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भारत की स्थिर नौकरी छोड़ कनाडा में बर्गर बनाने पहुंचे NRI, 12 घंटे की नाइट शिफ्ट से ऐसे बदली जिंदगी

भारत में स्थिर नौकरी और परिवार छोड़कर कनाडा पहुंचे कमल नंदा ने अपने शुरुआती संघर्ष का अनुभव साझा किया है। उनके मुताबिक, 2023 में उन्हें फास्ट-फूड सेक्टर में रात की लंबी शिफ्ट करनी पड़ी। बाद में लगातार नौकरी की तलाश, फ्रीलांस अवसर और करियर में बदलाव के जरिए उनकी पेशेवर स्थिति बदली। उनकी कहानी विदेश जाने के बाद करियर दोबारा शुरू करने से जुड़ी चुनौतियों की एक व्यक्तिगत झलक पेश करती है।

भारत की स्थिर नौकरी छोड़ कनाडा में बर्गर बनाने पहुंचे NRI, 12 घंटे की नाइट शिफ्ट से ऐसे बदली जिंदगी
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Hindustan Times

स्थिर नौकरी छोड़कर कनाडा जाने का फैसला

विदेश में नई जिंदगी शुरू करने का सपना कई लोगों के लिए बेहतर करियर और नए अवसरों से जुड़ा होता है, लेकिन नई जगह पहुंचने के बाद वास्तविकता अलग भी हो सकती है। कनाडा में रहने वाले भारतीय मूल के कमल नंदा ने सोशल मीडिया पर अपने ऐसे ही अनुभव को साझा किया है।

नंदा के अनुसार, उन्होंने 2023 में भारत में अपनी स्थिर नौकरी और परिवार को छोड़कर कनाडा जाने का फैसला किया। वहां शुरुआती दौर में उन्हें फास्ट-फूड सेक्टर में काम करना पड़ा। उन्होंने बताया कि वह करीब 12 घंटे की नाइट शिफ्ट में 16 कनाडाई डॉलर प्रति घंटे की दर से काम करते थे।

ग्राहक की एक घटना बनी बदलाव की वजह

नंदा ने अपने अनुभव में एक ऐसी घटना का भी जिक्र किया जिसने उन्हें अपने करियर को लेकर अधिक सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया।

उनके मुताबिक, एक बार स्टाफ की कमी के कारण ग्राहक को करीब पांच मिनट इंतजार करना पड़ा। नंदा का दावा है कि नशे में एक ग्राहक ने उनसे बहस की और उन पर ड्रिंक फेंक दी। इसके बाद उन्होंने अपनी पेशेवर स्थिति बदलने के लिए ज्यादा तेजी से नौकरियों के लिए आवेदन करना शुरू किया।

यह घटना नंदा द्वारा साझा किया गया व्यक्तिगत विवरण है; उपलब्ध रिपोर्ट इसे उनके सोशल-मीडिया बयान के आधार पर प्रस्तुत करती है।

शिफ्ट से पहले आवेदन, ब्रेक में इंटरव्यू

नंदा के अनुसार, उन्होंने फास्ट-फूड की नौकरी जारी रखते हुए दूसरे अवसर तलाशने शुरू किए। वह शिफ्ट से पहले नौकरी के लिए आवेदन करते थे और एक बार उन्होंने लंच ब्रेक के दौरान इंटरव्यू भी दिया।

यही प्रयास आगे चलकर एक फ्रीलांस प्रोजेक्ट में बदला। हालांकि उस अवसर में स्थायी पेरोल या नौकरी की गारंटी नहीं थी, फिर भी उन्होंने इसे स्वीकार किया और साथ में अपनी फास्ट-फूड नौकरी पार्ट-टाइम जारी रखी।

करीब सात महीने तक दो नौकरियों के बीच संघर्ष

नंदा ने बताया कि लगभग सात महीनों तक उनका दैनिक कार्यक्रम काफी व्यस्त रहा। दिन में वह सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक नई नौकरी करते, इसके बाद लगभग एक घंटे की यात्रा करके शाम 6 बजे फास्ट-फूड वाली नौकरी पर पहुंचते थे।

