काशीपुर के सरकारी अस्पताल में मोमबत्ती की रोशनी में इलाज, वायरल वीडियो के बाद पावर बैकअप पर उठे सवाल
Introduction
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर में एक सरकारी अस्पताल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया है। वीडियो में डॉक्टर को अंधेरे के बीच मोमबत्ती की रोशनी में मरीजों की जांच करते और पर्चे लिखते देखा जा सकता है।
यह घटना एलडी भट्ट राजकीय चिकित्सालय की ओपीडी में बिजली आपूर्ति बाधित होने के दौरान हुई। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की बिजली और आपातकालीन पावर बैकअप व्यवस्था को लेकर सवाल उठे। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि बैकअप की व्यवस्था मौजूद थी और वैकल्पिक बिजली शुरू होने में करीब 10 मिनट का समय लगा।
क्या दिख रहा है वायरल वीडियो में?
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में अस्पताल की ओपीडी में रोशनी बेहद कम दिखाई देती है। डॉक्टर अपने सामने मोमबत्ती रखकर मरीजों को देखते और जरूरी कागजी काम करते नजर आते हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद घटना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई। इसे लेकर अस्पताल में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और बिजली जाने की स्थिति में तत्काल बैकअप की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर वीडियो के साथ की जा रही सभी टिप्पणियां आधिकारिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं हैं। अस्पताल प्रशासन ने लंबे समय तक पावर बैकअप उपलब्ध नहीं होने के दावे से इनकार किया है।
अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?
एलडी भट्ट राजकीय चिकित्सालय के चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. एसके दीक्षित ने कहा कि अस्पताल में बिजली के बैकअप के लिए दो जनरेटर और पर्याप्त इन्वर्टर मौजूद हैं।
उनके अनुसार वायरल वीडियो उस समय रिकॉर्ड किया गया जब ओपीडी में बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी। वैकल्पिक व्यवस्था सक्रिय करने में लगभग 10 मिनट लगे।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि आपात स्थिति में जनरेटर अस्पताल को आवश्यक बिजली बैकअप उपलब्ध कराने में सक्षम हैं।
अब UPS सिस्टम लगाने की तैयारी
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की बात कही है।
डॉ. दीक्षित के अनुसार अस्पताल में जल्द ही Uninterruptible Power Supply (UPS) सिस्टम लगाया जाएगा। UPS का उद्देश्य मुख्य बिजली आपूर्ति बंद होने और दूसरे बैकअप सिस्टम के सक्रिय होने के बीच पैदा होने वाले व्यवधान को कम करना है।
अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में कुछ मिनट की बिजली बाधा भी महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि ओपीडी के अलावा जांच उपकरण, आपातकालीन सेवाएं और दूसरे चिकित्सा विभाग बिजली पर निर्भर रहते हैं।
जिला प्रशासन तक पहुंचा मामला
वायरल वीडियो का मामला उधम सिंह नगर जिला प्रशासन के संज्ञान में भी आया है।
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय ने कहा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियों को समझने के लिए अस्पताल के अधीक्षक से जानकारी ली जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
10 मिनट की बाधा, लेकिन बड़ा सवाल
अस्पताल प्रशासन के अनुसार बिजली और वैकल्पिक व्यवस्था के बीच का अंतर लगभग 10 मिनट का था। फिर भी वायरल वीडियो ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे को सामने ला दिया है—सरकारी अस्पतालों में बिजली जैसी आवश्यक सुविधा का बैकअप कितनी तेजी से सक्रिय होना चाहिए।
स्वास्थ्य सेवाओं में निर्बाध बिजली केवल सुविधा का विषय नहीं है। अस्पतालों में मरीजों की निगरानी, डायग्नोस्टिक उपकरण, दवाओं के भंडारण, ऑक्सीजन से जुड़े सिस्टम और कई दूसरी आवश्यक सेवाएं लगातार बिजली आपूर्ति पर निर्भर कर सकती हैं।
हालांकि वायरल वीडियो केवल ओपीडी की स्थिति दिखाता है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा करना उचित नहीं होगा कि घटना के दौरान पूरे अस्पताल की सभी चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुई थीं।
वायरल वीडियो और प्रशासन के दावे में अंतर समझना जरूरी
इस घटना में दो पहलुओं को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण है।
वीडियो यह दिखाता है कि बिजली बाधित होने के दौरान डॉक्टर ने मरीजों को देखना बंद नहीं किया और मोमबत्ती की रोशनी में काम जारी रखा।
दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि संस्थान में पावर बैकअप मौजूद था और समस्या केवल वैकल्पिक व्यवस्था शुरू होने में लगे लगभग 10 मिनट की थी।
अब प्रशासनिक जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि बैकअप सक्रिय होने में इतना समय क्यों लगा और क्या भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है।
डॉक्टर ने जारी रखा मरीजों का इलाज
घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि बिजली बाधित होने के बावजूद डॉक्टर ने ओपीडी में मरीजों को देखना जारी रखा।
सोशल मीडिया पर इसी दृश्य ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। हालांकि वायरल वीडियो के आधार पर घटना की पूरी तकनीकी या प्रशासनिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती, लेकिन इसने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निर्बाध बिजली व्यवस्था की अहमियत को फिर चर्चा में ला दिया है।
अब अस्पताल द्वारा प्रस्तावित UPS सिस्टम और जिला प्रशासन की जांच के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस घटना के बाद व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं।
