करनाल से पकड़ी गई 22 वर्षीय महिला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तार महिला की पहचान सुभेहा पंडित के रूप में हुई है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने हरियाणा पुलिस की मदद से उसे करनाल जिले से गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई 1 नवंबर को की गई थी और इसकी जानकारी 2 और 3 नवंबर को सामने आई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जांचकर्ताओं को शक है कि महिला कथित गैंग की आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी हुई थी। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उसके कथित तौर पर पैसों के लेन-देन में शामिल होने की बात भी कही गई है। बताया गया है कि जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि आरोपियों के बैंक खातों में रकम किसने और किस उद्देश्य से भेजी थी।
हालांकि, पुलिस की ओर से उसकी भूमिका से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई हैं। इसलिए फिलहाल इन आरोपों को जांच का हिस्सा मानना जरूरी है। अदालत में आरोप साबित होने तक किसी भी आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता।
18 अक्टूबर को जुहू में हुई थी फायरिंग
यह घटना 18 अक्टूबर 2026 की शाम मुंबई के जुहू इलाके में हुई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाइगर श्रॉफ एक फुटबॉल ग्राउंड से अपनी कार में निकल रहे थे। इसी दौरान दो अज्ञात हमलावर दोपहिया वाहन पर वहां पहुंचे और उनकी कार पर गोलियां चला दीं।
हमलावरों ने कथित तौर पर पांच राउंड फायरिंग की। अचानक हुई गोलीबारी से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। अभिनेता इस हमले में बाल-बाल बच गए, लेकिन उनकी कार के ड्राइवर और वहां मौजूद एक अन्य व्यक्ति को चोटें आईं। घटना के बाद पुलिस ने जुहू पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया और जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई।
फायरिंग के बाद पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और संदिग्धों की पहचान करने के लिए अलग-अलग जगहों पर जांच शुरू की। इसके बाद राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा में कार्रवाई करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।
अब तक 13 आरोपी गिरफ्तार
मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस मामले में अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तारियां की हैं। करनाल से महिला की गिरफ्तारी से पहले 12 लोगों को पकड़ा जा चुका था। इन आरोपियों को राजस्थान के कोटा, दिल्ली और हरियाणा के सोनीपत सहित अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया।
मामले में पुलिस की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि फायरिंग की योजना किसने बनाई, हमलावरों को हथियार किसने उपलब्ध कराए और घटना को अंजाम देने के लिए आर्थिक मदद कहां से आई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। पहले गिरफ्तार हुई दो महिलाओं पर कथित तौर पर हथियारों की आपूर्ति से जुड़े होने का आरोप है। हालांकि, हर आरोपी की अलग-अलग भूमिका का निर्धारण जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों के आधार पर ही होगा।
मामले में MCOCA क्यों लगाया गया?
इस केस में मुंबई पुलिस ने 27 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट यानी MCOCA के प्रावधान भी लागू किए थे। यह कानून संगठित अपराध से जुड़े मामलों में इस्तेमाल किया जाता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने MCOCA की धारा 3(1)(ii), 3(2) और 3(4) के तहत कार्रवाई की है। इन प्रावधानों का उद्देश्य कथित संगठित अपराध गिरोह और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच करना है।
इस कानून के लागू होने के बाद जांच एजेंसियों को कथित आपराधिक नेटवर्क, उसके आर्थिक स्रोतों और अलग-अलग आरोपियों के बीच संबंधों की पड़ताल करने का आधार मिला है। हालांकि, कानून के तहत आरोप लगाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सभी आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित हो चुका है।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम भी आया सामने
फायरिंग की घटना के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से कथित तौर पर जिम्मेदारी लेने का दावा भी सामने आया था। पुलिस इस दावे और मामले में गिरफ्तार लोगों के कथित संबंधों की जांच कर रही है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने अदालत में पेश किए गए रिमांड आवेदन में हमले के संभावित मकसद के तौर पर आर्थिक फायदा, अपना दबदबा कायम करना और डर का माहौल पैदा करना जैसे पहलुओं का उल्लेख किया था। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या हमलावरों ने इससे पहले अन्य प्रभावशाली लोगों की गतिविधियों या ठिकानों की रेकी की थी।
फिलहाल इन दावों और संभावित मकसद की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में सबूत पेश किए जाने के बाद ही हो सकेगी।
आगे क्या होगी जांच?
अब क्राइम ब्रांच का ध्यान गिरफ्तार महिला और दूसरे आरोपियों के बीच कथित संपर्कों को समझने पर है। पुलिस बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन, फोन रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच कर सकती है। इसके साथ ही यह पता लगाने की कोशिश जारी है कि फायरिंग में इस्तेमाल हथियार कहां से आए और पूरी साजिश में किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस ने मुंबई में फिल्मी हस्तियों की सुरक्षा और संगठित अपराध के नेटवर्क को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। 13 गिरफ्तारियों के बाद भी जांच अभी जारी है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचना और अदालत में आरोपों को सबूतों के साथ साबित करना है।
