इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व MGF Kavachh ने किया है। कंपनी इस निवेश का इस्तेमाल भारतीय नौसेना के साथ अपने ₹66 करोड़ के प्रोजेक्ट को पूरा करने, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को मजबूत बनाने और स्वदेशी अंडरवॉटर रोबोट के निर्माण की क्षमता बढ़ाने में करेगी। यह निवेश ऐसे समय में आया है, जब भारत रक्षा उपकरणों के निर्माण में विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करके स्वदेशी समाधान विकसित करने पर जोर दे रहा है।
₹18 करोड़ की फंडिंग से मजबूत होगी कंपनी की तकनीक
Coratia Technologies ने 29 अक्टूबर 2026 को ₹18 करोड़ की ब्रिज फंडिंग जुटाने की जानकारी दी। इस निवेश का नेतृत्व MGF Kavachh ने किया है, जो कंपनी में पहले भी निवेश कर चुका है। इससे पहले वर्ष 2025 में Coratia ने प्री-सीरीज A राउंड के तहत लगभग ₹17 करोड़ जुटाए थे। इस निवेश में MGF Kavachh के साथ अन्य निवेशकों ने भी भाग लिया था।
नई फंडिंग कंपनी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अंडरवॉटर रोबोटिक्स एक ऐसा क्षेत्र है, जहां मशीनों को बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। समुद्र के अंदर तेज धाराएं, कम रोशनी, गाद, अधिक दबाव और सीमित दृश्यता जैसी चुनौतियां होती हैं। ऐसे वातावरण में काम करने वाले रोबोट तैयार करने के लिए विशेष इंजीनियरिंग, सेंसर, नेविगेशन सिस्टम और लगातार तकनीकी परीक्षण की जरूरत होती है। कंपनी के अनुसार, नई पूंजी का इस्तेमाल इन तकनीकों को बेहतर बनाने के साथ-साथ उत्पादन और तैनाती की क्षमता बढ़ाने में किया जाएगा।
भारतीय नौसेना के लिए ₹66 करोड़ का प्रोजेक्ट
Coratia Technologies की सबसे बड़ी उपलब्धियों में भारतीय नौसेना के साथ मिला ₹66 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट शामिल है। यह कॉन्ट्रैक्ट सितंबर 2025 में रक्षा मंत्रालय की Innovations for Defence Excellence (iDEX) पहल के तहत दिया गया था।
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी अंडरवॉटर रोबोटिक सिस्टम विकसित करना और उनकी आपूर्ति करना है। रिपोर्टों के अनुसार, इस कार्यक्रम में Jalasimha और Jaladuta जैसे अंडरवॉटर रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (UWROV) तथा Navya ऑटोनॉमस सरफेस व्हीकल शामिल हैं।
इन मशीनों का इस्तेमाल समुद्र के नीचे सर्वे करने, जहाजों के बाहरी हिस्सों की जांच, सोनार मैपिंग, पानी के नीचे मौजूद ढांचों का निरीक्षण और सीमित बचाव एवं रिकवरी कार्यों में किया जा सकता है।
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जिन जगहों पर गोताखोरों के लिए पहुंचना मुश्किल या जोखिम भरा होता है, वहां रोबोट की मदद से निरीक्षण किया जा सकता है। इससे नौसेना को समुद्री अभियानों में सुरक्षा और तकनीकी सहायता मिल सकती है।
क्या खास है Coratia का Jalasimha अंडरवॉटर रोबोट?
Coratia Technologies का प्रमुख उत्पाद Jalasimha है, जिसे समुद्र के अंदर कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए विकसित किया गया है। यह एक Underwater Remotely Operated Vehicle (ROV) है। यानी इसे पानी के ऊपर मौजूद ऑपरेटर द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।
इस रोबोट में कैमरे, सोनार और अन्य विशेष सेंसर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इनकी मदद से समुद्र के अंदर मौजूद वस्तुओं, संरचनाओं और जहाजों की स्थिति का निरीक्षण किया जा सकता है।
कंपनी की तकनीकी जानकारी के अनुसार, Jalasimha को 300 मीटर तक की गहराई में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें इस्तेमाल होने वाली तकनीक समुद्र के अंदर कम दृश्यता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी डेटा जुटाने में मदद करती है।
इसकी कुछ प्रमुख उपयोगिताएं हैं:
Sonar Mapping: समुद्र के नीचे मौजूद क्षेत्रों का नक्शा तैयार करना।
Ship Inspection: जहाजों के निचले हिस्से और बाहरी संरचना की जांच करना।
Underwater Surveillance: पानी के नीचे मौजूद वस्तुओं और गतिविधियों का निरीक्षण करना।
Infrastructure Monitoring: समुद्र के नीचे पाइपलाइन और अन्य संरचनाओं की स्थिति जांचना।
Salvage Operations: पानी में डूबी वस्तुओं की पहचान और सीमित रिकवरी कार्यों में सहायता करना।
इस तरह के रोबोट नौसेना के अलावा औद्योगिक और समुद्री बुनियादी ढांचे की निगरानी में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
समुद्र में गोताखोरों का जोखिम कम करने में मिलेगी मदद
समुद्र के अंदर किसी भी प्रकार का निरीक्षण करना आसान काम नहीं है। कई बार गोताखोरों को सीमित दृश्यता, पानी के दबाव और तेज धाराओं के बीच काम करना पड़ता है। ऐसे अभियानों में दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
अंडरवॉटर रोबोट इस समस्या का एक तकनीकी समाधान बन सकते हैं। इन्हें पानी के अंदर भेजकर कैमरों और सेंसर की मदद से जरूरी जानकारी जुटाई जा सकती है। इससे हर निरीक्षण के लिए गोताखोरों को खतरनाक परिस्थितियों में भेजने की आवश्यकता कम हो सकती है।
