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राष्ट्रपति मुर्मू के पूर्व ADC ऋषभ संब्याल का खुलासा: ‘शादी नहीं कर सकते थे’, बताया हाई-प्रोफाइल जिम्मेदारी की निजी कीमत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व Aide-de-Camp (ADC) मेजर (रिटायर्ड) ऋषभ सिंह संब्याल ने अपने कार्यकाल से जुड़े निजी त्याग और जिम्मेदारियों पर खुलकर बात की है। राज शमानी के पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि ADC के रूप में सेवा के दौरान शादी को लेकर प्रतिबंध था, परिवार से दूरी बनी रहती थी और सामान्य निजी जीवन के लिए बहुत कम जगह बचती थी।

राष्ट्रपति मुर्मू के पूर्व ADC ऋषभ संब्याल का खुलासा: ‘शादी नहीं कर सकते थे’, बताया हाई-प्रोफाइल जिम्मेदारी की निजी कीमत
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द्वारा Jeet Nirmal

स्रोत: The Indian Express

राष्ट्रपति के बेहद करीब रहने वाली भूमिका, लेकिन निजी जीवन पर बड़ी कीमत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व Aide-de-Camp (ADC) और भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने उस प्रतिष्ठित जिम्मेदारी के एक ऐसे पहलू पर बात की है, जो आम तौर पर औपचारिक समारोहों और सार्वजनिक कार्यक्रमों की तस्वीरों में दिखाई नहीं देता—इस भूमिका का निजी जीवन पर असर।

राज शमानी के Figuring Out पॉडकास्ट में संब्याल ने राष्ट्रपति के ADC के रूप में अपने अनुभव, जिम्मेदारियों और निजी त्याग के बारे में चर्चा की। यह एपिसोड 10 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुआ था। पॉडकास्ट के विवरण में भी उनकी समयपूर्व सेवानिवृत्ति और सेवा की “personal cost” को बातचीत के प्रमुख विषयों में शामिल किया गया है।

संब्याल भारतीय सेना में करीब 12 वर्ष रहे और लगभग तीन वर्षों तक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC के रूप में सेवा दी। इसके बाद उन्होंने समय से पहले सेना से सेवानिवृत्ति ली।

‘मैं शादीशुदा नहीं हूं… यह सबसे बड़ा त्याग है’

जब उनसे पूछा गया कि राष्ट्रपति का ADC बनने के लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से सबसे बड़ा त्याग क्या करना पड़ा, तो संब्याल ने अपने निजी और पारिवारिक जीवन का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “I am not married.” इसके बाद उन्होंने बताया कि ADC के लिए एक ऐसा प्रावधान है जिसके तहत कार्यकाल के दौरान वे शादी नहीं कर सकते। परिवार से दूर रहने को भी उन्होंने इस जिम्मेदारी से जुड़ा बड़ा त्याग बताया।

संब्याल के अनुसार, राष्ट्रपति के ADC के रूप में सेवा करते समय सामान्य व्यक्ति की तरह बाहर जाकर जीवन का आनंद लेना भी आसान नहीं था।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि शादी संबंधी प्रतिबंध की जानकारी संब्याल ने अपने इंटरव्यू में दी है। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टिंग में इस कथन की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक नियम-पत्र उद्धृत नहीं किया गया है, इसलिए इसे संब्याल के स्वयं के विवरण के रूप में समझा जाना चाहिए।

ADC की जिम्मेदारी आखिर होती क्या है?

