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UPI की ‘फ्री राइड’ में बदलाव की तैयारी: चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लग सकता है शुल्क, आम यूजर्स के लिए पेमेंट रहेगा मुफ्त

भारत में UPI के जीरो-फीस मॉडल में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार भविष्य में कुछ चुनिंदा और अधिक मूल्य वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने की संभावना के लिए रास्ता खोल रही है। हालांकि आम UPI यूजर्स के लिए राहत की बात यह है कि व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं लगेगा और अधिकांश मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी मुफ्त बने रहने की उम्मीद है।

UPI की ‘फ्री राइड’ में बदलाव की तैयारी: चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लग सकता है शुल्क, आम यूजर्स के लिए पेमेंट रहेगा मुफ्त
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Inc42

UPI के जीरो-फीस मॉडल में बदलाव की आहट

भारत में डिजिटल पेमेंट की तस्वीर बदलने वाले Unified Payments Interface यानी UPI के शुल्क मॉडल को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

अब तक UPI की सबसे बड़ी खूबियों में से एक यह रही है कि आम उपभोक्ता आसानी से बिना अतिरिक्त ट्रांजैक्शन शुल्क के पैसे भेज और प्राप्त कर सकते हैं। इसी सुविधा ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक UPI की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

अब चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने की संभावना सामने आई है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि प्रत्येक UPI भुगतान पर ग्राहक को अतिरिक्त पैसे देने होंगे।

क्या UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को शुल्क देना होगा?

आम UPI यूजर्स के लिए फिलहाल स्थिति स्पष्ट है—व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P ट्रांसफर मुफ्त बने रहेंगे।

इसका मतलब है कि दोस्त, परिवार के सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति को सीधे UPI के जरिए पैसे भेजने पर ग्राहक से ट्रांजैक्शन शुल्क लेने की बात नहीं है।

सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि अधिकांश मर्चेंट ट्रांजैक्शन शुल्क-मुक्त बने रहेंगे।

इसलिए यह कहना कि अब सभी UPI पेमेंट पर फीस लगेगी, मौजूदा स्थिति की सही तस्वीर पेश नहीं करता।

क्या है MDR और किस पर पड़ सकता है असर?

Merchant Discount Rate एक प्रकार का भुगतान प्रोसेसिंग शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों से लिया जा सकता है।

UPI पर लंबे समय से जीरो-MDR व्यवस्था ने दुकानदारों और व्यवसायों को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।

नई व्यवस्था में यदि MDR लागू किया जाता है तो इसका दायरा सीमित रखने की संभावना है। चुनिंदा मर्चेंट और एक निश्चित सीमा से अधिक के लेनदेन इसके दायरे में आ सकते हैं।

हालांकि शुल्क की अंतिम दर और इससे जुड़े विस्तृत नियम तय होने से पहले किसी निश्चित प्रतिशत को लागू शुल्क मानना जल्दबाजी होगी।

सरकार UPI पर MDR क्यों लाना चाहती है?

UPI अब भारत के डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

इतने बड़े नेटवर्क को चलाने के लिए बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और तकनीकी कंपनियों को सर्वर, साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकथाम, नेटवर्क क्षमता और ग्राहक सहायता जैसी सेवाओं पर लगातार निवेश करना पड़ता है।

जीरो-MDR मॉडल ने UPI को तेजी से लोकप्रिय बनाने में मदद की, लेकिन इससे पेमेंट सिस्टम से जुड़े संस्थानों के लिए सीधे ट्रांजैक्शन से कमाई के विकल्प सीमित रहे।

सीमित मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मामूली MDR की व्यवस्था इस नेटवर्क को आर्थिक रूप से अधिक टिकाऊ बनाने का एक तरीका हो सकती है।

क्या ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ सकता है खर्च?

यह इस बदलाव का महत्वपूर्ण पहलू है।

भले ही MDR सीधे ग्राहक के बजाय व्यापारी से लिया जाए, लेकिन किसी भी अतिरिक्त कारोबारी खर्च का असर अंततः कीमतों पर पड़ने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।

कुछ बड़े व्यापारी शुल्क को स्वयं वहन कर सकते हैं, जबकि दूसरे व्यवसाय समय के साथ अपने परिचालन खर्च में इसे शामिल कर सकते हैं।

हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे सामान और सेवाएं निश्चित रूप से महंगी हो जाएंगी।

असली प्रभाव MDR की दर, लेनदेन सीमा और किन व्यापारियों को इसके दायरे में लाया जाता है, इस पर निर्भर करेगा।

UPI शुल्क का मुद्दा क्यों है महत्वपूर्ण?

UPI की सफलता के पीछे उसकी सरलता और कम लागत की बड़ी भूमिका रही है।

QR कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में भुगतान करने की सुविधा ने छोटे दुकानदारों, स्ट्रीट वेंडर्स और आम ग्राहकों तक डिजिटल पेमेंट को पहुंचाया।

ऐसे में शुल्क व्यवस्था में कोई भी बदलाव केवल बैंकों या फिनटेक कंपनियों तक सीमित मुद्दा नहीं है। इसका संबंध भारत की व्यापक डिजिटल भुगतान अर्थव्यवस्था से है।

सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि UPI नेटवर्क को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाते हुए छोटे व्यापारियों और आम ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

क्या खत्म हो रही है UPI की ‘फ्री राइड’?

पूरी तरह नहीं।

UPI के मुफ्त मॉडल में बदलाव की संभावना मुख्य रूप से चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन से जुड़ी है। आम उपभोक्ताओं के लिए UPI को शुल्क-मुक्त बनाए रखने की सरकारी स्थिति फिलहाल बरकरार है।

इसलिए इसे सभी UPI यूजर्स के लिए मुफ्त भुगतान व्यवस्था समाप्त होने के रूप में देखना सही नहीं होगा।

इसके बजाय इसे UPI इकोसिस्टम की लागत को अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच बांटने की संभावित नई व्यवस्था के रूप में देखा जा सकता है।

संतुलित विश्लेषण

UPI पर सीमित MDR व्यवस्था के पक्ष और विपक्ष दोनों हैं।

बैंकों और फिनटेक कंपनियों के लिए इससे डिजिटल भुगतान सेवाओं को चलाने के लिए अतिरिक्त आय मिल सकती है। इससे साइबर सुरक्षा, नेटवर्क क्षमता और भुगतान तकनीक में निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।

दूसरी तरफ व्यापारियों के लिए मामूली शुल्क भी बड़ी संख्या में होने वाले लेनदेन के कारण महत्वपूर्ण खर्च बन सकता है।

छोटे व्यापारियों को यदि इससे बाहर रखा जाता है तो डिजिटल पेमेंट अपनाने की रफ्तार पर असर सीमित रह सकता है।

आम ग्राहकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि P2P UPI ट्रांसफर को मुफ्त रखने की बात कही गई है और अधिकांश मर्चेंट भुगतान भी शुल्क-मुक्त रहने की उम्मीद है।

इसलिए अंतिम प्रभाव का आकलन तभी किया जा सकेगा जब MDR की दर, ट्रांजैक्शन सीमा और पात्र व्यापारियों से जुड़े विस्तृत नियम सामने आएंगे।

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