BYJU’S की बिक्री प्रक्रिया पर अस्थायी विराम, NCLT के आदेश से संस्थापकों को सीमित राहत
क्या है पूरा मामला?
BYJU’S की मूल कंपनी थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड लंबे समय से वित्तीय, कानूनी और ऋण संबंधी विवादों का सामना कर रही है। कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया जुलाई 2024 में शुरू हुई थी, जब NCLT की बेंगलुरु पीठ ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के भुगतान विवाद से जुड़ी याचिका स्वीकार की थी। आधिकारिक दिवालिया रिकॉर्ड में 16 जुलाई 2024 को कंपनी की कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया में प्रवेश की पुष्टि दर्ज है।
अब NCLT ने आदेश दिया है कि कंपनी के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल 31 अगस्त 2026 तक फॉर्म G जारी न करें। फॉर्म G वह औपचारिक सूचना होती है, जिसके माध्यम से दिवालिया कंपनी के लिए संभावित निवेशकों और खरीदारों से अभिरुचि पत्र आमंत्रित किए जाते हैं। ट्रिब्यूनल ने संभावित समाधान आवेदकों की सूची को अंतिम रूप देने पर भी अस्थायी रोक लगा दी है।
संस्थापकों ने क्यों मांगी थी रोक?
BYJU’S के संस्थापकों ने अमेरिकी ऋणदाताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले GLAS Trust के अधिकार और उसके द्वारा प्रस्तुत दावे की राशि को चुनौती दी है। उनकी ओर से दलील दी गई कि जिन ऋणदाताओं के नाम पर GLAS कार्रवाई कर रहा है, उनमें से सभी ने कथित प्राधिकरण दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
संस्थापकों ने यह भी तर्क दिया कि विदेशों में कंपनी की संपत्तियों से हुई संभावित वसूली को ऋणदाताओं के दावों में समायोजित किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, GLAS Trust और रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने इन दलीलों का विरोध किया है। इन्हीं विवादों पर आगे सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल ने मामले को 31 अगस्त तक सूचीबद्ध किया है।
यह पूरी दिवालिया प्रक्रिया पर रोक नहीं
NCLT के आदेश को BYJU’S के संस्थापकों के लिए अस्थायी राहत माना जा रहा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कंपनी के खिलाफ चल रही पूरी दिवालिया प्रक्रिया रुक गई है।
फिलहाल केवल खरीदारों को आमंत्रित करने और संभावित समाधान आवेदकों की सूची को अंतिम रूप देने की कार्रवाई पर रोक लगी है। लेनदार समिति, लंबित दावों, BCCI समझौते और अन्य कानूनी विवादों से जुड़ी कार्यवाही जारी रह सकती है।
इसलिए इसे कंपनी की कानूनी जीत या दिवालिया प्रक्रिया समाप्त होने के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।

BCCI के ₹158 करोड़ के समझौते पर भी फैसला लंबित
BYJU’S और BCCI के बीच लगभग ₹158 करोड़ के भुगतान समझौते का मुद्दा अब भी अनसुलझा है। कंपनी की लेनदार समिति कई बैठकों के बावजूद इस समझौते को मंजूर या अस्वीकार करने पर अंतिम निर्णय नहीं ले सकी है। मार्च 2026 के बाद समिति की आठ बैठकें हो चुकी थीं, जिनमें से तीन बैठकें NCLT के 29 जून के उस निर्देश के बाद हुईं, जिसमें मामले पर शीघ्र फैसला लेने को कहा गया था।
यदि लेनदार समिति समझौते को स्वीकार करती है और NCLT उसे मंजूरी देता है, तो दिवालिया प्रक्रिया समाप्त होने का रास्ता खुल सकता है और BCCI को भुगतान किया जा सकता है। यदि प्रस्ताव खारिज होता है, तो एस्क्रो खाते में जमा रकम रीजू रवींद्रन को लौट सकती है और दिवालिया प्रक्रिया जारी रह सकती है।
NCLT ने यह भी निर्देश दिया है कि समझौते की राशि को किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में ब्याज देने वाली सावधि जमा में रखा जाए और ट्रिब्यूनल की अनुमति के बिना उसका उपयोग न किया जाए। BCCI से संबंधित आवेदन पर अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 के लिए सूचीबद्ध की गई है।
कंपनी के खरीदार की तलाश क्यों महत्वपूर्ण है?
