विज्ञापन - शीर्ष बैनर
Read in English —JantaScope English
वायरल

गुजरात के SD Pay ऐप पर ₹1,200 करोड़ की ठगी का आरोप, देशभर के निवेशकों के पैसे फंसने से मचा हड़कंप

डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन कमाई के बढ़ते चलन के बीच गुजरात से सामने आया कथित निवेश घोटाला एक बार फिर लोगों को सतर्क करने वाला है। SD Pay नाम के ऐप से जुड़े कथित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) और निवेश नेटवर्क पर देशभर के निवेशकों से 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाने और उन्हें नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं। इस मामले ने उन ऑनलाइन योजनाओं पर सवाल खड़े किए हैं, जो कम समय में ज्यादा कमाई का भरोसा देकर लोगों को निवेश के लिए आकर्षित करती हैं।

गुजरात के SD Pay ऐप पर ₹1,200 करोड़ की ठगी का आरोप, देशभर के निवेशकों के पैसे फंसने से मचा हड़कंप
विज्ञापन

द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: The Indian Express, The Times of India, The New Indian Express और Gujarat Samachar की SD Pay मामले से संबंधित रिपोर्टें।

इस तरह के मामलों में सबसे बड़ी चिंता यह है कि निवेशक अक्सर किसी परिचित व्यक्ति, सोशल मीडिया प्रचार या आकर्षक कमाई के दावों पर भरोसा करके अपनी बचत लगा देते हैं। जब भुगतान रुकता है या ऐप पर पैसा निकालना मुश्किल हो जाता है, तब उन्हें कथित योजना की वास्तविक स्थिति का पता चलता है।

SD Pay ऐप क्या था और निवेश का जाल कैसे फैलाया गया?

पुलिस जांच और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, SD Pay या Apna Pay ऐप को वर्ष 2024 में गुजरात के एक स्टार्टअप से जुड़े लोगों ने शुरू किया था। शुरुआत में इसे डिजिटल वॉलेट और मोबाइल रिचार्ज जैसी सुविधाओं से जोड़कर पेश किया गया। बाद में ऐप के माध्यम से निवेश पर आकर्षक रिटर्न और रेफरल बोनस देने की व्यवस्था शुरू की गई।

जांचकर्ताओं के अनुसार, निवेशकों को उनकी जमा राशि के आधार पर रोजाना 0.15 से 0.30 प्रतिशत तक रिटर्न देने का कथित वादा किया जाता था। इसके अलावा, नए लोगों को ऐप से जोड़ने पर रेफरल कमीशन भी मिलता था। इस कमीशन का ढांचा कई स्तरों तक फैला हुआ था। शुरुआती स्तर पर 30 प्रतिशत तक और बाद के कुछ स्तरों पर 3 प्रतिशत तक कमीशन देने की बात सामने आई है।

इस व्यवस्था ने ऐप को तेजी से फैलाने में मदद की। कई निवेशकों ने अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों को भी इसमें शामिल किया। पुलिस के मुताबिक, प्रचार के लिए सेमिनार, ऑनलाइन मीटिंग और सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया गया। इस तरह निवेश का नेटवर्क अलग-अलग राज्यों तक पहुंच गया।

पुराने निवेशकों को भुगतान के लिए नए निवेशकों का पैसा?

इस मामले में पुलिस को शक है कि योजना का संचालन पोंजी या मल्टी-लेवल मार्केटिंग मॉडल की तरह किया जा रहा था। आरोप है कि ऐप के पीछे काम कर रही कंपनियों से कोई बड़ा वास्तविक कारोबार या सेवा-आधारित आय नहीं हो रही थी। इसके बावजूद निवेशकों को नियमित रिटर्न दिखाया जा रहा था।

जांचकर्ताओं के अनुसार, नए निवेशकों से आने वाली रकम का इस्तेमाल पहले से जुड़े लोगों को भुगतान करने में किया जा रहा था। जब नए निवेशकों की संख्या और जमा होने वाली रकम पर्याप्त नहीं रही, तब भुगतान में परेशानी शुरू हो गई।

