हैदराबाद में काम करने वाले एक AI इंजीनियर की सोशल मीडिया पोस्ट ने भारतीय कार्यस्थलों में भाषा की भूमिका को लेकर चर्चा छेड़ दी है। इंजीनियर का दावा है कि हिंदी समझने और बोलने में कठिनाई के कारण उसे धीरे-धीरे महत्वपूर्ण तकनीकी काम और निर्णय लेने की जिम्मेदारियों से दूर कर दिया गया।
इंजीनियर ने Reddit पर अपनी कहानी साझा करते हुए कहा कि वह अब कंपनी छोड़ने पर विचार कर रहा है, क्योंकि उसे लगता है कि मौजूदा भूमिका में न तो पर्याप्त सीखने का अवसर मिल रहा है और न ही उसकी तकनीकी क्षमताओं का पूरा उपयोग हो रहा है। हालांकि, ये आरोप कर्मचारी के व्यक्तिगत विवरण पर आधारित हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए गए हैं।
तीन साल का अनुभव, Senior AI/ML Engineer के तौर पर हुई थी नियुक्ति
रिपोर्टों के मुताबिक, Reddit यूजर ने खुद को लगभग तीन साल के अनुभव वाला AI इंजीनियर बताया है। उसका कहना है कि उसने उत्तर भारत स्थित एक कंपनी में Senior AI/ML Engineer के तौर पर नौकरी शुरू की थी।
शुरुआती महीनों में अनुभव सकारात्मक रहा। उसके अनुसार, वह AI architectures, Large Language Models (LLMs) और अन्य AI प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा था। उसे कई प्रोजेक्ट्स के साथ निर्णय लेने से जुड़ी जिम्मेदारियां भी मिली थीं।
एक प्रोजेक्ट की डेडलाइन के बाद बदलने लगी स्थिति
इंजीनियर के अनुसार, परिस्थितियां उस समय बदलने लगीं जब एक प्रोजेक्ट को बहुत कम समय में पूरा करने की जरूरत सामने आई। उसने काम पूरा करने के लिए जो समय अनुमान दिया था, वह कथित तौर पर कंपनी के VP की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं था।
उसका दावा है कि इसके बाद एक अन्य डेवलपर को प्रोजेक्ट में शामिल किया गया। इंजीनियर के मुताबिक, उसने उस सहयोगी की prompts से जुड़ी मदद की, लेकिन बाद में वही काम VP के सामने दूसरे कर्मचारी के काम के रूप में पेश किया गया। यह विवरण भी कर्मचारी का दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
‘Actual model training और evaluation से हटा दिया गया’
इंजीनियर ने आरोप लगाया कि समय के साथ उसे core technical responsibilities से दूर किया जाने लगा। अपनी Reddit पोस्ट में उसने लिखा:
“I was removed from the actual model trainings, model evaluations part because they have communication problem.”
उसका कहना है कि टीम में हिंदी और बंगाली का इस्तेमाल आम था, जबकि वह हिंदी समझने या बोलने में सहज नहीं था। इसी वजह से उसे लगा कि भाषा उसके पेशेवर काम और टीम के साथ संवाद में बाधा बन रही है।
VP पर ‘Give him to some south guy’ कहने का आरोप
पोस्ट में इंजीनियर ने एक और घटना का जिक्र किया। उसने दावा किया कि एक बैठक के दौरान VP ने कथित तौर पर दूसरे लोगों से कहा:
“Give him to some south guy.”
इस कथित टिप्पणी ने कर्मचारी की इस धारणा को और मजबूत किया कि उसके साथ व्यवहार में क्षेत्रीय या भाषाई पहचान भूमिका निभा रही थी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में कंपनी या संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चार महीने बाद ही नौकरी छोड़ने पर विचार
इंजीनियर ने सवाल उठाया कि जब उसकी शिक्षा और पेशेवर प्रशिक्षण मुख्य रूप से अंग्रेजी में हुआ है, तो कार्यस्थल पर हिंदी में सहज होना उसके तकनीकी काम के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों बन रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी में शामिल हुए उसे करीब चार महीने ही हुए हैं, लेकिन अब वह इस्तीफा देने के बारे में सोच रहा है।
उसने Reddit पर लिखा:
“I want to resign this company as I am not learning anything or upskilling.”
साथ ही उसने दूसरे यूजर्स से राय मांगी कि उसे जल्द नौकरी छोड़ देनी चाहिए या कुछ और समय रुककर अनुभव हासिल करना चाहिए।
इंटरनेट पर छिड़ी भाषा और वर्कप्लेस कल्चर की बहस
पोस्ट सामने आने के बाद Reddit पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने अपने कार्यस्थलों पर स्थानीय भाषाओं के कारण पेश आई संवाद संबंधी परेशानियों के अनुभव साझा किए।
एक यूजर ने बताया कि उसके कार्यालय में अधिकांश सहकर्मी कन्नड़ में बात करते थे और उसने भी कार्यस्थल से जुड़ी परेशानियों के बाद नौकरी छोड़ दी थी। वहीं एक अन्य यूजर ने इंजीनियर को रोजमर्रा की बातचीत आसान बनाने के लिए हिंदी के कुछ सामान्य शब्द और phrases सीखने की सलाह दी।
मामला केवल हिंदी बनाम अंग्रेजी का नहीं
इस घटना से किसी एक कंपनी या पूरे टेक सेक्टर के बारे में व्यापक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, क्योंकि उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से एक कर्मचारी की सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है।
फिर भी, इस पोस्ट से एक व्यावहारिक सवाल जरूर सामने आता है—बहुभाषी टीमों में अनौपचारिक बातचीत और महत्वपूर्ण पेशेवर संवाद के बीच सीमा कहां होनी चाहिए?
जब प्रोजेक्ट से जुड़े फैसले, तकनीकी चर्चा या जिम्मेदारियों का वितरण ऐसी भाषा में होता है जिसे टीम का कोई सदस्य नहीं समझता, तो जानकारी तक समान पहुंच प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, भारत जैसे बहुभाषी देश में सहकर्मियों के बीच स्थानीय या पसंदीदा भाषाओं का इस्तेमाल सामान्य है। ऐसे में स्पष्ट communication norms बहुभाषी टीमों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
फिलहाल, संबंधित इंजीनियर के आरोप स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं। इसलिए इस मामले को किसी स्थापित भाषाई भेदभाव के निष्कर्ष के बजाय कर्मचारी द्वारा सार्वजनिक रूप से साझा किए गए कार्यस्थल अनुभव और उस पर हुई ऑनलाइन चर्चा के रूप में देखा जाना चाहिए।