यह दूसरी शिफ्ट रात 11 बजे और कभी-कभी आधी रात तक चलती थी। घर लौटने, खाना खाने और सोने के बाद अगले दिन यही क्रम दोबारा शुरू होता था।

बाद में उनका फ्रीलांस अवसर फुल-टाइम भूमिका में बदल गया और उन्होंने फास्ट-फूड की नौकरी छोड़ दी।

आगे भी आसान नहीं रहा करियर

फास्ट-फूड की नौकरी छोड़ना उनकी मुश्किलों का अंतिम पड़ाव नहीं था।

नंदा के अनुसार, उन्होंने बाद में एक नया अवसर स्वीकार किया, लेकिन करीब दो महीने बाद उन्हें उस नौकरी से हटा दिया गया। इसके बाद लगभग 30 दिनों के भीतर उन्हें 10 इंटरव्यू के अवसर मिले और तीन जॉब ऑफर प्राप्त हुए।

उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर लगातार कौशल बढ़ाने, सही भूमिकाओं के लिए आवेदन करने, नेटवर्किंग और धैर्य बनाए रखने को महत्वपूर्ण बताया।

2023 से 2026: परिस्थितियों में आया बड़ा बदलाव

नंदा ने अपनी कहानी को 2023 और 2026 की परिस्थितियों की तुलना के रूप में भी पेश किया।

उनके अनुसार, 2023 में वह परिवार और स्थिर नौकरी छोड़कर कनाडा आए थे और लंबी रात की शिफ्ट कर रहे थे। 2026 तक उनका कहना है कि वह घर से काम कर रहे हैं, उन्हें बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस मिला है और काम के सिलसिले में कनाडा के भीतर यात्रा भी करते हैं।

इस कहानी से क्या समझ आता है?

नंदा की कहानी का महत्वपूर्ण पहलू केवल फास्ट-फूड की नौकरी से दूसरी भूमिका तक पहुंचना नहीं है। यह यह भी दिखाती है कि दूसरे देश में जाने के बाद किसी व्यक्ति को अपने पिछले पेशेवर अनुभव के बावजूद शुरुआती स्तर से करियर दोबारा बनाना पड़ सकता है।

हालांकि, इस एक अनुभव से कनाडा जाने वाले सभी भारतीयों की स्थिति के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। नौकरी मिलने की संभावना व्यक्ति के कौशल, इमिग्रेशन स्टेटस, उद्योग, स्थान, अनुभव और उस समय की श्रम-बाजार परिस्थितियों सहित कई कारकों पर निर्भर कर सकती है।

इसलिए नंदा की कहानी को कनाडा में हर प्रवासी की स्थिति का प्रतिनिधित्व करने के बजाय एक व्यक्तिगत करियर अनुभव के रूप में देखना अधिक उचित है।

शिक्षा और पेशेवर पृष्ठभूमि

Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, नंदा ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से B.Tech किया और बाद में कनाडा के Conestoga College में पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। रिपोर्ट में उनके शुरुआती करियर को हरियाणा में वेब डेवलपर के रूप में बताया गया है और कहा गया है कि बाद में उन्होंने कनाडा में अलग-अलग पेशेवर भूमिकाओं में काम किया।

निष्कर्ष

कमल नंदा का अनुभव विदेश में करियर बनाने की उस तस्वीर को सामने रखता है जिसमें अवसर के साथ अनिश्चितता और शुरुआती संघर्ष भी शामिल हो सकते हैं।

उनके मामले में फास्ट-फूड की लंबी शिफ्ट से शुरुआत हुई, फिर फ्रीलांस काम मिला, उसके बाद फुल-टाइम अवसर आया और आगे नौकरी छूटने जैसी चुनौती भी सामने आई। उनके अनुसार लगातार आवेदन, नेटवर्किंग और अपस्किलिंग ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की।

यह कहानी किसी देश में प्रवास को सफलता या असफलता की गारंटी के रूप में पेश नहीं करती, बल्कि यह बताती है कि एक व्यक्ति की विदेश में पेशेवर यात्रा कितनी गैर-रेखीय हो सकती है।


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