इस कहानी में एक तरफ तेजी से बढ़ती कथित अवैध बेटिंग नेटवर्क की दुनिया है, तो दूसरी तरफ करोड़ों रुपये की संपत्तियां, विदेशी ठिकाने और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सौरभ चंद्राकर अभी इस मामले में आरोपी है और उसके खिलाफ लगे आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।
भिलाई की छोटी दुकान से शुरू हुआ सफर
सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है। उसकी शुरुआती जिंदगी सामान्य आर्थिक परिस्थितियों में गुजरी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उसने युवावस्था में कपड़ों की दुकान पर काम किया और बाद में परिवार से जुड़ी जूस की दुकान जूस फैक्ट्री में भी काम किया। इंडियन एक्सप्रेस की 2 नवंबर 2026 की रिपोर्ट में जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जूस की दुकान में काम करते समय उसकी मासिक आय करीब 15 हजार रुपये थी।
वहीं, हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में उसके शुरुआती रोजगार के तौर पर कपड़ों की दुकान का जिक्र है, जहां वह लगभग 12 से 14 हजार रुपये महीने कमाता था। इन दोनों रिपोर्टों से इतना स्पष्ट होता है कि उसकी शुरुआती कमाई सीमित थी। बाद में उसकी मुलाकात रवि उप्पल से हुई, जिसके साथ मिलकर उसने ऑनलाइन बेटिंग कारोबार खड़ा करने का आरोप झेला।
महादेव ऑनलाइन बुक का नेटवर्क कैसे फैला?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक एक ऐसा नेटवर्क था, जिसके जरिए क्रिकेट, फुटबॉल और दूसरे खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाने की सुविधा दी जाती थी। सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को इस नेटवर्क का प्रमुख प्रमोटर बताया गया है।
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, इस कारोबार का संचालन केवल एक ऐप तक सीमित नहीं था। देश और विदेश में फैले एजेंटों तथा बेटिंग पैनलों के माध्यम से नए ग्राहकों को जोड़ा जाता था। स्थानीय स्तर पर ऑपरेटर यूजर आईडी उपलब्ध कराते, पैसे जमा करवाते और सट्टे से जुड़े लेनदेन संभालते थे। मुख्य नेटवर्क का नियंत्रण विदेश से किया जाता था।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के मुताबिक, इस सिंडिकेट से जुड़ी रकम कथित तौर पर कई बैंक खातों के जरिए इधर-उधर भेजी जाती थी। जांच एजेंसी ने म्यूल बैंक खातों, कई स्तरों पर लेनदेन और हवाला के माध्यम से विदेशों में रकम भेजे जाने के आरोप भी लगाए हैं।
दुबई की 200 करोड़ रुपये की शादी ने खींचा ध्यान
सौरभ चंद्राकर की शादी फरवरी 2023 में संयुक्त अरब अमीरात के रास अल खैमाह स्थित वाल्डोर्फ एस्टोरिया होटल में हुई थी। यह शादी उस समय चर्चा में आ गई, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दावा किया कि आयोजन पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
जांच एजेंसी के अनुसार, मेहमानों को लाने के लिए चार्टर्ड विमानों की व्यवस्था की गई थी और शादी में मनोरंजन जगत की कुछ हस्तियों को भी बुलाया गया था। एजेंसी ने आयोजन से जुड़ी इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों, होटल बुकिंग और विमान सेवाओं के भुगतान की जांच की। रिपोर्टों के मुताबिक, इस आयोजन से जुड़े कुछ भुगतान हवाला के जरिए किए जाने का भी आरोप है।
यह शादी सिर्फ भव्य आयोजन की वजह से सुर्खियों में नहीं आई, बल्कि जांच एजेंसियों के लिए कथित अवैध कमाई और उसके इस्तेमाल की पड़ताल का महत्वपूर्ण हिस्सा भी बनी।
हजारों करोड़ की कथित कमाई और संपत्तियों पर कार्रवाई
महादेव बेटिंग मामले में रकम के आंकड़े समय के साथ काफी बढ़े हैं। शुरुआत में यह मामला करीब 6,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के रूप में चर्चा में था। लेकिन मनी लॉन्ड्रिंग की जांच आगे बढ़ने के बाद ED ने सितंबर 2026 में अदालत के सामने महादेव और उससे जुड़े बेटिंग प्लेटफॉर्मों से लगभग 94,400 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित आय का अनुमान पेश किया।
यह रकम जांच एजेंसी का आकलन है। इसे अदालत द्वारा साबित हुई ठगी, वास्तविक मुनाफे या सरकार की ओर से बरामद की गई रकम नहीं समझना चाहिए।
मार्च 2026 में ED ने सौरभ चंद्राकर और उससे जुड़े लोगों की दुबई तथा भारत में स्थित 20 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया था। इनकी अनुमानित कीमत करीब 1,700 करोड़ रुपये बताई गई। संपत्तियों में दुबई के महंगे इलाकों में स्थित विला और अपार्टमेंट भी शामिल हैं।
ओमान से भारत लाया गया सौरभ चंद्राकर
इस मामले में सबसे बड़ा घटनाक्रम 1 नवंबर 2026 को सामने आया, जब भारतीय एजेंसियों ने सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत प्रत्यर्पित कराया। CBI की विशेष टीम उसे भारत लेकर आई। अधिकारियों के मुताबिक, उसके खिलाफ दो CBI मामलों में पहले ही आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इसके अलावा ED भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है।
CBI के अनुसार, सौरभ को भारत लाने की प्रक्रिया इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस और ओमान के अधिकारियों के सहयोग से पूरी हुई। भारत आने के बाद उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाना था और ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी कर उसे रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाना था। 2 नवंबर की रिपोर्टों में अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया का उल्लेख है।
आगे क्या होगा?
सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी से जांच एजेंसियों को कथित बेटिंग नेटवर्क के संचालन, विदेशों में भेजी गई रकम और उससे जुड़ी संपत्तियों के बारे में पूछताछ का अवसर मिलेगा। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि इस नेटवर्क को चलाने में किन लोगों ने मदद की और कथित कमाई का लाभ किन-किन लोगों तक पहुंचा।
CBI और ED की जांच में कई अन्य आरोपी, एजेंट और वित्तीय लेनदेन भी शामिल हैं। ऐसे में सौरभ की पूछताछ से मामले के दूसरे पहलुओं पर जानकारी मिलने की संभावना है। हालांकि, जांच के नतीजे और अदालत में पेश होने वाले सबूत ही आगे की कानूनी दिशा तय करेंगे।
सौरभ चंद्राकर की कहानी केवल एक व्यक्ति के कथित आर्थिक उत्थान की कहानी नहीं है। यह ऑनलाइन सट्टेबाजी के तेजी से फैलते नेटवर्क, डिजिटल भुगतान के दुरुपयोग और सीमा पार वित्तीय लेनदेन की जांच से जुड़े गंभीर सवाल भी सामने लाती है। 15 हजार रुपये की नौकरी से 200 करोड़ रुपये की शादी तक का सफर लोगों को चौंका सकता है, लेकिन इस मामले का असली जवाब अदालत में होने वाली सुनवाई और जांच के निष्कर्षों से ही सामने आएगा।
