RBI ने क्यों लिया समय से पहले योजना बंद करने का फैसला?
विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए RBI ने जून 2026 में विशेष USD-INR फॉरेक्स स्वैप सुविधा शुरू की थी। इसके तहत बैंकों को नए FCNR(B) जमा पर अनुकूल स्वैप व्यवस्था उपलब्ध कराई गई, जिससे विदेशी मुद्रा जोखिम को संभालने की लागत कम करने में मदद मिली और बैंकों के लिए विदेशों में बसे भारतीयों से डॉलर जमा आकर्षित करना आसान हुआ।
योजना को बाजार से उम्मीद से मजबूत प्रतिक्रिया मिली। 13 अगस्त तक अकेले FCNR(B) जमा के जरिए लगभग 52.3 अरब डॉलर जुटाए गए। इसी अवधि में External Commercial Borrowings (ECB) और Overseas Foreign Currency Borrowings (OFCB) को मिलाकर विशेष सुविधा के तहत कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह करीब 56.85 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
मजबूत प्रतिक्रिया को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने FCNR(B) जमा जुटाने की समयसीमा को 30 सितंबर से घटाकर 31 अगस्त करने का निर्णय लिया है।
क्या है FCNR(B) जमा?
FCNR(B) एक बैंक जमा व्यवस्था है, जिसके तहत पात्र प्रवासी भारतीय भारतीय बैंकों में अपनी रकम विदेशी मुद्रा में रख सकते हैं। चूंकि जमा विदेशी मुद्रा में होती है, इसलिए मूलधन और ब्याज को रुपये में बदलने से पैदा होने वाले मुद्रा जोखिम से जमाकर्ता काफी हद तक बचा रहता है।
2026 की विशेष व्यवस्था में पात्र नए FCNR(B) जमा के लिए RBI ने बैंकों को रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा दी। इससे बैंकों की हेजिंग लागत घटाने और NRI ग्राहकों के लिए विदेशी मुद्रा जमा को अधिक आकर्षक बनाने में मदद मिली।
दो महीने में $52 अरब से ज्यादा की आवक
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि इसकी रफ्तार रही है। RBI ने जून में व्यवस्था शुरू की और लगभग दो महीने में FCNR(B) जमा का आंकड़ा 52 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया।
रिपोर्टेड आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के अंत तक FCNR(B) के जरिए करीब 36.7 अरब डॉलर जुटाए जा चुके थे, जो 13 अगस्त तक बढ़कर 52.3 अरब डॉलर हो गए। यानी अगस्त के शुरुआती दिनों में भी विदेशी मुद्रा जमा की गति काफी मजबूत रही।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के लिए क्यों अहम है फैसला?
बड़े पैमाने पर डॉलर की आवक RBI को विदेशी मुद्रा तरलता के मोर्चे पर अतिरिक्त सहारा देती है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7 अगस्त को समाप्त सप्ताह में लगभग 14.1 अरब डॉलर बढ़कर 707 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। रिपोर्टों में इस बढ़ोतरी में FCNR(B) योजना से आने वाले प्रवाह के असर का भी उल्लेख किया गया है।
पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार वैश्विक वित्तीय अस्थिरता, कच्चे तेल की कीमतों में तेज बदलाव और पूंजी निकासी जैसे बाहरी झटकों के खिलाफ भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षा प्रदान करता है।
रुपये के लिए क्या मायने रखता है डॉलर का प्रवाह?
जब बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भारतीय वित्तीय प्रणाली में आती है, तो इससे डॉलर की उपलब्धता बढ़ सकती है और विदेशी मुद्रा बाजार पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, यह मानना सही नहीं होगा कि FCNR(B) प्रवाह अकेले रुपये की दिशा तय करेगा। रुपये पर वैश्विक डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, व्यापार घाटा और वैश्विक ब्याज दरों जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।
समय से पहले बंद करना सफलता या सावधानी?
RBI का फैसला दो नजरियों से महत्वपूर्ण है। एक तरफ, इतनी जल्दी 52.3 अरब डॉलर जुटना दिखाता है कि विशेष सुविधा विदेशी मुद्रा आकर्षित करने में प्रभावी रही। दूसरी तरफ, अत्यधिक डॉलर प्रवाह को घरेलू रुपये की तरलता और बॉन्ड बाजार पर संभावित प्रभाव के संदर्भ में भी प्रबंधित करना पड़ता है।
इसलिए समय से पहले FCNR(B) विंडो बंद करना केवल योजना की सफलता का संकेत नहीं, बल्कि केंद्रीय बैंक के लिए वित्तीय प्रणाली में विदेशी मुद्रा और रुपये की तरलता के बीच संतुलन बनाए रखने का कदम भी माना जा सकता है। शुरुआती बंदी से रुपये की तरलता और शॉर्ट-टर्म बॉन्ड यील्ड पर प्रभाव पड़ने की संभावना भी बाजार विश्लेषण में जताई गई है।
2013 के बाद फिर चर्चा में FCNR रणनीति
RBI इससे पहले 2013 में भी रुपये पर गंभीर दबाव के दौरान FCNR(B) जमा को आकर्षित करने के लिए विशेष स्वैप व्यवस्था का इस्तेमाल कर चुका है। उस समय इस तरह की व्यवस्था के जरिए लगभग 26 अरब डॉलर के FCNR जमा जुटाए गए थे।
2026 में जुटाई गई रकम उस ऐतिहासिक संदर्भ में भी उल्लेखनीय है, क्योंकि इस बार FCNR(B) जमा अकेले 52 अरब डॉलर के स्तर को पार कर चुके हैं।
आगे क्या होगा?
FCNR(B) के लिए विशेष सुविधा के तहत पात्र जमा जुटाने की अंतिम तारीख अब 31 अगस्त 2026 है। हालांकि, ECB और OFCB से जुड़ी संबंधित स्वैप विंडो पर यही शुरुआती बंदी लागू नहीं होती और वे फिलहाल अपने अलग निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेंगी।
आने वाले समय में बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि विशेष विंडो बंद होने के बाद विदेशी मुद्रा प्रवाह की रफ्तार कैसी रहती है और RBI अतिरिक्त डॉलर तरलता का प्रबंधन किस तरह करता है।
निष्कर्ष
RBI की विशेष FCNR(B) व्यवस्था ने बेहद कम समय में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आकर्षित की है। 13 अगस्त तक 52.3 अरब डॉलर का FCNR(B) प्रवाह इस योजना की मजबूत प्रतिक्रिया को दर्शाता है। इसी के बाद RBI ने इसकी समयसीमा एक महीने घटाकर 31 अगस्त करने का निर्णय लिया।
यह कदम विदेशी मुद्रा भंडार और डॉलर तरलता के लिहाज से सकारात्मक संकेत देता है, लेकिन इसके साथ घरेलू तरलता, बॉन्ड यील्ड और रुपये पर पड़ने वाले प्रभावों का संतुलित प्रबंधन भी महत्वपूर्ण रहेगा।
