केरल, 27 अगस्त 2026: मंदिरों में प्रसाद के रूप में लड्डू, फल, पायसम या पंचामृत मिलना आम बात है, लेकिन केरल के अलप्पुझा जिले का एक भगवान मुरुगन मंदिर इन दिनों बिल्कुल अलग वजह से सोशल मीडिया पर चर्चा में है। यहां श्रद्धालु भगवान मुरुगन को Munch चॉकलेट चढ़ाते हैं और बाद में चॉकलेट को ही प्रसाद के रूप में प्राप्त करते हैं। इस वर्षों पुरानी स्थानीय परंपरा का एक नया वीडियो वायरल होने के बाद देशभर में इसे लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
वायरल वीडियो ने फिर दिलाई ‘Munch Murugan’ को पहचान
हाल में कंटेंट क्रिएटर Reha Adani ने केरल के Thalavady, Alappuzha स्थित भगवान मुरुगन के मंदिर की अपनी यात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में मंदिर के दर्शन के साथ वहां मिलने वाले असामान्य प्रसाद को दिखाया गया। इसके बाद यह अनोखी परंपरा तेजी से इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई।
हालांकि यह प्रथा नई नहीं है। पुराने मीडिया कवरेज से पता चलता है कि मंदिर में चॉकलेट चढ़ाने की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। 2021 में भी इस मंदिर और ‘Munch Murugan’ से जुड़ी परंपरा की खबरें सामने आई थीं।
आखिर भगवान मुरुगन को क्यों चढ़ाई जाती है Munch Chocolate?
इस सवाल का कोई एक प्रमाणित ऐतिहासिक जवाब उपलब्ध नहीं है। परंपरा की शुरुआत को लेकर अलग-अलग स्थानीय कहानियां प्रचलित हैं और हालिया रिपोर्टों के अनुसार मंदिर प्रशासन भी इसके सटीक मूल की पुष्टि नहीं कर पाया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी के मुताबिक, एक बीमार बच्चे ने भगवान मुरुगन को Munch चॉकलेट अर्पित की थी। मान्यता के अनुसार बच्चे के ठीक होने के बाद लोगों ने इसे उसकी प्रार्थना और आस्था से जोड़ना शुरू किया। धीरे-धीरे दूसरे श्रद्धालुओं ने भी भगवान को Munch चढ़ाना शुरू कर दिया और यह स्थानीय परंपरा का हिस्सा बन गया।
इसी वजह से भगवान मुरुगन को स्थानीय स्तर पर प्यार से ‘Munch Murugan’ भी कहा जाने लगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे के ठीक होने से जुड़ी कहानी को स्थानीय मान्यता या लोककथा के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित घटना के रूप में।
बच्चों और छात्रों से भी जुड़ी है परंपरा
स्थानीय मान्यताओं के अलग-अलग संस्करण सामने आते रहे हैं। Onmanorama की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोग इस परंपरा को बच्चों के स्वास्थ्य और खुशहाली से जोड़ते हैं, जबकि छात्र परीक्षा में अच्छे परिणाम की प्रार्थना करते हुए भी चॉकलेट चढ़ाते हैं। मंदिर में भगवान मुरुगन के बाल स्वरूप की पूजा होने को भी स्थानीय लोग चॉकलेट की इस परंपरा से जोड़ते हैं।
समय के साथ सामान्य बाजार में मिलने वाली एक चॉकलेट स्थानीय धार्मिक परंपरा का विशिष्ट हिस्सा बन गई।
भगवान को चढ़ाने के बाद प्रसाद में मिलती है चॉकलेट
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु Munch चॉकलेट भगवान मुरुगन को अर्पित करते हैं। पूजा के बाद चॉकलेट को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को दिया जाता है। रिपोर्टों में चॉकलेट के साथ फूल और चंदन दिए जाने का भी उल्लेख मिलता है।
यही बात इस मंदिर को सोशल मीडिया पर इतना आकर्षक बना रही है। परंपरागत मंदिर प्रसाद से बिल्कुल अलग दिखने वाली पैकेज्ड चॉकलेट लोगों के लिए तुरंत ध्यान खींचने वाला दृश्य बन गई है।
सोशल मीडिया पर प्यार भी, सवाल भी
वायरल वीडियो पर कई लोगों ने इस परंपरा को दिलचस्प और प्यारा बताया। कुछ यूजर्स ने मंदिर जाने के अपने पुराने अनुभव भी साझा किए और बताया कि वे पहले से इस परंपरा के बारे में जानते थे।
लेकिन प्रतिक्रिया पूरी तरह एकतरफा नहीं रही।
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या व्यावसायिक रूप से तैयार और प्लास्टिक पैकेजिंग में मिलने वाली चॉकलेट को धार्मिक प्रसाद के रूप में इस्तेमाल करना उचित है। कुछ ने सामग्री और पैकेजिंग को लेकर भी आपत्ति जताई।
इस तरह वायरल वीडियो ने केवल उत्सुकता ही नहीं बढ़ाई, बल्कि आधुनिक उत्पादों और पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के बीच संबंध पर भी चर्चा शुरू कर दी।
यह कहानी क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में धार्मिक परंपराएं हमेशा एक जैसी नहीं रही हैं। अलग-अलग क्षेत्रों, समुदायों और मंदिरों में स्थानीय संस्कृति के अनुसार विशिष्ट प्रसाद और चढ़ावे विकसित हुए हैं।
केरल में भी कई मंदिर अपने असामान्य प्रसाद और स्थानीय परंपराओं के लिए पहचाने जाते हैं। ऐसे में Munch चॉकलेट की यह परंपरा इस बात का दिलचस्प उदाहरण है कि किसी स्थानीय कहानी और सामुदायिक आस्था से जुड़ी सामान्य वस्तु समय के साथ किसी धार्मिक स्थल की पहचान का हिस्सा कैसे बन सकती है।
क्या यह सिर्फ सोशल मीडिया का नया ट्रेंड है?
नहीं। वायरल वीडियो नया है, लेकिन Munch चढ़ाने की परंपरा पुरानी है। इस मंदिर की चॉकलेट परंपरा का उल्लेख वर्षों पहले भी मीडिया में हो चुका है। इसलिए इसे सोशल मीडिया से पैदा हुआ नया ट्रेंड कहना सही नहीं होगा।
असल में सोशल मीडिया ने एक पुरानी स्थानीय परंपरा को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।
संतुलित विश्लेषण
‘Munch Murugan’ की कहानी भारतीय धार्मिक परंपराओं के स्थानीय और बदलते स्वरूप की दिलचस्प झलक पेश करती है। श्रद्धालुओं के लिए चॉकलेट केवल बाजार में मिलने वाला उत्पाद नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत आस्था से जुड़ा चढ़ावा हो सकता है।
वहीं आलोचकों की चिंताएं भी चर्चा का हिस्सा हैं—खासकर पैकेजिंग, सामग्री और पारंपरिक प्रसाद की धार्मिक परिभाषा को लेकर।
सबसे जरूरी अंतर तथ्य और आस्था के बीच रखना है। मंदिर में Munch चढ़ाने और उसे प्रसाद के रूप में देने की परंपरा के बारे में वर्षों से रिपोर्टिंग होती रही है, लेकिन इसकी शुरुआत से जुड़ी बीमार बच्चे के ठीक होने वाली कहानी की स्वतंत्र ऐतिहासिक या चिकित्सकीय पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे स्थानीय मान्यता के रूप में प्रस्तुत करना अधिक उचित है।
सोशल मीडिया की बदौलत अब केरल की यह स्थानीय परंपरा फिर पूरे देश का ध्यान खींच रही है।