इसके अलावा, रोबोट से प्राप्त डेटा का विश्लेषण करके किसी जहाज, पुल, बांध या पाइपलाइन में संभावित नुकसान का पता लगाने में भी मदद मिल सकती है।
भारत जैसे देश के लिए यह तकनीक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की समुद्री सीमाएं लंबी हैं और समुद्री व्यापार, बंदरगाहों, जहाजों तथा अंडरसी केबल नेटवर्क का आर्थिक महत्व लगातार बढ़ रहा है।
भारतीय नौसेना के अलावा इन सेक्टरों में भी है बड़ा बाजार
Coratia Technologies की व्यावसायिक संभावनाएं केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। कंपनी के अंडरवॉटर रोबोट का इस्तेमाल कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। कंपनी के ग्राहकों और साझेदारों में Indian Oil, Indian Railways, Tata Steel, Hindalco Industries, Steel Authority of India (SAIL), Jindal Steel and Power और NIT Rourkela जैसे नाम शामिल हैं। इन संस्थानों के लिए पानी के नीचे मौजूद औद्योगिक ढांचों, पाइपलाइनों, जलाशयों और अन्य संरचनाओं का निरीक्षण महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा, बंदरगाहों, समुद्री पुलों, बांधों, अपतटीय ऊर्जा परियोजनाओं और समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों की जांच में भी ऐसी तकनीक की मांग बढ़ सकती है। यही कारण है कि कंपनी अपनी तकनीक को रक्षा और औद्योगिक दोनों बाजारों के लिए विकसित करने पर ध्यान दे रही है।
ओडिशा से शुरू हुआ स्टार्टअप, अब डीप-टेक सेक्टर में बना रहा पहचान
Coratia Technologies की स्थापना Debendra Pradhan और Biswajit Swain ने की थी। कंपनी की शुरुआत NIT Rourkela से जुड़े अंडरवॉटर रोबोटिक्स रिसर्च और इंजीनियरिंग अनुभव से हुई। दोनों संस्थापकों ने महसूस किया कि भारत में समुद्र के अंदर निरीक्षण के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करने की काफी संभावनाएं हैं।
इसके बाद उन्होंने वर्ष 2021 में कंपनी को पूर्ण रूप से आगे बढ़ाना शुरू किया। शुरुआती दौर में कंपनी ने तकनीक विकसित करने, प्रोटोटाइप तैयार करने और अलग-अलग परिस्थितियों में रोबोट का परीक्षण करने पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे कंपनी ने रक्षा और औद्योगिक क्षेत्र में अपनी तकनीक की उपयोगिता साबित करने की दिशा में काम किया। भारतीय नौसेना का ₹66 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट इसी सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। अब ₹18 करोड़ की नई फंडिंग कंपनी को अपने उत्पादों को बड़े स्तर पर विकसित करने और बाजार में उनकी तैनाती बढ़ाने में मदद कर सकती है।
नई समुद्री तकनीक के लिए NRDC और NIOT के साथ भी साझेदारी
Coratia Technologies की गतिविधियां केवल अंडरवॉटर रोबोट तक सीमित नहीं हैं। कंपनी ने समुद्री अनुसंधान और डेटा कलेक्शन के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अक्टूबर 2026 में National Research Development Corporation (NRDC) ने National Institute of Ocean Technology (NIOT), चेन्नई द्वारा विकसित Autonomous Underwater Profiling Drifter (AUPD) तकनीक Coratia को लाइसेंसिंग समझौते के तहत हस्तांतरित की। यह उपकरण समुद्र में तापमान, लवणता और गहराई से जुड़े आंकड़े एकत्र कर सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह 2,000 मीटर तक की गहराई में समुद्री परिस्थितियों का अध्ययन करने में सक्षम है और सैटेलाइट के माध्यम से डेटा भेज सकता है। इस तकनीक का इस्तेमाल समुद्री जलवायु परिवर्तन, महासागर अनुसंधान, समुद्री पारिस्थितिकी और भविष्यवाणी से जुड़े अध्ययनों में किया जा सकता है। यह साझेदारी भारत की ब्लू इकोनॉमी और स्वदेशी समुद्री तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
भारत के DeepTech और Defence Startup सेक्टर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह निवेश?
भारत में रक्षा उपकरणों और महत्वपूर्ण तकनीकों के स्वदेशी निर्माण पर लगातार जोर दिया जा रहा है। अंडरवॉटर रोबोटिक्स ऐसा ही एक क्षेत्र है, जहां इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर टेक्नोलॉजी और ऑटोमेशन का एक साथ इस्तेमाल होता है।
Coratia जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में भारत की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर सकती हैं। यदि कंपनी अपने रोबोट का बड़े स्तर पर निर्माण और सफल तैनाती कर पाती है, तो भविष्य में भारतीय रक्षा क्षेत्र को विदेशी तकनीकी समाधानों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कंपनी को कई चुनौतियों का सामना करना होगा। समुद्र के अंदर रोबोट की विश्वसनीयता बनाए रखना, अलग-अलग परिस्थितियों में परीक्षण करना, उत्पादन लागत नियंत्रित करना और रक्षा क्षेत्र के सख्त मानकों पर खरा उतरना आसान नहीं है। ₹18 करोड़ की नई फंडिंग और नौसेना के साथ चल रहा ₹66 करोड़ का प्रोजेक्ट कंपनी को इन चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध करा सकता है।
