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बेंगलुरु में लीक हो रहे सीवेज ड्रेन को खुद ठीक करेंगे फाउंडर्स, बोले—‘उद्घाटन के लिए Bittu Tabahi को बुलाएंगे’

बेंगलुरु में सीवेज और नागरिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं पर एक बार फिर बहस तेज हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय फाउंडर्स ने लंबे समय से लीक हो रहे सीवेज ड्रेन को अपने स्तर पर ठीक कराने की योजना बनाई है और सफाई अभियान से चर्चा में आए Bittu Tabahi को इसके उद्घाटन के लिए बुलाने की बात कही है। यह घटनाक्रम शहर में नागरिक भागीदारी और नगर निकाय की जिम्मेदारी पर नए सवाल खड़े करता है।

बेंगलुरु में लीक हो रहे सीवेज ड्रेन को खुद ठीक करेंगे फाउंडर्स, बोले—‘उद्घाटन के लिए Bittu Tabahi को बुलाएंगे’
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Hindustan Times

सीवेज की समस्या पर फाउंडर्स ने उठाया कदम

बेंगलुरु में नागरिक सुविधाओं को लेकर जारी बहस के बीच कुछ स्थानीय फाउंडर्स ने एक असामान्य कदम उठाने की योजना बनाई है। लंबे समय से परेशानी का कारण बने एक लीकिंग सीवेज ड्रेन को ठीक कराने के लिए उन्होंने सरकारी कार्रवाई का इंतजार करने के बजाय अपने स्तर पर काम करवाने की बात कही है।

इसी योजना के दौरान “Call Bittu Tabahi to inaugurate” वाली टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है।

यह टिप्पणी उस युवा पर्यावरण कार्यकर्ता की बढ़ती पहचान को भी दिखाती है, जो हाल के हफ्तों में गंदे जलस्रोतों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई के अपने अभियानों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया है।

महत्वपूर्ण: उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टिंग से Bittu Tabahi की बेंगलुरु में हालिया सफाई गतिविधियां सत्यापित होती हैं, लेकिन इस विशिष्ट ड्रेन प्रोजेक्ट के फाउंडर्स, सटीक स्थान, लागत और काम शुरू होने की तारीख की स्वतंत्र पुष्टि मुझे नहीं मिली। इसलिए इन विवरणों को बिना अतिरिक्त स्रोत के तथ्य के रूप में जोड़ना उचित नहीं होगा।

कौन हैं Bittu Tabahi?

Bittu Tabahi का असली नाम Surendra Singh Choudhary है। 21 वर्षीय BSc छात्र मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा से हैं। उन्होंने 26 जनवरी 2026 को प्रदूषित अजनार नदी की सफाई शुरू की और अपने पैसे से लगभग ₹30,000 खर्च किए।

उन्होंने प्लास्टिक, कचरा, खरपतवार और गाद को हटाने का काम शुरू किया। शुरुआती दौर में कुछ लोग उनके साथ थे, लेकिन अभियान का बड़ा हिस्सा उन्होंने स्वयं जारी रखा। बाद में उनकी कोशिशों ने सोशल मीडिया पर व्यापक ध्यान खींचा और स्थानीय प्रशासन ने भी मशीनरी उपलब्ध कराई।

उनके काम ने नीदरलैंड स्थित पर्यावरण संगठन The Ocean Cleanup के संस्थापक Boyan Slat का भी ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने उन्हें अपने संगठन के साथ काम करने का प्रस्ताव दिया।

बेंगलुरु में पहले ही सफाई अभियान चला चुके हैं Bittu

फाउंडर्स द्वारा Bittu का नाम लिए जाने का बेंगलुरु से एक हालिया संबंध भी है।

12 सितंबर को Bittu ने बेंगलुरु के Turahalli Forest, Banashankari 6th Stage के पास, स्थानीय निवासियों और नागरिक समूहों के साथ सफाई अभियान में हिस्सा लिया। पर्यावरणविद और सेवानिवृत्त IFS अधिकारी A N Yellappa Reddy भी अभियान से जुड़े थे।

करीब चार घंटे चले अभियान में दो टन से अधिक कचरा हटाया गया। सफाई के दौरान प्लास्टिक के अलावा poultry waste, घरेलू sanitary waste, medical waste और बैग में भरे कुत्तों के शव मिलने की भी रिपोर्ट सामने आई थी।

इस तरह Bittu को प्रस्तावित ड्रेन कार्य के उद्घाटन के लिए बुलाने की बात केवल सोशल-मीडिया संदर्भ नहीं है; वे हाल में बेंगलुरु में एक वास्तविक community cleanup drive में हिस्सा ले चुके हैं।

असली मुद्दा सिर्फ ड्रेन साफ करना नहीं

यह घटनाक्रम एक बड़े शहरी सवाल की ओर भी ध्यान खींचता है—किसी नाले की सफाई और सीवेज की समस्या का स्थायी समाधान दो अलग चीजें हैं।

Bittu के मध्य प्रदेश वाले अभियान में भी यही अंतर सामने आया था। ब्यावरा नगर निकाय के सब-इंजीनियर Rupesh Kumar Netam ने ANI को बताया था कि पांच बड़े नाले नदी में wastewater छोड़ते हैं और इसे रोकने के लिए लगभग ₹14.77 करोड़ के Sewage Treatment Plant (STP) का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

यानी नागरिक या स्वयंसेवक जमा कचरा हटाकर तत्काल स्थिति सुधार सकते हैं, लेकिन लगातार बह रहे untreated sewage, damaged drainage infrastructure या sewer-network की तकनीकी समस्या के लिए नगरपालिका स्तर की इंजीनियरिंग और रखरखाव जरूरी होता है।

नागरिक पहल बनाम नगर निकाय की जिम्मेदारी

बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में नागरिकों या उद्यमियों द्वारा किसी स्थानीय समस्या को स्वयं हल करने की पहल community participation का उदाहरण हो सकती है। लेकिन ऐसी पहल सरकारी एजेंसियों की वैधानिक और दीर्घकालिक जिम्मेदारियों का विकल्प नहीं बनती।

Turahalli अभियान में भी नागरिक प्रयास के साथ प्रशासन की भूमिका दिखाई दी थी। उस अभियान को Greater Bengaluru Authority (GBA) की सहायता मिली थी।

इसलिए लीकिंग सीवेज ड्रेन के मामले में महत्वपूर्ण सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि फाउंडर्स उसे ठीक करा पाते हैं या नहीं। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि समस्या की तकनीकी वजह क्या है, मरम्मत के बाद उसका रखरखाव कौन करेगा और संबंधित civic authority आगे क्या कदम उठाती है।

सोशल मीडिया से आगे, जवाबदेही का सवाल

“Bittu Tabahi को उद्घाटन के लिए बुलाओ” जैसी टिप्पणी इस कहानी को वायरल तत्व जरूर देती है, लेकिन इसके पीछे का मुद्दा ज्यादा गंभीर है।

Bittu की लोकप्रियता ऐसे समय बढ़ी है जब व्यक्तिगत और सामुदायिक सफाई अभियानों के वीडियो लगातार civic infrastructure और waste management की कमियों को सार्वजनिक चर्चा में ला रहे हैं।

बेंगलुरु का यह मामला भी नागरिक पहल और सरकारी जवाबदेही के बीच उसी बहस को आगे बढ़ाता है। यदि निजी नागरिकों को सार्वजनिक सीवेज समस्या ठीक कराने के लिए संसाधन लगाने पड़ते हैं, तो इससे यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि स्थायी समाधान और भविष्य के रखरखाव की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी।

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