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केदारनाथ में फंसे गुजरात के 14 तीर्थयात्रियों का रेस्क्यू, सूरत की महिला की वायरल अपील के बाद मिली मदद

केदारनाथ यात्रा के दौरान भारी बारिश और भूस्खलन के कारण गुजरात के 14 तीर्थयात्री करीब दो दिनों तक फंसे रहे। सूरत की रंजनबेन पंचाल ने सोशल मीडिया पर वीडियो के जरिए मदद की अपील की। वीडियो वायरल होने के बाद समूह को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित बेस कैंप तक पहुंचाया गया।

केदारनाथ में फंसे गुजरात के 14 तीर्थयात्रियों का रेस्क्यू, सूरत की महिला की वायरल अपील के बाद मिली मदद
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, स्थानीय प्रशासन और बचाव एजेंसियों की रिपोर्ट।

केदारनाथ में फंसा गुजरात के यात्रियों का समूह

उत्तराखंड में खराब मौसम और भूस्खलन के बीच केदारनाथ यात्रा पर गया गुजरात के 14 लोगों का एक समूह मुश्किल में फंस गया। लगातार बारिश के कारण पैदल मार्ग प्रभावित हुआ और यात्रियों के लिए वापस बेस कैंप तक पहुंचना कठिन हो गया।

समूह में सूरत के अलथाण इलाके की 52 वर्षीय रंजनबेन पंचाल, उनके परिवार के सात सदस्य और अहमदाबाद के छह रिश्तेदार शामिल थे।

समूह ने 21 सितंबर को अहमदाबाद से 12 दिनों की केदारनाथ यात्रा शुरू की थी। शनिवार को उन्होंने बेस कैंप से केदारनाथ की ओर पैदल यात्रा शुरू की, लेकिन बारिश और भूस्खलन ने उनकी वापसी का रास्ता प्रभावित कर दिया।

रंजनबेन ने वीडियो बनाकर मांगी मदद

करीब दो दिनों तक फंसे रहने के बाद रंजनबेन पंचाल ने सोमवार सुबह एक वीडियो रिकॉर्ड कर गुजरात सरकार से मदद की अपील की।

वीडियो में वह भावुक नजर आईं और उन्होंने सरकार से समूह को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में सहायता मांगी।

वीडियो में आसपास मौजूद अन्य यात्रियों और पहाड़ों पर छाए खराब मौसम की स्थिति भी दिखाई गई। कुछ तीर्थयात्री खुले क्षेत्र में लगाए गए टेंट में आश्रय लिए हुए थे।

रंजनबेन ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद उन्हें शुरुआत में उचित प्रतिक्रिया नहीं मिली। यह उनका आरोप है; उपलब्ध रिपोर्ट में स्थानीय प्रशासन की ओर से इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।

वायरल वीडियो के बाद हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू

रंजनबेन के अनुसार, सोशल मीडिया पर वीडियो फैलने के बाद स्थानीय प्रशासन ने कार्रवाई की और फंसे यात्रियों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर भेजा।

इसके बाद सभी 14 यात्रियों को एयरलिफ्ट करके बेस कैंप क्षेत्र तक सुरक्षित पहुंचाया गया।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है: उपलब्ध रिपोर्टिंग वीडियो वायरल होने और उसके बाद हुए रेस्क्यू के बीच घटनाक्रम बताती है, लेकिन इससे अकेले यह निश्चित रूप से साबित नहीं होता कि वायरल वीडियो ही बचाव अभियान शुरू होने का एकमात्र कारण था।

परिवार को फोन कर दी सुरक्षित होने की जानकारी

रेस्क्यू के बाद रंजनबेन ने सूरत में अपने बेटों से संपर्क कर बताया कि समूह सुरक्षित है।

इसके बाद यात्रियों ने होटल से अपना सामान लिया। उन्होंने यात्रा समाप्त करने के बजाय अपनी पहले से तय योजना के अनुसार सोमवार शाम बद्रीनाथ की यात्रा जारी रखी।

इससे पहले वायरल वीडियो सामने आने के बाद सूरत में मौजूद परिवार के सदस्यों में चिंता बढ़ गई थी और उन्होंने गुजरात सरकार तथा आपदा प्रबंधन विभाग से उत्तराखंड प्रशासन से संपर्क करने की अपील की थी।

उसी दौरान केदारनाथ मार्ग पर बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन

गुजरात के यात्रियों की घटना ऐसे समय सामने आई जब खराब मौसम के कारण केदारनाथ यात्रा मार्ग के दूसरे हिस्सों में भी बड़ी संख्या में तीर्थयात्री प्रभावित हुए।

चिरबासा इलाके में भूस्खलन के कारण लगभग 1,500 यात्री फंस गए थे। SDRF के अनुसार, SDRF, NDRF और DDRF की संयुक्त टीमों ने इन यात्रियों को सुरक्षित निकालकर गौरीकुंड की ओर पहुंचाया।

चिरबासा में भूस्खलन का मलबा रास्ते पर जमा हो गया था और पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण यात्रियों की आवाजाही जोखिमपूर्ण हो गई थी।

लगातार भारी बारिश के कारण चारधाम यात्रा भी लगातार दूसरे दिन निलंबित रही।

केदारनाथ यात्रा में मौसम क्यों बन सकता है बड़ी चुनौती?

केदारनाथ धाम तक पहुंचने के लिए गौरीकुंड से लगभग 16 किलोमीटर की एकतरफा पैदल यात्रा करनी होती है।

पहाड़ी भूभाग में तेज बारिश के दौरान भूस्खलन, पत्थर गिरने और रास्ते क्षतिग्रस्त होने जैसी परिस्थितियां यात्रा को अचानक बाधित कर सकती हैं।

हेलीकॉप्टर से बचाव भी हमेशा तुरंत संभव नहीं होता, क्योंकि उड़ान संचालन मौसम और दृश्यता जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

यही कारण है कि मौसम संबंधी चेतावनियां और स्थानीय प्रशासन के यात्रा निर्देश केदारनाथ जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में विशेष महत्व रखते हैं।

सोशल मीडिया ने सूचना पहुंचाने में निभाई भूमिका

रंजनबेन पंचाल की घटना यह दिखाती है कि आपात स्थिति में सोशल मीडिया किसी प्रभावित व्यक्ति की स्थिति को तेजी से व्यापक लोगों और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का माध्यम बन सकता है।

लेकिन वायरल पोस्ट को औपचारिक आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में बचाव अभियान मौसम, जमीनी परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के समन्वय पर निर्भर करते हैं।

इस मामले में राहत की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि गुजरात से आए सभी 14 यात्री सुरक्षित बेस कैंप तक पहुंच गए और बाद में अपनी यात्रा जारी रख सके।

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