Entrackr की ओर से समीक्षा किए गए कंपनी के कंसोलिडेटेड वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, DeHaat का ऑपरेटिंग रेवेन्यू FY25 में 3,010 करोड़ रुपये था, जो FY26 में घटकर 2,715 करोड़ रुपये रह गया। कंपनी के लिए यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब वह अपने पुराने मार्केटप्लेस मॉडल से आगे बढ़कर खुद के ब्रांड और ज्यादा वैल्यू वाले कृषि उत्पादों पर ध्यान दे रही है।
रेवेन्यू में करीब 10 फीसदी की गिरावट
DeHaat के वित्तीय आंकड़ों में सबसे अहम बात यह है कि कंपनी का कारोबार अभी भी हजारों करोड़ रुपये के स्तर पर है, लेकिन सालाना आधार पर उसकी ऑपरेटिंग आय में गिरावट दर्ज की गई है। FY25 में कंपनी ने 3,010 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग रेवेन्यू हासिल किया था। FY26 में यह आंकड़ा 2,715 करोड़ रुपये पर आ गया। यानी एक साल में करीब 295 करोड़ रुपये की कमी आई। इस गिरावट के पीछे कंपनी की कारोबारी रणनीति में बदलाव एक महत्वपूर्ण पहलू है। पहले DeHaat मुख्य रूप से किसानों को कृषि इनपुट उपलब्ध कराने और उनकी उपज को बाजार तक पहुंचाने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में काम करती थी। अब कंपनी अपने इन-हाउस ब्रांड, कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और बेहतर मार्जिन वाले कारोबार पर जोर दे रही है। इस बदलाव का उद्देश्य केवल बिक्री बढ़ाना नहीं, बल्कि उत्पादों की गुणवत्ता, कीमत और सप्लाई चेन पर ज्यादा नियंत्रण हासिल करना भी है।
कृषि इनपुट से लेकर किसानों की उपज तक कारोबार
DeHaat का बिजनेस मॉडल कृषि क्षेत्र की अलग-अलग जरूरतों को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ने की कोशिश करता है। कंपनी किसानों को बीज, खाद और दूसरे कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने के साथ-साथ खेती से जुड़ी सलाह और उनकी उपज की बिक्री के लिए बाजार तक पहुंच भी प्रदान करती है। FY26 में कृषि इनपुट की बिक्री से कंपनी को 517 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला। इसमें बीज, उर्वरक और खेती में इस्तेमाल होने वाले अन्य उत्पाद शामिल हैं। यह कंपनी की कुल ऑपरेटिंग आय का करीब 19 फीसदी था। बाकी रेवेन्यू कृषि उपज के कारोबार से आया। इसमें अनाज, मिर्च और Farm Plus तथा HonestFarms जैसी उपभोक्ता-केंद्रित पहलों से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं। इस तरह कंपनी किसानों से सीधे जुड़ने के साथ-साथ कृषि उत्पादों को आगे के बाजारों तक पहुंचाने पर भी काम कर रही है।
भारत से मिलता है 83 फीसदी रेवेन्यू
DeHaat के लिए भारत अब भी सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। FY26 में कंपनी की कुल आय का करीब 83 फीसदी हिस्सा भारतीय बाजार से आया। शेष रेवेन्यू ब्रिटेन, यूरोप, मध्य पूर्व, थाईलैंड और रूस जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिला। कंपनी की विस्तार रणनीति में निर्यात और कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। Fortune India की रिपोर्ट के अनुसार, DeHaat ने कई देशों में कृषि उत्पादों की आपूर्ति का नेटवर्क बनाया है और फल, सब्जियों, दालों तथा मसालों की प्रोसेसिंग क्षमता विकसित की है। इस रणनीति के जरिए कंपनी केवल कच्ची कृषि उपज की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहना चाहती। प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और अपने ब्रांड के माध्यम से उत्पादों को ज्यादा मूल्य के साथ बाजार में उतारना उसका बड़ा लक्ष्य है।
खर्च घटा, फिर भी घाटा क्यों बढ़ा?
