इस फंडिंग राउंड में दुबई स्थित हेल्थकेयर निवेश प्लेटफॉर्म Model42 ने निवेश किया है। यह प्लेटफॉर्म Enlightened Minds Investments से जुड़ा है। Clinics On Cloud के लिए यह निवेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी ने लगभग आठ साल तक अपना कारोबार मुख्य रूप से खुद के दम पर विकसित किया है। अब वह भारत में तैयार किए गए हेल्थकेयर समाधानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना चाहती है।
क्या है Clinics On Cloud का बिजनेस मॉडल?
Clinics On Cloud की स्थापना साल 2018 में अभय अग्रवाल और मानश्री अग्रवाल ने की थी। कंपनी का मुख्य उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिसके जरिए लोगों को शुरुआती स्वास्थ्य जांच के लिए हर बार बड़े अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर तक न जाना पड़े।
इसी सोच के तहत कंपनी ने Health ATM विकसित किए। ये छोटे और तकनीक आधारित हेल्थ स्क्रीनिंग स्टेशन होते हैं, जिनमें कनेक्टेड मेडिकल उपकरणों की मदद से कई तरह की शुरुआती स्वास्थ्य जांच की जा सकती है। जांच के बाद डिजिटल रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाती है और जरूरत के अनुसार टेलीमेडिसिन के जरिए डॉक्टर से परामर्श लेने की सुविधा भी दी जा सकती है।
कंपनी का काम केवल Health ATM तक सीमित नहीं है। इसके पोर्टफोलियो में AI-enabled Health Lounges, Box Clinics और Mobile Medical Units भी शामिल हैं। इन सुविधाओं को अस्पतालों, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों, कॉरपोरेट कार्यालयों, ग्रामीण इलाकों और अन्य स्थानों पर स्थापित किया जा सकता है।
इस मॉडल के जरिए कंपनी स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के करीब लाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि Health ATM से मिलने वाली स्क्रीनिंग रिपोर्ट अपने आप में अंतिम मेडिकल डायग्नोसिस नहीं होती। बीमारी की पुष्टि और इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह और आवश्यक जांच जरूरी होती है।
₹120 करोड़ की फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?
कंपनी के मुताबिक, नई पूंजी का इस्तेमाल मुख्य रूप से पांच क्षेत्रों में किया जाएगा।
1. AI तकनीक को मजबूत करना: कंपनी अपने हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमता बढ़ाना चाहती है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करना और स्क्रीनिंग प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।
2. रिसर्च एंड डेवलपमेंट: कंपनी नए मेडिकल स्क्रीनिंग समाधानों और तकनीकी सुविधाओं पर काम करेगी। इसके लिए रिसर्च और डेवलपमेंट में निवेश बढ़ाया जाएगा।
3. मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तार: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग पूरी करने के लिए कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता मजबूत करना चाहती है। इससे भारत में विकसित हेल्थकेयर उपकरणों का बड़े स्तर पर निर्माण संभव हो सकेगा।
4. अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां: कंपनी विभिन्न देशों में अस्पतालों, हेल्थकेयर प्रदाताओं और टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ साझेदारी करने की योजना बना रही है।
5. नए देशों में विस्तार: कंपनी UAE को अपने वैश्विक विस्तार का केंद्र बनाना चाहती है। इसके बाद अफ्रीका, अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में अवसर तलाशे जाएंगे।
1.2 करोड़ से ज्यादा हेल्थ स्क्रीनिंग का दावा
Clinics On Cloud के अनुसार, उसके हेल्थकेयर समाधानों की अब तक 3,500 से अधिक इंस्टॉलेशन हो चुकी हैं। कंपनी का दावा है कि उसके प्लेटफॉर्म के जरिए 1.2 करोड़ से ज्यादा स्वास्थ्य जांच की जा चुकी हैं और उसकी मौजूदगी आठ से अधिक देशों में है।
कंपनी के समाधान सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों, कॉरपोरेट संस्थानों और ग्रामीण समुदायों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। कंपनी ने भारतीय सेना, नौसेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) जैसे संस्थानों को भी अपनी सेवाएं देने की बात कही है। ये आंकड़े कंपनी की ओर से साझा किए गए हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित स्वास्थ्य परिणाम या इलाज की सफलता का प्रमाण नहीं समझना चाहिए।
UAE बनेगा अंतरराष्ट्रीय कारोबार का केंद्र
Clinics On Cloud की विस्तार योजना में UAE की अहम भूमिका रहने वाली है। कंपनी वहां से अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार को आगे बढ़ाना चाहती है। इसके बाद अफ्रीका, अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में प्रवेश की संभावनाएं तलाशने की योजना है।
विदेशों में हेल्थकेयर तकनीक पहुंचाना आसान नहीं होता। अलग-अलग देशों में मेडिकल उपकरणों की मंजूरी, स्वास्थ्य संबंधी नियम, डेटा सुरक्षा और स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतें अलग हो सकती हैं। इसलिए कंपनी को नए बाजारों में विस्तार के साथ अंतरराष्ट्रीय नियामकीय मानकों का पालन भी करना होगा।
यही वजह है कि कंपनी की फंडिंग का एक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय नियामकीय अनुपालन, तकनीकी विकास और स्थानीय साझेदारियां बनाने पर खर्च किया जाएगा।
भारत के हेल्थटेक सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह निवेश?
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच एक बड़ी चुनौती है। खासकर छोटे शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों और दूरदराज के इलाकों में लोगों को शुरुआती जांच और डॉक्टर से परामर्श के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है।
Health ATM और माइक्रोक्लिनिक जैसे मॉडल इस दूरी को कम करने में मदद कर सकते हैं। अगर इन सुविधाओं को सही मेडिकल निगरानी, प्रशिक्षित कर्मचारियों और डॉक्टरों से जुड़ी व्यवस्था के साथ संचालित किया जाए, तो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर हो सकती है।
Clinics On Cloud में आया 120 करोड़ रुपये का निवेश दिखाता है कि निवेशकों की दिलचस्पी अब ऐसे हेल्थटेक मॉडल में भी बढ़ रही है, जो डिजिटल तकनीक के साथ वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं को जोड़ते हैं।
हालांकि, कंपनी के सामने अब असली चुनौती इस मॉडल को बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक लागू करने की होगी। केवल हेल्थ स्क्रीनिंग की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। मरीजों को समय पर डॉक्टर की सलाह, सही जांच और जरूरत पड़ने पर इलाज तक पहुंचाना भी जरूरी है।
कुल मिलाकर, Clinics On Cloud की यह फंडिंग भारतीय हेल्थटेक सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण कारोबारी उपलब्धि है। अब देखना होगा कि कंपनी ₹120 करोड़ के इस निवेश की मदद से भारत में विकसित अपने Health ATM मॉडल को कितनी सफलता से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा पाती है।
