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IPO से पहले Cult.fit से जुड़ा विवाद: ऋषभ तेलंग ने दीपक पोडुवाल के जालसाजी के आरोपों से किया इनकार

IPO की तैयारी कर रही फिटनेस कंपनी Cult.fit से जुड़े ऋषभ तेलंग ने पूर्व सह-संस्थापक दीपक पोडुवाल द्वारा लगाए गए कथित जालसाजी के आरोपों को खारिज किया है। बेंगलुरु की बेलंदूर पुलिस ने 6 अगस्त 2026 को पोडुवाल की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की। विवाद पुरानी कंपनी Cult Fitness Private Limited के बंद किए जाने से संबंधित दस्तावेजों और 2016 के एक एसेट व बौद्धिक संपदा लेनदेन से जुड़ा है। आरोपों पर अभी किसी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है।

IPO से पहले Cult.fit से जुड़ा विवाद: ऋषभ तेलंग ने दीपक पोडुवाल के जालसाजी के आरोपों से किया इनकार
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Inc42

क्या है पूरा मामला?

Cult.fit से जुड़े एक पुराने कॉरपोरेट विवाद ने कंपनी की प्रस्तावित शेयर बाजार लिस्टिंग से पहले ध्यान खींचा है। Cult Fitness Private Limited के सह-संस्थापक रहे दीपक पोडुवाल ने ऋषभ तेलंग पर कथित तौर पर उनके हस्ताक्षर की जालसाजी करने का आरोप लगाया है।

बेलंदूर पुलिस ने 6 अगस्त को दर्ज FIR में तेलंग और Cult Fitness Private Limited को आरोपी बनाया है। शिकायत में जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश समेत कई आरोप लगाए गए हैं।

हालांकि, ये अभी शिकायत और FIR में लगाए गए आरोप हैं और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए इनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण होना बाकी है।

दीपक पोडुवाल ने क्या आरोप लगाए?

पोडुवाल का आरोप है कि 2019 में Registrar of Companies के पास दाखिल किए गए कुछ दस्तावेजों में उनके कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया। ये दस्तावेज Cult Fitness Private Limited को बंद करने की प्रक्रिया से जुड़े बताए गए हैं।

पोडुवाल के मुताबिक, उन्हें इन फाइलिंग्स की जानकारी बाद में Ministry of Corporate Affairs के रिकॉर्ड देखने के दौरान मिली। उनका दावा है कि कंपनी बंद होने के बाद उनकी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी समाप्त हो गई और इसके बदले उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला।

यह दावा विवाद का एक प्रमुख हिस्सा है और तेलंग तथा दूसरी ओर से इससे जुड़े तथ्यों को चुनौती दी गई है।

ऋषभ तेलंग ने आरोपों से किया इनकार

ऋषभ तेलंग ने पोडुवाल के हस्ताक्षर की जालसाजी करने के आरोप को स्पष्ट रूप से खारिज किया है।

उनका पक्ष है कि पोडुवाल CultFit Healthcare Private Limited के साथ हुए संबंधित लेनदेन और Cult Fitness Private Limited को बंद करने की प्रक्रिया से अवगत थे। तेलंग का कहना है कि उनके पास इस संबंध में पत्राचार भी मौजूद है।

तेलंग ने मार्च 2020 के Ministry of Corporate Affairs से जुड़े एक कम्युनिकेशन का भी हवाला दिया है, जो उनके मुताबिक कंपनी के winding-up से संबंधित था और पोडुवाल के साथ भी साझा किया गया था।

तेलंग का कहना है कि आरोपों में कोई दम नहीं है और वास्तविक स्थिति कानूनी प्रक्रिया के दौरान सामने आएगी।

Cult.fit ने विवाद से खुद को किया अलग

Cult.fit ने कहा है कि वर्तमान Cult.fit Limited और उसकी subsidiaries FIR में आरोपी नहीं हैं।

कंपनी के अनुसार, FIR में शामिल Cult Fitness Private Limited एक अलग कंपनी थी और मौजूदा Cult.fit का उस इकाई पर ownership या management control नहीं था।

कंपनी का पक्ष है कि उसकी subsidiary CultFit Healthcare Private Limited ने 2016 में Cult Fitness और पोडुवाल से कुछ assets तथा intellectual property rights अनुबंधों के तहत हासिल किए थे। इनमें 'Cult - The Workout Station' ब्रांड से जुड़े अधिकार भी शामिल थे।

Cult.fit का दावा है कि इस सौदे के लिए तय consideration का भुगतान किया गया था और उसे स्वीकार भी किया गया था।

भुगतान को लेकर भी दोनों पक्ष आमने-सामने

इस विवाद में भुगतान का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। तेलंग का दावा है कि पोडुवाल को संबंधित समझौते के तहत भुगतान मिला था।

दूसरी ओर, पोडुवाल इस दावे से असहमति जता रहे हैं। इसलिए भुगतान, शेयरहोल्डिंग और पुराने कॉरपोरेट रिकॉर्ड से जुड़े तथ्य जांच और संभावित कानूनी कार्यवाही में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

FIR की टाइमिंग पर भी उठे सवाल

तेलंग ने शिकायत की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने जुलाई 2026 में शुरू हुए एक अलग पारिवारिक संपत्ति विवाद का उल्लेख करते हुए संकेत दिया है कि मौजूदा शिकायत उस विवाद से जुड़ी हो सकती है।

यह तेलंग का पक्ष है और इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा है कि वे FIR में लगाए गए आरोपों का जवाब उचित कानूनी मंच पर देंगे और अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।

IPO से पहले क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि Cult.fit शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने IPO के जरिए ₹950 करोड़ तक की fresh issue राशि जुटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

ऐसे समय में किसी कंपनी या उससे जुड़े प्रमुख लोगों से संबंधित कानूनी विवाद निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। IPO प्रक्रिया में corporate governance, पुराने लेनदेन, कानूनी जोखिम और disclosures जैसे पहलुओं पर विशेष नजर रहती है।

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है—Cult.fit का कहना है कि FIR में नामित Cult Fitness Private Limited मौजूदा Cult.fit Limited और उसकी subsidiaries से अलग इकाई है।

संतुलित विश्लेषण

मामले में फिलहाल दो बिल्कुल अलग दावे सामने हैं। पोडुवाल कथित फर्जी हस्ताक्षर, कंपनी बंद किए जाने और अपनी हिस्सेदारी समाप्त होने को लेकर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। वहीं तेलंग इन आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं कि पोडुवाल संबंधित प्रक्रियाओं से पूरी तरह अवगत थे।

Cult.fit ने भी मौजूदा कंपनी को FIR में शामिल पुरानी इकाई से अलग बताते हुए कहा है कि संबंधित assets और intellectual property का अधिग्रहण उचित contractual arrangements के जरिए किया गया था।

इसलिए किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम निष्कर्ष मानना अभी जल्दबाजी होगी। जांच, दस्तावेजों की सत्यता और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितना आधार है।

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