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स्टार्टअप

भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश की रफ्तार धीमी, एक सप्ताह में 28 कंपनियों ने जुटाए 115 मिलियन डॉलर; AI और ई-कॉमर्स सेक्टर में दिखा दम।

भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में अक्टूबर 2026 का आखिरी सप्ताह निवेश के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहा। देश की 28 स्टार्टअप कंपनियों ने 26 से 31 अक्टूबर के बीच कुल 115 मिलियन डॉलर यानी लगभग 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग जुटाई। इस दौरान शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली, जबकि कुछ स्थापित कंपनियों ने भी बड़े फंडिंग राउंड पूरे किए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ई-कॉमर्स, हेल्थटेक और गेमिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश की गतिविधियां देखने को मिलीं।

भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश की रफ्तार धीमी, एक सप्ताह में 28 कंपनियों ने जुटाए 115 मिलियन डॉलर; AI और ई-कॉमर्स सेक्टर में दिखा दम।
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: Entrackr , peepalsglobal

फंडिंग की कुल रकम पिछले सप्ताह के मुकाबले कम रही। Entrackr की साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले वाले सप्ताह में 15 स्टार्टअप्स ने करीब 133.9 मिलियन डॉलर जुटाए थे। इस तरह अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में कुल फंडिंग में लगभग 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद निवेश के सौदों की संख्या बढ़ना इस बात का संकेत है कि निवेशक नए बिजनेस मॉडल और शुरुआती स्तर की कंपनियों में दिलचस्पी बनाए हुए हैं।

28 स्टार्टअप्स को मिला निवेश, शुरुआती कंपनियों की रही बड़ी हिस्सेदारी

Entrackr की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सप्ताह कुल 28 कंपनियों ने फंडिंग हासिल की। इनमें चार ग्रोथ-स्टेज डील और 24 शुरुआती चरण के सौदे शामिल थे। कुल निवेश में से लगभग 42.34 मिलियन डॉलर ग्रोथ-स्टेज कंपनियों को मिले, जबकि शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स ने करीब 72.25 मिलियन डॉलर जुटाए।

इससे स्पष्ट होता है कि निवेशकों का ध्यान केवल पहले से स्थापित कंपनियों तक सीमित नहीं है। नए बिजनेस आइडिया, तकनीकी समाधान और तेजी से बढ़ते बाजारों में काम करने वाले स्टार्टअप्स को भी पूंजी मिल रही है।

ग्रोथ-स्टेज फंडिंग में AI कंपनियों Simplismart और Live2.ai ने प्रमुख स्थान हासिल किया। दोनों ने लगभग 14-14 मिलियन डॉलर जुटाए। वहीं, हेल्थटेक और ई-कॉमर्स क्षेत्र की कंपनियों ने भी बड़े निवेश राउंड पूरे किए।

Simplismart और Live2.ai ने जुटाए 14-14 मिलियन डॉलर

इस सप्ताह की प्रमुख फंडिंग डील में बेंगलुरु की AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Simplismart का नाम शामिल रहा। कंपनी ने 14 मिलियन डॉलर की Series B फंडिंग जुटाई। इस निवेश में Dallas Venture Capital, NVIDIA और अन्य निवेशकों ने भाग लिया।

Simplismart कंपनियों को AI मॉडल को विकसित करने, तैनात करने और बड़े स्तर पर चलाने के लिए तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराती है। जैसे-जैसे कंपनियां अपने कारोबार में AI का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं, वैसे-वैसे ऐसे प्लेटफॉर्म की मांग भी बढ़ रही है जो AI मॉडल को कम लागत और बेहतर प्रदर्शन के साथ संचालित करने में मदद कर सकें।

दूसरी ओर, Live2.ai ने भी लगभग 14 मिलियन डॉलर जुटाए। कंपनी AI आधारित सोशल कॉमर्स के क्षेत्र में काम करती है। इसका बिजनेस मॉडल ऑनलाइन वीडियो, लाइव कॉमर्स और डिजिटल खरीदारी के अनुभव को जोड़ने पर केंद्रित है। इन दोनों कंपनियों को मिली फंडिंग बताती है कि निवेशकों के लिए AI अब केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि व्यावसायिक अवसर वाला क्षेत्र बन चुका है।

हेल्थटेक और ई-कॉमर्स में भी निवेशकों की दिलचस्पी

हेल्थटेक सेक्टर में Cent ने 15 मिलियन डॉलर की Series A फंडिंग जुटाई। इस राउंड का नेतृत्व Blume Ventures और South Park Commons ने किया। शुरुआती चरण की कंपनियों में यह सप्ताह की सबसे बड़ी घोषित फंडिंग डील रही।

