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भारत में Old Monk के कुछ वेरिएंट और Royal Challenge Whisky की बिक्री पर रोक, जानिए क्यों हुई कार्रवाई

भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक ने कुछ लोकप्रिय शराब उत्पादों की बिक्री पर कार्रवाई की है। इनमें Old Monk Rum के तीन वेरिएंट और कुछ विशेष उत्पादन इकाइयों में तैयार Royal Challenge Whisky शामिल हैं। जांच में कृत्रिम या “नेचर-आइडेंटिकल” फ्लेवरिंग पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने के बाद यह कदम उठाया गया। यह कार्रवाई देश में अल्कोहलिक बेवरेज के निर्माण और गुणवत्ता मानकों पर बढ़ती नियामकीय सख्ती को दर्शाती है।

भारत में Old Monk के कुछ वेरिएंट और Royal Challenge Whisky की बिक्री पर रोक, जानिए क्यों हुई कार्रवाई
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: HT News Desk

Old Monk और Royal Challenge समेत कई उत्पादों पर कार्रवाई

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कई चर्चित शराब उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई की है। प्रयोगशाला जांच में कुछ उत्पादों में बाहरी कृत्रिम या नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर पाए जाने के बाद नियामक ने उन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं माना।

प्रभावित उत्पादों में महाराष्ट्र में Mohan Rocky Springwater द्वारा बनाए गए Old Monk के तीन वेरिएंट शामिल हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश में United Spirits की इकाई में निर्मित Royal Challenge Whisky भी कार्रवाई के दायरे में आई है।

अन्य प्रभावित उत्पादों में Antiquity Blue Whisky, McDowell’s No. 1 Rum, Bagpiper Deluxe Whisky और Old Cask Deluxe XXX Rum जैसे नाम शामिल बताए गए हैं।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि Old Monk या Royal Challenge ब्रांड के हर उत्पाद की पूरे भारत में बिक्री प्रतिबंधित हो गई है। कार्रवाई मुख्य रूप से कुछ उत्पादों और उनसे जुड़ी उत्पादन इकाइयों से संबंधित बताई गई है।

FSSAI ने कार्रवाई क्यों की?

इस पूरे मामले के केंद्र में शराब में कृत्रिम या “नेचर-आइडेंटिकल” फ्लेवरिंग पदार्थों का इस्तेमाल है।

नियामक के अनुसार, जांच किए गए कुछ उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे क्योंकि उनमें बाहरी कृत्रिम या नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर पाए गए।

FSSAI का रुख है कि रम में अलग से रम जैसा फ्लेवर या व्हिस्की में व्हिस्की जैसा फ्लेवर मिलाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य सामान्य निर्माण प्रक्रिया नहीं माना जाता।

इस तरह के फ्लेवर उन विशेषताओं की नकल कर सकते हैं जो आम तौर पर पारंपरिक उत्पादन, कच्चे माल और मैच्योरिंग जैसी प्रक्रियाओं से विकसित होती हैं।

इसी कारण यह मामला केवल लेबलिंग तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि भारत में स्पिरिट्स का निर्माण, वर्गीकरण और मार्केटिंग किस तरह की जानी चाहिए।

Old Monk के कौन से उत्पाद प्रभावित?

नियामकीय कार्रवाई महाराष्ट्र में Mohan Rocky Springwater द्वारा निर्मित Old Monk के तीन वेरिएंट से जुड़ी है।

इसलिए इसे पूरे Old Monk ब्रांड पर देशव्यापी प्रतिबंध समझना सही नहीं होगा।

शराब कंपनियां अलग-अलग उत्पादन इकाइयों के जरिए एक ही ब्रांड के उत्पाद बना सकती हैं। ऐसे में किसी विशेष प्लांट या बैच से जुड़ी कार्रवाई का प्रभाव जरूरी नहीं कि देश में उपलब्ध उसी ब्रांड के प्रत्येक उत्पाद पर पड़े।

Royal Challenge Whisky भी जांच के दायरे में

Royal Challenge भारत के स्थापित व्हिस्की ब्रांडों में शामिल है और नियामकीय कार्रवाई में इसका नाम भी सामने आया है।

