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दिल्ली की रामलीला में श्रीराम बनकर छाए रवि किशन, धनुष-बाण लिए सामने आया ऐसा रूप कि वायरल हो गईं तस्वीरें

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026: भोजपुरी फिल्मों से लेकर बॉलीवुड और राजनीति तक अपनी पहचान बना चुके अभिनेता एवं गोरखपुर से भाजपा सांसद रवि किशन इस बार एक अलग वजह से सुर्खियों में हैं। दशहरे के अवसर पर दिल्ली में आयोजित 'अयोध्या की रामलीला' में उन्होंने पहली बार भगवान श्रीराम की भूमिका निभाई। उनका यह नया रूप सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।

दिल्ली की रामलीला में श्रीराम बनकर छाए रवि किशन, धनुष-बाण लिए सामने आया ऐसा रूप कि वायरल हो गईं तस्वीरें
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: times of india, hindustan times, mid day

पारंपरिक वेशभूषा, सिर पर मुकुट और हाथों में धनुष-बाण लिए रवि किशन की तस्वीरें सामने आते ही लोगों का ध्यान उनकी ओर गया। अभिनय और राजनीति की दुनिया में लंबे समय से सक्रिय रवि किशन के लिए यह अवसर खास था, क्योंकि रामलीला से पुराना जुड़ाव होने के बावजूद उन्होंने पहले कभी भगवान राम का किरदार नहीं निभाया था।

भगवान राम के रूप में रवि किशन की तस्वीरें वायरल

दिल्ली में दशहरा उत्सव के दौरान आयोजित रामलीला में रवि किशन का नया अंदाज देखने को मिला। भगवान राम की वेशभूषा में वह मंच पर नजर आए। कार्यक्रम के वीडियो में उन्हें एक सजे हुए रथ पर सवार होकर आते भी देखा गया।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर भी इस आयोजन से जुड़ी तस्वीरें साझा कीं। 19 अक्टूबर को किए गए पोस्ट में उन्होंने भगवान श्रीराम की कृपा का उल्लेख करते हुए दिल्ली की रामलीला में मंचन करने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

इसके बाद अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनकी तस्वीरों और वीडियो की चर्चा शुरू हो गई। विशेष रूप से उनका पारंपरिक पहनावा और भगवान राम का किरदार निभाना लोगों के आकर्षण का केंद्र बना।

रामलीला से रहा है पुराना रिश्ता, लेकिन पहली बार बने श्रीराम

रवि किशन के लिए रामलीला का मंच कोई नई जगह नहीं है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि अभिनय की उनकी शुरुआती यात्रा रामलीला से ही जुड़ी रही है। उन्होंने पहले भगवान परशुराम और केवट जैसे किरदार निभाए थे। इसके अलावा बचपन में माता सीता की भूमिका भी निभा चुके हैं।

हालांकि, भगवान श्रीराम का किरदार निभाने का अवसर उन्हें पहली बार मिला। अभिनेता ने इस भूमिका को अपने लिए सौभाग्य की बात बताया और उम्मीद जताई कि वह पूरी श्रद्धा और ईमानदारी के साथ इसे निभा पाएंगे। उनके मुताबिक, रामलीला केवल एक नाटकीय प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

बचपन में सीता का किरदार निभाने की कहानी भी चर्चा में

रवि किशन का भगवान राम के रूप में सामने आना उनके पुराने अभिनय सफर की याद भी दिलाता है।म साल 2022 में टेलीविजन कार्यक्रम 'स्वर्ण स्वर भारत' के दौरान उन्होंने अपने शुरुआती संघर्षों का जिक्र किया था। उस समय उन्होंने बताया था कि अभिनय के प्रति उनका आकर्षण बचपन से था और इसी रुचि के कारण उन्होंने रामलीला में माता सीता का पात्र भी निभाया था।

साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर मनोरंजन जगत में पहचान बनाने वाले रवि किशन ने हिंदी और भोजपुरी सिनेमा में लंबा सफर तय किया है। उनकी यही पृष्ठभूमि दिल्ली में भगवान राम की भूमिका निभाने को उनके व्यक्तिगत जीवन के लिए भी एक खास अनुभव बनाती है।

युवाओं को दिया आध्यात्मिकता से जुड़ने का संदेश

रामलीला में अपनी भागीदारी के दौरान रवि किशन ने युवाओं को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से परिचित होने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को भगवान राम, श्रीकृष्ण और भगवान शिव के जीवन तथा उनकी शिक्षाओं के बारे में पढ़ना चाहिए।

अभिनेता ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि वह सामान्य परिस्थितियों से आगे बढ़े हैं। उनके अनुसार, आध्यात्मिकता और ध्यान व्यक्ति को मुश्किल समय में मानसिक मजबूती और सकारात्मक दृष्टिकोण दे सकते हैं।

उन्होंने प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा ध्यान करने का सुझाव भी दिया। हालांकि, मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में यह समझना महत्वपूर्ण है कि ध्यान सहायक अभ्यास हो सकता है, लेकिन गंभीर अवसाद या अन्य मानसिक समस्याओं में पेशेवर चिकित्सा सहायता का विकल्प नहीं है।

दशहरे पर दिया बुराइयों को दूर करने का संदेश

भगवान राम की भूमिका निभाने के साथ रवि किशन ने विजयादशमी के संदेश पर भी बात की। उन्होंने लोगों से अपने भीतर मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों को पहचानने और उन्हें दूर करने का आग्रह किया। उनके संदेश का केंद्र यह था कि दशहरा केवल रावण के पुतले के दहन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि व्यक्तिगत और सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने की प्रेरणा भी देना चाहिए। उन्होंने समाज में मानवता और आपसी प्रेम बढ़ने की कामना की।

दशहरा परंपरागत रूप से बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। रामलीला के मंच पर भगवान राम और रावण के बीच संघर्ष के प्रसंग इसी विचार को प्रस्तुत करते हैं।

सोशल मीडिया पर क्यों हो रही है इतनी चर्चा?

रवि किशन फिलहाल अपने बेबाक अंदाज मे रामलीला मे किए गए प्रदर्शन के वीडियोज़ और लोगों के अलग अलग प्रतिक्रियाओ के कारण चर्चा मे है। उसके द्वारा किए गए कई संवाद और अभिनय सोशल मीडिया पर काफी वाइरल हो रहे है। भगवान राम का गंभीर और पारंपरिक किरदार निभाते हुए उनका सामने आना उनके प्रशंसकों के लिए एक अलग अनुभव रहा।

हालांकि, उनके नए रूप को लेकर अलग अलग प्रतिकीरियाए देखने को मिल रही है। प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में अलग अलग प्रतिक्रियाओं का उल्लेख किया गया है। इसलिए बिना किसी विश्वसनीय आंकड़े के यह दावा करना सही नहीं होगा कि सभी देखने वालो ने उनके प्रदर्शन की तारीफ की है।

अभिनय, आस्था और परंपरा का अनोखा संगम

रवि किशन का रामलीला में भाग लेना इस बात का उदाहरण है कि पारंपरिक रंगमंच आज भी सिनेमा और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कलाकारों को आकर्षित करता है। रामलीला का महत्व केवल धार्मिक आयोजन होने तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से अभिनय, संगीत, संवाद और लोकसंस्कृति की परंपराएं भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती हैं। रवि किशन के लिए इस बार का दशहरा इसलिए यादगार रहा, क्योंकि वर्षों के ऐक्टिंग करिअर के बाद उन्हें पहली बार भगवान राम का किरदार निभाने का मौका मिला। उनकी वायरल तस्वीरों ने एक बार फिर रामलीला और पारंपरिक रंगमंच की ओर लोगों का ध्यान खींचा है। अब चर्चा केवल उनके नए रूप की नहीं, बल्कि उनके उस सफर की भी है जिसकी शुरुआत कभी रामलीला के मंच से हुई थी।

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