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PM Modi का BRICS के लिए बड़ा Startup प्लान: हर साल 100 स्टार्टअप्स को दूसरे सदस्य देशों में विस्तार का प्रस्ताव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS Business Forum 2026 में सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए तीन मापने योग्य लक्ष्य सुझाए हैं। इनमें हर साल 100 BRICS स्टार्टअप्स को दूसरे सदस्य देशों के बाजारों में विस्तार करने में मदद, शीर्ष 10 व्यापार बाधाओं को दूर करने की दिशा में रिपोर्ट तैयार करना और कंपनियों के बीच 1,000 नई साझेदारियां विकसित करना शामिल है। मोदी ने इन लक्ष्यों की प्रगति की हर साल समीक्षा करने की भी बात कही।

PM Modi का BRICS के लिए बड़ा Startup प्लान: हर साल 100 स्टार्टअप्स को दूसरे सदस्य देशों में विस्तार का प्रस्ताव
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

नई दिल्ली में BRICS के सामने मोदी का स्टार्टअप एजेंडा

नई दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदस्य देशों के बीच कारोबारी और स्टार्टअप सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए एक महत्वाकांक्षी एजेंडा पेश किया। उन्होंने BRICS Business Council के सामने प्रस्ताव रखा कि समूह ऐसा ढांचा विकसित करने पर विचार करे, जिसके जरिए हर साल 100 BRICS स्टार्टअप्स को दूसरे सदस्य देशों के बाजारों में विस्तार करने में सहायता मिल सके।

यह प्रस्ताव केवल स्टार्टअप फंडिंग तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य BRICS देशों के बीच बाजार पहुंच, निवेश, उद्यमिता और कारोबारी साझेदारियों को मजबूत करना है।

प्रधानमंत्री ने इसे तीन मापने योग्य लक्ष्यों से जोड़ा—BRICS देशों के बीच शीर्ष 10 व्यापार बाधाओं को हटाने की दिशा में काम, हर साल 100 स्टार्टअप्स के सीमा-पार विस्तार को समर्थन और सदस्य देशों के व्यवसायों के बीच 1,000 नई साझेदारियां विकसित करना।

उन्होंने इन तीनों मानकों पर प्रगति की वार्षिक समीक्षा करने का सुझाव भी दिया।

100 स्टार्टअप्स के लिए क्या है प्रस्ताव?

प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS Business Council से सवाल किया कि क्या हर साल 100 BRICS स्टार्टअप्स को दूसरे सदस्य देशों के बाजारों में अपना कारोबार बढ़ाने में सहायता दी जा सकती है।

इस प्रस्ताव का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि किसी स्टार्टअप के लिए विदेश में विस्तार केवल पूंजी जुटाने का मामला नहीं होता। नए बाजार में प्रवेश के लिए स्थानीय नियमों, कारोबारी नेटवर्क, निवेशकों, साझेदारों और ग्राहकों तक पहुंच भी महत्वपूर्ण होती है।

BRICS स्तर पर साझा सहयोग तंत्र मजबूत होने से सदस्य देशों के स्टार्टअप्स के लिए इन बाधाओं को कम करने की संभावनाएं बन सकती हैं।

हालांकि, 100 स्टार्टअप्स का आंकड़ा प्रधानमंत्री द्वारा BRICS Business Council के सामने रखे गए लक्ष्य का हिस्सा है। इसे किसी ऐसी गारंटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए कि प्रत्येक वर्ष निश्चित रूप से 100 कंपनियों को वित्तीय सहायता मिलेगी।

BRICS Incubator Network और Startup Innovation Fund पर भी जोर

भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता के दौरान स्टार्टअप और छोटे व्यवसायों के लिए सहयोग का संस्थागत ढांचा भी आगे बढ़ा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में BRICS Incubator Network, BRICS MSME Portal और BRICS Startup Innovation Fund जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य स्टार्टअप्स और छोटे एवं मध्यम उद्यमों को बाजार तथा वित्त से जोड़ना है।

इसके बाद जारी New Delhi Declaration में BRICS Incubator Network की स्थापना का स्वागत किया गया। घोषणा में संभावित BRICS Startup Innovation Fund पर आगे विचार करने की बात भी कही गई, जिसे नवाचार आधारित विकास के लिए स्टार्टअप्स को गति देने वाले संभावित तंत्र के रूप में देखा गया है।

इस अंतर को समझना महत्वपूर्ण है: Incubator Network को घोषणा में स्थापित पहल के रूप में स्वीकार किया गया है, जबकि Startup Innovation Fund पर अभी आगे विचार किया जाना है।

