पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच बयानबाजी तेज
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा सुरक्षा तथा आतंकवाद के मुद्दे पर जारी विवाद अब तीखी सार्वजनिक बयानबाजी में भी दिखाई दे रहा है।
तालिबान सरकार में सीमा एवं जनजातीय मामलों के मंत्री नूरुल्लाह नूरी ने पाकिस्तान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। नूरी पहले भी पाकिस्तान की अफगानिस्तान में सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना करते हुए तालिबान की जवाबी कार्रवाई का उल्लेख कर चुके हैं।
इसी बीच कुछ रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में नूरी से यह दावा जोड़ा जा रहा है कि अफगान पक्ष दो दिनों के भीतर पेशावर पहुंचकर अपना झंडा फहरा सकता है।
लेकिन इस लेख के प्रकाशन तक इस विशेष कथन की Reuters या Associated Press जैसी प्रमुख स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों से पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए इसे सत्यापित सैन्य घोषणा के बजाय नूरी से जोड़े जा रहे एक रिपोर्टेड दावे के रूप में देखना जरूरी है।
आखिर क्यों बिगड़ रहे हैं पाकिस्तान और तालिबान के रिश्ते?
दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव की सबसे बड़ी वजह सीमा पार आतंकवाद को लेकर गंभीर मतभेद हैं।
पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP और दूसरे सशस्त्र समूह अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के अंदर हमलों के लिए कर रहे हैं।
काबुल की तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है।
हाल के महीनों में स्थिति सैन्य टकराव तक पहुंच गई है। सितंबर 2026 में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर कई स्थानों पर हवाई हमले किए। पाकिस्तान ने कहा कि इन कार्रवाइयों में उन ठिकानों को निशाना बनाया गया जिनका इस्तेमाल उसके खिलाफ हमलों के लिए किया जा रहा था।
दूसरी तरफ, तालिबान सरकार ने पाकिस्तानी कार्रवाइयों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और कुछ हमलों में नागरिकों के मारे जाने का दावा किया।
सीमा पर भी आमने-सामने आए दोनों पक्ष
तनाव केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रहा है।
सितंबर के अंतिम सप्ताह में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर दोनों देशों के बलों के बीच संघर्ष की खबरें सामने आईं। पाकिस्तान ने एक संघर्ष में अफगान तालिबान के 13 सदस्यों के मारे जाने का दावा किया, जबकि अफगान रक्षा मंत्रालय ने इस दावे से इनकार किया।
दोनों पक्षों की ओर से युद्ध के मैदान से जुड़े कई दावे किए गए हैं और इनमें से सभी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
अफगान रक्षा मंत्रालय ने अलग से दावा किया कि नूरिस्तान में पाकिस्तान की दिशा से अफगान क्षेत्र में प्रवेश करने वाले दर्जनों लड़ाकों को उसके बलों ने मार दिया या पकड़ लिया। पाकिस्तान और अफगानिस्तान एक-दूसरे पर सशस्त्र समूहों को समर्थन देने के आरोप लगाते रहे हैं।
पेशावर का नाम आने से मामला क्यों संवेदनशील?
पेशावर पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी और अफगान सीमा के निकट एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर है।
शहर का अफगानिस्तान और सीमावर्ती पश्तून क्षेत्रों के साथ गहरा ऐतिहासिक, आर्थिक और सामाजिक संबंध रहा है। यही वजह है कि पेशावर पर नियंत्रण या वहां किसी दूसरे देश का झंडा फहराने जैसी बयानबाजी पाकिस्तान में अत्यधिक संवेदनशील मानी जाएगी।
हालांकि किसी राजनीतिक बयान या धमकी को वास्तविक सैन्य योजना अथवा क्षमता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
डूरंड लाइन भी पुराने विवाद का हिस्सा
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के तनाव की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में डूरंड लाइन का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है।
लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा दोनों देशों को अलग करती है, लेकिन इसकी राजनीतिक और ऐतिहासिक स्थिति लंबे समय से विवाद का विषय रही है।
तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद भी सीमा पर बाड़ लगाने और चौकियों से जुड़े विवाद कई बार दोनों देशों के सुरक्षा बलों को आमने-सामने ला चुके हैं।
कभी सहयोगी रहे पाकिस्तान और तालिबान के रिश्तों में बदलाव
अगस्त 2021 में तालिबान के दोबारा अफगानिस्तान की सत्ता संभालने के समय पाकिस्तान को उन देशों में गिना जाता था जिनके तालिबान नेतृत्व के साथ लंबे समय से संपर्क थे।
लेकिन इसके बाद TTP की गतिविधियों को लेकर इस्लामाबाद और काबुल के बीच मतभेद तेजी से बढ़े।
TTP अफगान तालिबान से अलग संगठन है, हालांकि दोनों के बीच ऐतिहासिक और वैचारिक संबंध रहे हैं। पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान में मौजूद ठिकानों से TTP को मदद मिलती है। तालिबान प्रशासन इस आरोप को स्वीकार नहीं करता।
यह घटनाक्रम क्यों महत्वपूर्ण है?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव दक्षिण और मध्य एशिया की सुरक्षा के लिए व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
दोनों देशों के बीच लंबी सीमा है और सीमावर्ती इलाकों में लंबे समय से आतंकवाद, तस्करी, विस्थापन और राजनीतिक अस्थिरता जैसी चुनौतियां मौजूद रही हैं।
यदि सैन्य कार्रवाइयों और आक्रामक बयानबाजी का सिलसिला बढ़ता है, तो इसका असर सीमा व्यापार, आम नागरिकों की आवाजाही और क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रयासों पर भी पड़ सकता है।
चीन, तुर्की, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों ने हाल के तनाव के दौरान दोनों पक्षों के बीच स्थिति शांत करने के प्रयासों में भूमिका निभाई है।
संतुलित विश्लेषण
नूरुल्लाह नूरी की पाकिस्तान को लेकर कड़ी बयानबाजी ऐसे समय सामने आई है जब दोनों देशों के संबंध पहले ही बेहद तनावपूर्ण हैं।
पेशावर में दो दिनों के भीतर झंडा फहराने से जुड़ा कथित बयान स्वाभाविक रूप से ध्यान खींचता है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि न होने के कारण इसे तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
इसके विपरीत, जिस बड़े घटनाक्रम की पुष्टि कई स्वतंत्र रिपोर्टों से होती है, वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता सैन्य तथा कूटनीतिक तनाव है।
दोनों पक्ष सीमा पार आतंकवाद के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और हाल के हवाई हमलों तथा सीमा संघर्षों ने पुराने मतभेदों को और गंभीर बना दिया है।
ऐसे माहौल में किसी भी आक्रामक बयान को वास्तविक सैन्य घटनाक्रम से अलग करके देखना महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत और सीमा पर स्थिति यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी कि तनाव कम होता है या टकराव और बढ़ता है।