अधिकारियों द्वारा जांच किए गए उत्पाद में ग्रेन न्यूट्रल स्पिरिट और स्कॉच के साथ नेचर-आइडेंटिकल व्हिस्की फ्लेवरिंग पदार्थों का उल्लेख होने की बात सामने आई है।

भारत में Royal Challenge की मजबूत बाजार मौजूदगी को देखते हुए यह मामला व्यावसायिक और उपभोक्ता दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

United Spirits ने उठाए सवाल

United Spirits ने इस मामले को FSSAI के सामने उठाने की बात कही है और इसे व्यापक उद्योग से जुड़ा मुद्दा बताया है।

कंपनी का कहना है कि संबंधित उत्पादों के लेबल लागू कानूनों और नियमों के अनुरूप हैं। कंपनी अपने एक रम उत्पाद से संबंधित नियामकीय कार्रवाई को अदालत में भी चुनौती दे चुकी है।

इसका मतलब है कि नियमों की व्याख्या को लेकर मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

आने वाले समय में कानूनी और नियामकीय प्रक्रिया यह स्पष्ट कर सकती है कि भारतीय स्पिरिट्स उद्योग में फ्लेवरिंग पदार्थों के इस्तेमाल की सीमा क्या होनी चाहिए।

यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?

इस कार्रवाई का असर केवल Old Monk या Royal Challenge तक सीमित नहीं रह सकता।

यदि FSSAI इसी व्याख्या को पूरे शराब उद्योग में समान रूप से लागू करता है, तो कंपनियों को अपने उत्पादों की रेसिपी, निर्माण प्रक्रिया, फ्लेवरिंग सामग्री और लेबलिंग की दोबारा समीक्षा करनी पड़ सकती है।

उपभोक्ताओं के लिए इससे यह समझना आसान हो सकता है कि किसी शराब का स्वाद पारंपरिक उत्पादन और मैच्योरिंग प्रक्रिया से आया है या उसमें अतिरिक्त फ्लेवरिंग पदार्थों का इस्तेमाल किया गया है।

दूसरी तरफ, कंपनियों के लिए नियमों की व्याख्या को लेकर अनिश्चितता पैदा हो सकती है, खासकर तब जब उनका दावा हो कि मौजूदा भारतीय नियम उनकी निर्माण प्रक्रिया की अनुमति देते हैं।

पूरे भारत में Old Monk और Royal Challenge पर प्रतिबंध नहीं

इस मामले को Old Monk या Royal Challenge के पूरे ब्रांड पर देशव्यापी प्रतिबंध बताना भ्रामक हो सकता है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई कुछ विशेष उत्पादों और उत्पादन इकाइयों से संबंधित है। अन्य प्लांट में बने समान ब्रांड के उत्पाद भी उसी आदेश के तहत आते हैं या नहीं, इस बारे में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

इसी कारण अलग-अलग राज्यों या बाजारों में इन उत्पादों की उपलब्धता अलग हो सकती है।

संतुलित विश्लेषण

FSSAI की कार्रवाई भारत के खाद्य और पेय उद्योग में बढ़ती नियामकीय निगरानी को दिखाती है। नियामक के दृष्टिकोण से तय मानकों का पालन सुनिश्चित करना उपभोक्ता सुरक्षा और उत्पादों की पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है।

दूसरी ओर, शराब उद्योग में इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि मौजूदा नियमों में फ्लेवरिंग पदार्थों से जुड़े प्रावधानों की व्याख्या किस तरह की जानी चाहिए।

United Spirits की ओर से कार्रवाई को चुनौती दिए जाने से यह संकेत मिलता है कि कंपनियां इस मामले में अधिक स्पष्ट कानूनी और नियामकीय दिशानिर्देश चाह सकती हैं।

अंतिम नतीजा केवल मौजूदा ब्रांडों के लिए नहीं, बल्कि भारत के व्यापक शराब उद्योग में निर्माण और फ्लेवरिंग के नियमों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि कार्रवाई कुछ विशेष उत्पादों पर है, न कि संबंधित ब्रांडों के प्रत्येक उत्पाद पर देशव्यापी प्रतिबंध।


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