₹630 करोड़ के लक्ष्य से आगे निकला Fund II
भारत के हेल्थकेयर स्टार्टअप सेक्टर में नए निवेश के लिए बड़ी पूंजी तैयार हुई है। W Health Ventures ने अपने Fund II का अंतिम क्लोज ₹700 करोड़ पर पूरा करने की घोषणा की है। फंड का शुरुआती लक्ष्य ₹630 करोड़ था, यानी अंतिम प्रतिबद्धताएं तय लक्ष्य से लगभग ₹70 करोड़ अधिक रहीं।
यह फंड पारंपरिक वेंचर कैपिटल रणनीति से कुछ अलग तरीके से काम करेगा। W Health Ventures का जोर पहले से स्थापित स्टार्टअप खोजकर उनमें केवल निवेश करने के बजाय हेल्थकेयर की समस्याओं की पहचान करने और नई कंपनियां शुरू से बनाने पर है।
अगले चार वर्षों में इसी मॉडल के जरिए 8 से 10 कंपनियां तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
क्या है W Health Ventures का 'Company Creation' मॉडल?
W Health Ventures खुद को भारत का पहला हेल्थकेयर 'company creation fund' बताता है। फर्म के मुताबिक, उसकी लगभग 50 सदस्यों की इन-हाउस टीम में डॉक्टर, ऑपरेटर और टेक्नोलॉजिस्ट शामिल हैं।
यह टीम हेल्थकेयर डिलीवरी सिस्टम में ऐसी समस्याएं और कमियां खोजती है जहां बड़े स्तर पर समाधान की जरूरत हो। किसी विचार को कंपनी में बदलने से पहले आम तौर पर 12 से 18 महीने तक अवसर और बिजनेस मॉडल को जांचा-परखा जाता है। इसके बाद संस्थापक टीम को जोड़ा जाता है और कारोबार तैयार किया जाता है।
मैनेजिंग पार्टनर पंकज जेठवानी के अनुसार, कंपनी उन क्षेत्रों पर ध्यान देती है जहां हेल्थकेयर सिस्टम में मांग और उपलब्ध सप्लाई के बीच बड़ा अंतर मौजूद है।
उन्होंने कहा, “India is at an inflection point in healthcare as the rising demand and constrained supply create a structural mismatch.”
यानी फर्म का निवेश सिद्धांत उन हेल्थकेयर क्षेत्रों में कंपनियां खड़ी करने पर आधारित है जहां मरीजों की जरूरत मौजूद है, लेकिन मौजूदा समाधान पर्याप्त नहीं हैं।
हर कंपनी में ₹30-50 करोड़ तक निवेश की योजना
Fund II से बनने वाली प्रत्येक कंपनी में W Health Ventures लगभग ₹30 करोड़ से ₹50 करोड़ लगाने की योजना रखता है। फर्म अगले चार वर्षों में 8-10 कंपनियां बनाने और औसतन हर साल दो से तीन नए कारोबार विकसित करने की दिशा में काम करेगी।
फोकस केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा। रणनीति में India-US healthcare corridor भी शामिल है।
भारत में फर्म single-specialty healthcare platforms पर ध्यान दे रही है, जबकि अमेरिकी बाजार के लिए B2B हेल्थकेयर सर्विसेज भी उसकी रणनीति का हिस्सा हैं।
Oncology से Geriatrics तक इन क्षेत्रों पर नजर
Fund II के लिए जिन क्षेत्रों को संभावित अवसर के रूप में देखा जा रहा है, उनमें:
Oncology
Preventive health
Geriatrics
Chronic pain management
Diabetes
Single-specialty healthcare platforms
शामिल हैं।
इस रणनीति का एक अहम पहलू यह है कि W Health Ventures ऐसे बाजारों को भी तलाश रहा है जो फिलहाल आकार में सीमित हो सकते हैं, लेकिन जहां समस्या बड़ी है और बेहतर समाधान तैयार करने की गुंजाइश मौजूद है।
Fund II से दो कंपनियां पहले ही सामने आईं
नया फंड केवल भविष्य की योजना नहीं है। Fund II के तहत दो कंपनियां पहले ही तैयार की जा चुकी हैं।
इनमें Everhope Oncology शामिल है, जिसे Narayana Health के साथ मिलकर विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य कैंसर मरीजों के लिए अधिक समन्वित और patient-centric oncology care उपलब्ध कराना है।
दूसरी कंपनी Everbright Health है, जो अमेरिका में mental-health practices के साथ काम करते हुए treatment-resistant depression जैसे मामलों के लिए advanced psychiatric treatments को बढ़ाने पर केंद्रित है।
पहले फंड से 12 कंपनियों में निवेश
W Health Ventures ने अपने पहले फंड से 12 कंपनियों में करीब $60 million का निवेश किया था। इनमें भारत में Nivaan, BeatO, ElevateNow, BabyMD और Mylo जैसे नाम शामिल हैं।
इसके अलावा Wysa और Reveal HealthTech जैसी cross-border कंपनियां भी उसके पोर्टफोलियो का हिस्सा रही हैं। उपलब्ध रिपोर्टिंग के मुताबिक, इन पोर्टफोलियो कंपनियों ने बाद में बाहरी निवेशकों से growth capital भी जुटाया है।
₹700 करोड़ का फंड क्यों महत्वपूर्ण है?
Fund II का महत्व केवल इसके ₹700 करोड़ के आकार में नहीं है। W Health Ventures जिस मॉडल पर काम कर रहा है, उसमें निवेशक तैयार स्टार्टअप के सामने आने का इंतजार नहीं करता। इसके बजाय समस्या की पहचान, बाजार की जांच, बिजनेस मॉडल और शुरुआती कंपनी निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाई जाती है।
इससे जोखिम खत्म नहीं होता। हेल्थकेयर में रेगुलेशन, क्लिनिकल परिणाम, विशेषज्ञ प्रतिभा और लंबे execution cycles जैसी चुनौतियां बनी रहती हैं। लेकिन W Health Ventures का दांव यही है कि कंपनी शुरू होने से पहले लंबी validation प्रक्रिया इन जोखिमों में से कुछ को कम कर सकती है।
₹700 करोड़ का नया फंड अब इस रणनीति को बड़े पैमाने पर परखेगा। अगले चार वर्षों में बनने वाली 8-10 कंपनियों का प्रदर्शन यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि भारत में healthcare-focused company creation मॉडल कितनी प्रभावी तरीके से scale हो सकता है।
