ्वी अवलोकन और कई अन्य सेवाओं के लिए सैटेलाइट महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा बन चुके हैं।

लेकिन अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद किसी सैटेलाइट का ईंधन खत्म हो जाए या उसकी manoeuvring क्षमता प्रभावित हो जाए, तो उसकी उपयोगिता कम हो सकती है।

InspeCity जिस क्षेत्र में काम कर रही है, उसका उद्देश्य भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में सैटेलाइट की उपयोगी उम्र बढ़ाने और ऑर्बिटल एसेट्स को सर्विस करने के विकल्प विकसित करना है।

यदि ऐसी तकनीकें सफलतापूर्वक और व्यावसायिक स्तर पर स्थापित होती हैं, तो ऑपरेटरों को हर समस्या के समाधान के रूप में नया सैटेलाइट लॉन्च करने पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

फंडिंग का पैसा कहां इस्तेमाल होगा?

नई पूंजी का महत्वपूर्ण हिस्सा InspeCity की तकनीकों को flight qualification तक पहुंचाने और प्रस्तावित ऑर्बिटल मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

कंपनी अपनी टीम और इंजीनियरिंग क्षमताओं का भी विस्तार कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान में कंपनी में लगभग 70 कर्मचारी हैं और वह टीम का आकार दोगुने से अधिक करने की योजना बना रही है।

इसके साथ manufacturing, engineering और mission capabilities को भी बढ़ाया जाएगा।

InspeCity को भारत सरकार के Innovations for Defence Excellence (iDEX) कार्यक्रम के तहत भी समर्थन मिला है। कंपनी के पास तीन iDEX प्रोजेक्ट होने की जानकारी सामने आई है।

2022 में हुई थी InspeCity की शुरुआत

InspeCity की स्थापना 2022 में हुई थी। इसके संस्थापकों में Arindrajit Chowdhury और Tausif Shaikh शामिल हैं।

कंपनी ने अपनी यात्रा के शुरुआती वर्षों से ही satellite servicing और भविष्य की in-space infrastructure से जुड़ी तकनीकों पर ध्यान केंद्रित किया है।

इससे पहले भी कंपनी निवेश जुटा चुकी है। अब ₹100 करोड़ का Pre-Series A राउंड उसे प्रयोगशाला और तकनीकी विकास के चरण से आगे वास्तविक ऑर्बिटल demonstrations की ओर बढ़ने के लिए अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराता है।

भारत के Space-Tech सेक्टर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फंडिंग?

भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग में अधिकांश चर्चा अक्सर रॉकेट लॉन्च, सैटेलाइट निर्माण और पृथ्वी अवलोकन के आसपास रहती है। InspeCity जिस क्षेत्र पर काम कर रही है, वह इससे अलग in-space servicing, assembly and manufacturing (ISAM) श्रेणी से जुड़ा है।

इस क्षेत्र में सफलता का मतलब केवल अंतरिक्ष में कोई वस्तु पहुंचाना नहीं है। एक spacecraft को दूसरे spacecraft के पास सुरक्षित तरीके से पहुंचाना, उसकी स्थिति का आकलन करना, उसके साथ dock करना और भविष्य में servicing जैसे काम करना तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल चुनौती है।

यही कारण है कि InspeCity के लिए अगला महत्वपूर्ण पड़ाव केवल फंडिंग जुटाना नहीं, बल्कि प्रस्तावित मिशनों में अपनी तकनीकों का सफल प्रदर्शन करना होगा।

आगे की सबसे बड़ी परीक्षा

₹100 करोड़ की नई फंडिंग InspeCity को अपनी तकनीक विकसित करने और उसे अंतरिक्ष तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय आधार देती है, लेकिन कंपनी की असली परीक्षा अब शुरू होगी।

अगले 12-18 महीनों में प्रस्तावित मिशन यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि InspeCity की propulsion, navigation, robotics और docking technologies वास्तविक orbital environment में किस स्तर तक काम करती हैं।

यदि ये demonstrations सफल रहते हैं, तो कंपनी भारत से उभरने वाले in-orbit servicing ecosystem में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में आ सकती है।


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