दिवालिया समाधान प्रक्रिया में संभावित खरीदार या निवेशक की तलाश कंपनी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होती है। कोई निवेशक कंपनी के कारोबार, तकनीक, ब्रांड, बौद्धिक संपदा या अन्य परिसंपत्तियों को एक समाधान योजना के माध्यम से हासिल कर सकता है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल कर्ज वसूली नहीं, बल्कि संभव होने पर कंपनी को चालू कारोबार के रूप में बचाना भी होता है। यदि व्यवहार्य समाधान योजना नहीं मिलती, तो आगे चलकर परिसमापन का खतरा बढ़ सकता है।
BYJU’S के मामले में खरीदार खोजने की प्रक्रिया पर रोक से समाधान की समयसीमा और लंबी हो सकती है। इससे लेनदारों, कर्मचारियों, ग्राहकों और अन्य हितधारकों के लिए अनिश्चितता बनी रहेगी।
BYJU’S संकट की पृष्ठभूमि
BYJU’S कभी भारत के सबसे मूल्यवान स्टार्टअप्स में शामिल था और 2022 में इसका मूल्यांकन करीब 22 अरब डॉलर तक पहुंचा था। बाद के वर्षों में कंपनी को नकदी संकट, बोर्ड सदस्यों के इस्तीफों, ऑडिटर के हटने, निवेशकों के साथ विवाद और ऋण भुगतान से संबंधित कानूनी मामलों का सामना करना पड़ा।
BCCI ने कथित रूप से बकाया प्रायोजन राशि को लेकर दिवालिया कार्यवाही शुरू कराई थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ, लेकिन अक्टूबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उस समझौते को मंजूरी देने वाले अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि समझौता निर्धारित दिवालिया प्रक्रिया के माध्यम से NCLT के सामने रखा जाना चाहिए था।
इस आदेश का लेनदारों पर क्या असर होगा?
खरीदार तलाशने की प्रक्रिया रुकने से लेनदारों को समाधान के लिए अधिक इंतजार करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, यदि संस्थापकों की ओर से GLAS Trust के अधिकार या दावा राशि पर उठाए गए प्रश्न महत्वपूर्ण पाए जाते हैं, तो समाधान प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पहले इनका निपटारा आवश्यक हो सकता है।
लेनदारों के लिए मुख्य चुनौती यह है कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान कंपनी की परिसंपत्तियों और परिचालन मूल्य को नुकसान न पहुंचे। किसी संकटग्रस्त कंपनी में देरी से ब्रांड वैल्यू, कर्मचारी क्षमता और कारोबारी संपत्तियों का मूल्य कम होने का जोखिम बना रहता है।
कर्मचारियों और ग्राहकों के लिए क्या मायने रखता है फैसला?
BYJU’S से जुड़े कर्मचारियों, शिक्षकों, ग्राहकों और सेवा प्रदाताओं के लिए यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि कंपनी की अंतिम समाधान योजना से वेतन, लंबित भुगतान, पाठ्यक्रमों की निरंतरता और अन्य दावों का भविष्य तय हो सकता है।
अदालत का मौजूदा आदेश इन मुद्दों का अंतिम समाधान नहीं देता। यह केवल कुछ समय के लिए बोली प्रक्रिया को रोकता है, ताकि संबंधित कानूनी आपत्तियों और ऋणदाताओं के अधिकारों की समीक्षा की जा सके।
संतुलित विश्लेषण
NCLT का आदेश BYJU’S के संस्थापकों को सीमित राहत देता है, क्योंकि कंपनी के लिए खरीदार खोजने की प्रक्रिया तत्काल आगे नहीं बढ़ेगी। इससे उन्हें GLAS Trust के अधिकार और ऋण दावे से संबंधित अपनी आपत्तियां रखने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।
हालांकि, लंबी अवधि में यह देरी कंपनी के पुनरुद्धार के लिए चुनौती भी बन सकती है। दिवालिया मामलों में समय का विशेष महत्व होता है, क्योंकि प्रत्येक देरी से संपत्ति मूल्य घटने और निवेशकों की रुचि कमजोर होने की आशंका रहती है।
दूसरी तरफ, यदि बोली प्रक्रिया विवादित ऋण दावों या अधूरे प्राधिकरण के आधार पर आगे बढ़ती है, तो भविष्य की समाधान योजना नए मुकदमों में फंस सकती है। इस दृष्टि से ट्रिब्यूनल का सावधानीपूर्ण रुख प्रक्रिया की कानूनी वैधता सुनिश्चित करने का प्रयास माना जा सकता है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर 31 अगस्त 2026 की अगली सुनवाई पर रहेगी। NCLT उस दिन संस्थापकों की आपत्तियों, GLAS Trust की स्थिति और रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की दलीलों पर आगे विचार कर सकता है।
इसके बाद ट्रिब्यूनल तय कर सकता है कि फॉर्म G जारी करने की अनुमति दी जाए, रोक को आगे बढ़ाया जाए या खरीदार तलाशने की प्रक्रिया के लिए नए निर्देश जारी किए जाएं।
इसके अलावा 15 सितंबर को BCCI के ₹158 करोड़ के समझौते से जुड़े आवेदन पर सुनवाई भी महत्वपूर्ण होगी। उस फैसले का असर पूरी दिवालिया प्रक्रिया की दिशा पर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
NCLT द्वारा BYJU’S की दिवालिया बोली प्रक्रिया पर 31 अगस्त तक लगाई गई रोक कंपनी के लंबे कानूनी और वित्तीय संकट का एक और महत्वपूर्ण चरण है। यह आदेश संस्थापकों को अस्थायी राहत देता है, लेकिन कंपनी को दिवालिया कार्यवाही से बाहर नहीं निकालता।
आने वाली सुनवाइयों में GLAS Trust के दावों, BCCI समझौते, लेनदार समिति के निर्णय और संभावित निवेशकों की भूमिका पर स्पष्टता मिल सकती है। फिलहाल BYJU’S का भविष्य अदालत, लेनदारों और समाधान प्रक्रिया में शामिल विभिन्न पक्षों के फैसलों पर निर्भर बना हुआ है।
