मैसूर दशहरा में दिखा तकनीक और परंपरा का अद्भुत संगम
मैसूर, कर्नाटक, 24 अक्टूबर 2026: अपनी ऐतिहासिक विरासत, भव्य दशहरा उत्सव और रोशनी से सजे महल के लिए प्रसिद्ध मैसूर ने इस बार एक अलग वजह से दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है।
18 अक्टूबर की रात बन्नीमंटप स्थित टॉर्चलाइट परेड ग्राउंड में हजारों रोशनी वाले ड्रोन एक साथ आसमान में उड़े। कुछ ही देर में इनकी बदलती स्थिति और रंगों ने भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर का विशाल आकार तैयार कर दिया। सबसे आकर्षक दृश्य वह था, जब मोर के पंख फैलते और नृत्य करते हुए दिखाई दिए। यह सामान्य आतिशबाजी नहीं, बल्कि कंप्यूटर के जरिए नियंत्रित हजारों ड्रोन का सामूहिक प्रदर्शन था।
किस श्रेणी में मिला गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड?
आयोजकों और स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस प्रदर्शन को मल्टीरोटर ड्रोन से बनाई गई पक्षी की सबसे बड़ी हवाई आकृति की श्रेणी में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की मान्यता मिली। कार्यक्रम का आयोजन चामुंडेश्वरी इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कॉरपोरेशन लिमिटेड (CESC) और कर्नाटक सरकार के ऊर्जा विभाग ने किया था। ड्रोन संचालन की जिम्मेदारी आईआईटी दिल्ली से जुड़ी तकनीकी कंपनी BotLab Dynamics ने संभाली।
स्थानीय समाचारपत्र Star of Mysore के मुताबिक, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधियों ने आयोजन के बाद उपलब्धि का प्रमाणपत्र CESC के तकनीकी निदेशक एल. लोकेश और उनकी टीम को सौंपा। इससे पहले सितंबर 2026 में लीबिया के बेंगाजी में 3,000 ड्रोन से पक्षी की आकृति बनाने का रिकॉर्ड दर्ज हुआ था। मैसूर के प्रदर्शन ने उस संख्या को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, 24 अक्टूबर तक गिनीज की सार्वजनिक वेबसाइट पर लीबिया की पिछली प्रविष्टि दिखाई दे रही थी। संस्था अपनी वेबसाइट पर स्पष्ट करती है कि नए रिकॉर्ड ऑनलाइन प्रकाशित होने में समय लग सकता है।
सिर्फ मोर नहीं, आसमान में दिखीं 12 आकर्षक आकृतियां
मोर इस ड्रोन शो का सबसे बड़ा आकर्षण था, लेकिन कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और पौराणिक परंपराओं से जुड़े कई अन्य दृश्य भी प्रस्तुत किए गए। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 12 अलग-अलग आकृतियां प्रदर्शित की गईं। इनमें भगवान शिव, नंदी, देवी चामुंडेश्वरी, स्वर्ण अंबारी लिए हाथी, तितली, शेर, सुदर्शन चक्र और राष्ट्रीय ध्वज थामे सैनिक की तस्वीरें शामिल थीं। इन दृश्यों के माध्यम से आधुनिक तकनीक के साथ धार्मिक परंपराओं, राष्ट्रीय गौरव और कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान को जोड़ने का प्रयास किया गया। विशेष रूप से देवी चामुंडेश्वरी की आकृति मैसूर के दशहरा उत्सव के लिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि यह त्योहार देवी की महिषासुर पर विजय की परंपरा से जुड़ा है।
हजारों ड्रोन एक साथ कैसे बनाते हैं आकृतियां?
इस तरह के शो में प्रत्येक ड्रोन को उड़ान शुरू होने से पहले एक निर्धारित स्थान और मार्ग दिया जाता है। विशेष सॉफ्टवेयर हजारों ड्रोन की गतिविधियों में तालमेल बनाता है। प्रत्येक ड्रोन पर लगी रंगीन LED लाइट अलग-अलग रंगों में चमकती है। जब ये ड्रोन निर्धारित क्रम में अपनी जगह बदलते हैं, तो नीचे से देखने वाले दर्शकों को आसमान में विशाल तस्वीरें और चलती हुई आकृतियां दिखाई देती हैं। ऐसे आयोजन में उड़ान की सटीकता, सुरक्षित दूरी, मौसम और नियंत्रण व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। हजारों ड्रोन का एक साथ सफल संचालन तकनीकी तैयारी और टीमवर्क का उदाहरण है।
ड्रोन शो देखने उमड़ी भारी भीड़
BotLab Dynamics द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, शुरुआती दो दिनों में आयोजन स्थल पर दर्शकों की उपस्थिति 40,000 से अधिक रही, जबकि बैठने की आधिकारिक क्षमता लगभग 33,500 थी। कंपनी ने दावा किया कि 20,000 से ज्यादा अतिरिक्त लोग मैदान के बाहर भी प्रदर्शन देखने पहुंचे। आसपास की इमारतों और छतों से भी लोगों ने आसमान में बनती रंगीन आकृतियों का आनंद लिया। कंपनी ने पिछले वर्ष की तुलना में दर्शकों की संख्या में 154 प्रतिशत वृद्धि का दावा किया है। हालांकि, इन आंकड़ों का अलग से स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है।
ड्रोन शो के वीडियो Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी इस उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे राज्य की सांस्कृतिक रचनात्मकता और तकनीकी प्रगति का प्रतीक बताया।
लगातार दूसरे वर्ष CESC के नाम विश्व रिकॉर्ड
मैसूर के लिए यह पहला ड्रोन रिकॉर्ड नहीं है। वर्ष 2025 में दशहरा समारोह के दौरान 2,983 ड्रोन से छलांग लगाते बाघ की विशाल आकृति बनाई गई थी। उस प्रदर्शन को स्तनधारी जीव की सबसे बड़ी हवाई ड्रोन आकृति की श्रेणी में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मिला था। इस वर्ष मोर की आकृति ने पक्षियों की श्रेणी में नई उपलब्धि हासिल की। BotLab Dynamics के अनुसार, कंपनी वर्ष 2022 से लगातार मैसूर दशहरा में ड्रोन शो प्रस्तुत कर रही है। शुरुआती वर्षों में कुछ सौ ड्रोन इस्तेमाल हुए थे, लेकिन अब इनकी संख्या कई हजार तक पहुंच गई है।
मैसूर की ऐतिहासिक पहचान को मिला आधुनिक रूप
कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज ने भी इस रिकॉर्ड के लिए आयोजन से जुड़े अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों को बधाई दी। दशहरा समारोह के दौरान मैसूर में लगभग 146 किलोमीटर सड़कों और अनेक प्रमुख चौराहों को रंगीन रोशनी से सजाया गया था। इस तरह के आयोजन पारंपरिक त्योहारों को नई पीढ़ी से जोड़ने के साथ पर्यटन के लिए अतिरिक्त आकर्षण बन सकते हैं। हालांकि, बड़े ड्रोन शो में सुरक्षा प्रबंधन, आयोजन लागत और पर्यावरण संबंधी प्रभावों का आकलन भी जरूरी है। मैसूर में बना विशाल मोर केवल रोशनी का प्रदर्शन नहीं था। यह इस बात का उदाहरण भी बना कि पारंपरिक उत्सवों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके किस तरह नए अनुभव तैयार किए जा सकते हैं।
मोर की इस रिकॉर्ड बनाने वाली आकृति ने मैसूर दशहरा 2026 को एक यादगार तकनीकी उपलब्धि के रूप में नई पहचान दी है।