द इंडियन एक्सप्रेस की 2 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ निवेशकों को मार्च 2026 के आसपास नियमित रिटर्न मिलना बंद हो गया था। इसके बाद ऐप में जमा रकम निकालने में भी दिक्कतें आने लगीं। जून 2026 तक ऐप बंद होने की स्थिति सामने आई और कई लोगों को अपने खाते में दिखाई देने वाली रकम भी वापस नहीं मिल सकी।

₹1,211 करोड़ के लेनदेन की जांच, 15 लाख से ज्यादा डाउनलोड

इस मामले में सामने आए आंकड़े जांच के बड़े दायरे की ओर इशारा करते हैं। पुलिस के मुताबिक, SD Pay ऐप को लगभग 15 लाख लोगों ने डाउनलोड किया था। जांच में 6,52,831 बैंक खातों के जरिए करीब 1,211 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है।

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ₹1,211 करोड़ का आंकड़ा जांच में सामने आए बैंक लेनदेन से जुड़ा है। इसे सीधे तौर पर सभी निवेशकों की साबित हो चुकी कुल ठगी या नुकसान की रकम मानना सही नहीं होगा। पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने वाले पीड़ितों की संख्या और उनके बताए नुकसान का आंकड़ा इससे अलग है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 31 अक्टूबर तक 876 लोगों ने पुलिस से संपर्क कर लगभग ₹37.42 करोड़ के नुकसान की शिकायत की थी। पुलिस को यह भी संदेह है कि कुछ एजेंटों ने निवेशकों से नकद रकम ली थी, जिसका पूरा हिसाब बैंक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। इसलिए वास्तविक वित्तीय नुकसान का आकलन करना अभी जांच का हिस्सा है।

12 आरोपी गिरफ्तार, कई कंपनियां जांच के दायरे में

अमरैली साइबर क्राइम पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सात कंपनियों के नाम सामने आए हैं, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर निवेश की रकम जुटाने और लेनदेन के लिए किया गया।

पुलिस ने कई बैंक खातों की पड़ताल की है और अलग-अलग राज्यों में फैले एजेंटों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में करीब 95 प्रमुख एजेंटों की पहचान किए जाने की जानकारी दी गई है। इनके नेटवर्क का संबंध गुजरात के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश और चंडीगढ़ जैसे क्षेत्रों से बताया गया है।

जांच एजेंसियों के सामने एक बड़ी चुनौती निवेशकों की रकम का पूरा पता लगाना है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अब तक लगभग ₹1.86 करोड़ की रकम जब्त की जा सकी थी। पुलिस आरोपियों की संपत्तियों और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है, ताकि पीड़ितों की रकम की संभावित वसूली के रास्ते तलाशे जा सकें।

निवेशकों के लिए क्या है सबक?

SD Pay का कथित मामला ऑनलाइन निवेश योजनाओं को लेकर कई अहम सवाल खड़े करता है। किसी ऐप का डिजिटल वॉलेट, आकर्षक इंटरफेस या बड़ी संख्या में डाउनलोड होना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह निवेश के लिए सुरक्षित है। इसी तरह किसी परिचित व्यक्ति का पैसा कमाना या शुरुआती भुगतान मिलना भी योजना की विश्वसनीयता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

निवेश करने से पहले यह जांचना जरूरी है कि कंपनी किस कानूनी ढांचे के तहत काम कर रही है, उसे संबंधित वित्तीय गतिविधि के लिए जरूरी अनुमति मिली है या नहीं और रिटर्न का वास्तविक स्रोत क्या है। खासकर रोजाना निश्चित और असामान्य रूप से अधिक मुनाफे का वादा करने वाली योजनाओं से सावधान रहना चाहिए।

अगर किसी व्यक्ति को ऐसी योजना में नुकसान हुआ है, तो उसे भुगतान के स्क्रीनशॉट, बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन आईडी, ऐप से मिली रसीदें और बातचीत के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने चाहिए। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर की जा सकती है। तत्काल सहायता के लिए साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

फिलहाल SD Pay मामले में जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। लेकिन यह मामला बताता है कि जल्दी और लगातार कमाई का लालच किस तरह लोगों की वर्षों की बचत को जोखिम में डाल सकता है।

साझा करें
विज्ञापन - मध्य लेख
विज्ञापन - नीचे