10 व्यापार बाधाएं और 1,000 नई बिजनेस पार्टनरशिप

स्टार्टअप प्रस्ताव प्रधानमंत्री के व्यापक तीन सूत्री कारोबारी एजेंडे का एक हिस्सा है।

उन्होंने BRICS Business Council से सदस्य देशों के बीच कारोबार को प्रभावित करने वाली शीर्ष 10 व्यापार बाधाओं की पहचान कर उन्हें दूर करने की दिशा में रिपोर्ट तैयार करने को कहा।

दूसरा लक्ष्य हर साल 100 BRICS स्टार्टअप्स को दूसरे सदस्य बाजारों में विस्तार में मदद करना है।

तीसरे लक्ष्य के तहत सदस्य देशों की कंपनियों के बीच 1,000 नई कारोबारी साझेदारियां विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया।

इन लक्ष्यों को संख्यात्मक रूप देने का उद्देश्य BRICS के आर्थिक सहयोग को सामान्य घोषणाओं से आगे ले जाकर ऐसे नतीजों से जोड़ना है जिनकी प्रगति को समय के साथ मापा जा सके।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS की बढ़ती भूमिका

मोदी ने अपने संबोधन में BRICS के आर्थिक आकार का उल्लेख करते हुए कहा कि समूह के देश दुनिया की लगभग 50% आबादी, 40% वैश्विक GDP और 25% से अधिक वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उनके मुताबिक, जिन वर्षों में वैश्विक GDP लगभग 2.5 गुना बढ़ी, उसी अवधि में BRICS देशों की संयुक्त GDP करीब 4.5 गुना हुई।

प्रधानमंत्री ने BRICS देशों को वैश्विक नवाचार और समाधान विकसित करने वाले महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में भी पेश किया।

यह आर्थिक आकार सीमा-पार स्टार्टअप सहयोग को खास महत्व देता है। यदि सदस्य देशों के बीच बाजार पहुंच और संस्थागत सहयोग आसान होता है, तो स्टार्टअप्स के लिए अपने घरेलू बाजार से बाहर जाने के नए रास्ते खुल सकते हैं।

व्यापार बाधाओं के बीच भारत का 'Economic Bridges' पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में व्यापार बाधाएं बढ़ने के समय भारत आर्थिक पुल बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

उन्होंने बताया कि 2014 के बाद भारत ने करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं और BRICS के भीतर भी भारत का दृष्टिकोण बाधाओं को कम कर व्यवसायों के लिए अवसर बढ़ाने का है।

उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, कौशल और स्मार्ट ग्रिड जैसे क्षेत्रों में भारत की अध्यक्षता के दौरान स्थापित सहयोग नेटवर्क का भी उल्लेख किया।

महिला उद्यमियों को भी BRICS विकास रणनीति में जगह

मोदी ने BRICS Women's Business Alliance को समूह की आर्थिक दृष्टि का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

उन्होंने कहा कि भारत में आयोजित Alliance की बैठक में करीब 200 महिला बिजनेस लीडर्स ने हिस्सा लिया।

यह पहल संकेत देती है कि BRICS की उद्यमिता रणनीति केवल बड़ी कंपनियों या तकनीकी स्टार्टअप्स पर केंद्रित नहीं है, बल्कि महिला नेतृत्व वाले व्यवसायों और व्यापक कारोबारी भागीदारी को भी शामिल करने का प्रयास कर रही है।

स्टार्टअप्स के लिए आगे क्या बदल सकता है?

BRICS के भीतर 100 स्टार्टअप्स के वार्षिक विस्तार का लक्ष्य तभी ठोस परिणाम देगा जब सदस्य देश इसे स्पष्ट चयन प्रक्रिया, बाजार पहुंच, नियामकीय सहयोग, निवेश नेटवर्क और कारोबारी साझेदारियों से जोड़ते हैं।

BRICS Incubator Network इस दिशा में एक संस्थागत आधार प्रदान कर सकता है। वहीं प्रस्तावित Startup Innovation Fund को लेकर आगे की चर्चा यह तय करेगी कि वित्तीय सहायता का ढांचा किस रूप में विकसित होता है।

इसलिए फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा को एक मापने योग्य नीति लक्ष्य के रूप में देखना अधिक सटीक है, जबकि इसके क्रियान्वयन की विस्तृत प्रक्रिया आगे विकसित होगी।


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