ई-कॉमर्स और कंज्यूमर ब्रांड के क्षेत्र में Troovy ने Series B राउंड में 11.5 मिलियन डॉलर जुटाए। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Sharrp Ventures ने किया, जबकि Info Edge, WaterBridge और Better Capital ने भी भाग लिया। कंपनी हेल्दी स्नैक और फूड प्रोडक्ट्स के बाजार में काम करती है।

इसके अलावा, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Ace Blend ने Series A राउंड में लगभग 9.91 मिलियन डॉलर जुटाए। इस राउंड का नेतृत्व 3one4 Capital ने किया। इन निवेशों से पता चलता है कि भारतीय बाजार में हेल्थ, रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पाद और ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े बिजनेस मॉडल अभी भी निवेशकों के लिए आकर्षक बने हुए हैं।

गेमिंग और लग्जरी वॉच ब्रांड को भी मिला फंड

गेमिंग सेक्टर की कंपनी Matiks ने Pre-Series A राउंड में 10 मिलियन डॉलर जुटाए। इस निवेश का नेतृत्व General Catalyst ने किया। डिजिटल गेमिंग और इंटरैक्टिव मनोरंजन के बढ़ते बाजार के बीच कंपनी को मिली फंडिंग इस क्षेत्र में निवेशकों की रुचि को दर्शाती है।

वहीं, लग्जरी वॉच ब्रांड Rotoris ने Series A राउंड में 70 करोड़ रुपये यानी लगभग 7.4 मिलियन डॉलर जुटाए। इस राउंड का नेतृत्व Blume Ventures ने किया। इससे यह भी संकेत मिलता है कि भारतीय निवेशक केवल टेक्नोलॉजी कंपनियों पर ही नहीं, बल्कि प्रीमियम कंज्यूमर ब्रांड्स में भी अवसर तलाश रहे हैं। इसके अलावा, Mochatrade, Let's Game Now, Venttup, Jagruti Rehabilitation Centre और QwikBuild जैसी कंपनियों ने भी इस सप्ताह निवेश हासिल किया।

बेंगलुरु बना स्टार्टअप फंडिंग का सबसे बड़ा केंद्र

शहरों के हिसाब से देखें तो अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में बेंगलुरु सबसे आगे रहा। यहां स्थित स्टार्टअप्स ने कुल 14 फंडिंग डील दर्ज कीं। इसके बाद दिल्ली-NCR में पांच और मुंबई में तीन निवेश सौदे हुए। चेन्नई, पुणे, राउरकेला, केरल और हैदराबाद के स्टार्टअप्स ने भी निवेश हासिल किया।

सेक्टर के हिसाब से ई-कॉमर्स सबसे आगे रहा, जहां आठ डील हुईं। AI क्षेत्र में छह निवेश सौदे दर्ज किए गए। इसके अलावा हेल्थटेक, गेमिंग, डीपटेक, फिनटेक और स्पिरिचुअल टेक्नोलॉजी से जुड़े स्टार्टअप्स को भी फंडिंग मिली।

क्या भारतीय स्टार्टअप फंडिंग में आई गिरावट चिंता का संकेत है?

एक सप्ताह में फंडिंग का 14 प्रतिशत कम होना अपने आप में पूरे स्टार्टअप बाजार में मंदी का प्रमाण नहीं है। वेंचर कैपिटल निवेश में हर सप्ताह रकम बदलती रहती है। इसकी वजह बड़े फंडिंग राउंड का समय, निवेशकों की रणनीति और कंपनियों की पूंजी जुटाने की जरूरत हो सकती है।

Entrackr के अनुसार, पिछले आठ सप्ताह में औसतन लगभग 210 मिलियन डॉलर की साप्ताहिक फंडिंग हुई, जिसमें औसतन 23 डील शामिल थीं। इसके मुकाबले इस सप्ताह 115 मिलियन डॉलर का निवेश कम जरूर है, लेकिन 28 कंपनियों को फंडिंग मिलना बाजार में सक्रियता दिखाता है।

निवेशकों के लिए अब कंपनी की वास्तविक कमाई, ग्राहक संख्या, बिजनेस मॉडल और मुनाफे तक पहुंचने की क्षमता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। स्टार्टअप्स को भी केवल तेजी से विस्तार करने के बजाय अपने खर्च और राजस्व के बीच संतुलन बनाना होगा।

कुल मिलाकर, अक्टूबर के आखिरी सप्ताह की फंडिंग रिपोर्ट भारतीय स्टार्टअप बाजार की मिली-जुली तस्वीर पेश करती है। एक तरफ कुल निवेश में गिरावट आई, तो दूसरी तरफ शुरुआती चरण की कंपनियों को अच्छी पूंजी मिली। AI, हेल्थटेक और ई-कॉमर्स जैसे सेक्टर निवेशकों का ध्यान खींच रहे हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह निवेश गतिविधि और तेज होती है या निवेशक बड़ी फंडिंग के मामले में सतर्क रुख अपनाते हैं।

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