FY26 में DeHaat ने अपने कुल खर्चों में कमी की। कंपनी का कुल खर्च FY25 के 3,242 करोड़ रुपये से घटकर FY26 में 2,972 करोड़ रुपये रह गया। यह करीब 8.3 फीसदी की गिरावट है। कंपनी के लिए सबसे बड़ा खर्च कच्चे माल और उत्पादों की खरीद पर होता है। FY26 में इस मद पर करीब 2,390 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 11.7 फीसदी कम थे। कर्मचारियों से जुड़े खर्च भी 9.1 फीसदी घटकर 159 करोड़ रुपये रह गए। इसके बावजूद कंपनी का घाटा बढ़ गया। Entrackr के विश्लेषण के मुताबिक, FY26 में DeHaat का शुद्ध घाटा 224 करोड़ रुपये रहा, जबकि FY25 में तुलनीय आधार पर यह करीब 201 करोड़ रुपये था। यानी घाटे में लगभग 11.4 फीसदी की वृद्धि हुई।
यहां एक महत्वपूर्ण वित्तीय अंतर समझना जरूरी है। FY25 में कंपनी ने 369 करोड़ रुपये का रिपोर्टेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया था, लेकिन उस नतीजे पर प्रेफरेंस शेयरों के उचित मूल्य में बदलाव से मिले करीब 576 करोड़ रुपये के एकमुश्त गैर-नकद लाभ का बड़ा असर था। इसलिए केवल रिपोर्टेड प्रॉफिट की तुलना करके कंपनी की वास्तविक कारोबारी स्थिति समझना सही नहीं होगा। FY26 के विश्लेषण में 578 करोड़ रुपये की फेयर-वैल्यू आय को अलग रखकर घाटे का आकलन किया गया है।
DeHaat के सामने आगे की चुनौती
कंपनी की रणनीति का बड़ा सवाल यह है कि क्या अपने ब्रांड और प्रोसेसिंग कारोबार को बढ़ाकर वह भविष्य में बेहतर मार्जिन हासिल कर पाएगी। खुद के ब्रांड होने से कंपनी को उत्पादों की कीमत, गुणवत्ता और बाजार में उनकी उपलब्धता पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है। लेकिन इस मॉडल को सफल बनाने के लिए सप्लाई चेन, ब्रांडिंग, वितरण और ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने में लगातार निवेश करना होगा।
Entrackr के विश्लेषण के मुताबिक, FY26 में कंपनी ने हर एक रुपये का ऑपरेटिंग रेवेन्यू कमाने के लिए करीब 1.09 रुपये खर्च किए। उसका EBITDA मार्जिन करीब 6 फीसदी और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) -53.9 फीसदी रहा। ये संकेत बताते हैं कि बड़े कारोबार के बावजूद पूंजी के प्रभावी इस्तेमाल और मुनाफे में सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।
DeHaat की कहानी भारतीय एग्रीटेक सेक्टर के बदलते दौर को भी दिखाती है। अब निवेशकों और कंपनियों के लिए केवल तेजी से बढ़ती बिक्री पर्याप्त नहीं है। कारोबार को टिकाऊ बनाना, खर्च नियंत्रित करना और नियमित मुनाफे की दिशा में आगे बढ़ना भी उतना ही जरूरी हो गया है।
FY26 में 2,715 करोड़ रुपये का रेवेन्यू DeHaat के बड़े कारोबारी पैमाने को दिखाता है, लेकिन रेवेन्यू में गिरावट और बढ़ता घाटा कंपनी के सामने मौजूद चुनौतियों को भी उजागर करता है। आने वाले वित्त वर्षों में यह देखना अहम होगा कि इन-हाउस ब्रांड और वैल्यू-एडेड कृषि उत्पादों पर उसका दांव कितना सफल साबित होता है।