संब्याल के मुताबिक, राष्ट्रपति के ADC का काम केवल औपचारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के साथ मौजूद रहना नहीं है। भूमिका में राष्ट्रपति की आधिकारिक और अन्य आवश्यकताओं से जुड़ा व्यापक समन्वय शामिल होता है।

उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को समझाते हुए इसे संक्षेप में “Everything” कहा। उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि यदि राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री से बात करनी हो, तो ADC संबंधित टीम के साथ समन्वय कर संपर्क की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है।

इसी तरह राष्ट्रपति की किसी व्यक्तिगत आवश्यकता को पूरा कराने के लिए भी ADC संबंधित एजेंसियों या टीमों के बीच समन्वय करता है। यानी यह पद सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाली औपचारिक उपस्थिति से कहीं अधिक व्यापक समन्वय की मांग करता है।

राष्ट्रपति मुर्मू से जुड़ाव को बताया बेहद निजी अनुभव

अपनी बातचीत में संब्याल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ बने भावनात्मक जुड़ाव का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू से पहली बार मिलने पर उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उनकी मां उनके सामने खड़ी हों। संब्याल के अनुसार, सैन्य जीवन के कारण वह 2014 से अपनी मां के साथ लगातार नहीं रह पाए थे और अक्सर कुछ दिनों के लिए घर आने के बाद कई महीनों के लिए फिर चले जाते थे।

राष्ट्रपति मुर्मू के साथ लगभग तीन साल काम करने के दौरान उन्हें उनके व्यवहार में घर जैसा अपनापन महसूस हुआ। संब्याल ने उनके स्वभाव को “very homely” बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति की ओर से उन्हें और दूसरे ADC अधिकारियों को जो गर्मजोशी मिली, वह उन्हें अपनी मां की याद दिलाती थी।

यह पहलू उनकी कहानी में एक दिलचस्प विरोधाभास भी दिखाता है—जिस जिम्मेदारी ने उन्हें सामान्य पारिवारिक जीवन से दूर रखा, उसी जिम्मेदारी के दौरान राष्ट्रपति के साथ उनका एक भावनात्मक जुड़ाव बना।

Special Forces से राष्ट्रपति भवन तक का सफर

संब्याल का सैन्य करियर भी उनकी ADC भूमिका को संदर्भ देता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वह National Defence Academy के 133वें कोर्स का हिस्सा रहे और बाद में Indian Military Academy में प्रशिक्षण लिया। राष्ट्रपति का ADC बनने से पहले उन्होंने भारतीय सेना की 4 Para Special Forces में भी सेवा दी।

2021 के गणतंत्र दिवस पर तत्कालीन कैप्टन संब्याल ने जाट रेजिमेंट की टुकड़ी का नेतृत्व किया था। उस वर्ष इस टुकड़ी ने Best Marching Contingent Trophy हासिल की थी।

बाद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC के रूप में उनकी नियुक्ति ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों में एक जाना-पहचाना चेहरा बना दिया।

सामान्य जीवन और हाई-प्रोफाइल जिम्मेदारी के बीच संतुलन

संब्याल के बयान ADC जैसे प्रतिष्ठित पद के उस पहलू को सामने लाते हैं जो आम तौर पर सार्वजनिक तस्वीरों में नजर नहीं आता।

राष्ट्रपति के बेहद करीब रहकर काम करने वाले अधिकारी के लिए जिम्मेदारी केवल प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं रहती। लगातार उपलब्धता, विभिन्न टीमों के साथ समन्वय और निजी जीवन पर सीमाएं इस भूमिका के अनुभव का हिस्सा हो सकती हैं—कम से कम संब्याल ने अपने कार्यकाल को इसी तरह वर्णित किया है।

उनका अनुभव यह भी बताता है कि किसी हाई-प्रोफाइल सरकारी या सैन्य जिम्मेदारी की प्रतिष्ठा के पीछे व्यक्तिगत समय, परिवार और सामान्य सामाजिक जीवन से जुड़े समझौते हो सकते हैं।

संब्याल अब भारतीय सेना से समयपूर्व सेवानिवृत्ति ले चुके हैं। उनके हालिया इंटरव्यू ने राष्ट्रपति के ADC की भूमिका को केवल औपचारिक पद के बजाय उसके रोजमर्रा के समन्वय और व्यक्तिगत प्रभाव के नजरिए से भी चर्चा में ला दिया है।

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