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वीरमणि POCSO केस पर विजय का एमके स्टालिन पर हमला: ‘स्टालिन सर, मुंह खोलिए’, DMK प्रमुख ने आरोपों को बताया झूठा

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि से जुड़े POCSO मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन पर सवाल उठाए हैं। विजय ने पूछा कि पिछली सरकार के दौरान पुलिस ने मामले को बंद करने की कोशिश क्यों की। स्टालिन ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने वीरमणि को बचाने का कोई निर्देश नहीं दिया था और TVK के आरोप “झूठे और मानहानिकारक” हैं।

वीरमणि POCSO केस पर विजय का एमके स्टालिन पर हमला: ‘स्टालिन सर, मुंह खोलिए’, DMK प्रमुख ने आरोपों को बताया झूठा
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: The Indian Express, India Today, The New Indian Express and Hindustan Times | Based on reports concerning the ongoing R. Veeramani POCSO investigation and statements by Vijay, M.K. Stalin and DMK representatives.

विजय ने मदुरांतकम में उठाया वीरमणि केस

तमिलनाडु की राजनीति में आर. वीरमणि से जुड़ा POCSO मामला एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है। मुख्यमंत्री विजय ने मदुरांतकम उपचुनाव प्रचार के दौरान पिछली DMK सरकार पर मामले को लेकर सवाल उठाए और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा।

विजय ने स्टालिन को संबोधित करते हुए कहा, “स्टालिन सर, मुंह खोलिए।” उन्होंने सवाल किया कि वीरमणि के खिलाफ मामला पहले क्यों आगे नहीं बढ़ा और पुलिस ने इसे बंद करने की कोशिश क्यों की।

ये विजय और TVK की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। उपलब्ध रिपोर्टिंग में ऐसा कोई स्थापित तथ्य सामने नहीं आया है कि स्टालिन ने व्यक्तिगत रूप से जांच रोकने या वीरमणि को बचाने का आदेश दिया था।

क्या है आर. वीरमणि POCSO मामला?

आर. वीरमणि जेम ग्रेनाइट्स से जुड़े 84 वर्षीय कारोबारी हैं। The Indian Express के अनुसार, पुलिस ने 7 अक्टूबर 2025 को वीरमणि के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस को एक पेन ड्राइव मिली थी जिसमें कथित तौर पर एक नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न का वीडियो था। रिकॉर्डिंग 2019 की बताई गई।

शुरुआती जांच के दौरान पुलिस कथित पीड़िता की पहचान और उसका पता नहीं लगा सकी। बाद में पुलिस ने पर्याप्त सबूत न मिलने का हवाला देते हुए मामले में आगे की कार्रवाई बंद करने के लिए रिपोर्ट दाखिल की।

लेकिन विशेष POCSO अदालत ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार नहीं की और आगे जांच करने का निर्देश दिया।

यही घटनाक्रम अब राजनीतिक विवाद के केंद्र में है।

आगे की जांच में सामने आए और पीड़ितों के बयान

अदालत के हस्तक्षेप के बाद जांच आगे बढ़ी और मामले का दायरा बड़ा हुआ।

The Indian Express के अनुसार, कम से कम सात पीड़ितों के बयान अदालत के सामने दर्ज किए जा चुके हैं, जो कथित घटनाओं के समय नाबालिग थे। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या अन्य लड़कियां भी कथित यौन शोषण का शिकार हुई थीं।

वीरमणि को 29 अगस्त 2026 को शांति और उनके पति महेंद्र सिम्हन के साथ गिरफ्तार किया गया। तीनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। पुलिस ने आरोप लगाया है कि शांति और महेंद्र सिम्हन ने वीरमणि के कथित अपराधों में सहायता की थी।

ये आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और इन्हें दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

विजय ने पिछली सरकार से क्यों मांगा जवाब?

विजय और उनकी पार्टी का मुख्य सवाल उस अवधि को लेकर है जब DMK सत्ता में थी और पुलिस ने उपलब्ध सबूतों की जांच करने के बाद मामले को बंद करने के लिए अदालत का रुख किया था।

TVK नेताओं ने आरोप लगाया है कि पिछली सरकार के दौरान जांच पर्याप्त तरीके से आगे नहीं बढ़ाई गई और कथित वीडियो सबूत मौजूद होने के बावजूद मामले को कमजोर किया गया। पार्टी ने पूर्व DMK सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि जांच उस समय इस स्थिति तक क्यों पहुंची।

हालांकि, TVK ने ऐसा प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है जिससे यह स्थापित हो कि स्टालिन ने व्यक्तिगत रूप से जांच में हस्तक्षेप किया था।

स्टालिन का पलटवार: आरोप ‘झूठे और मानहानिकारक’

एमके स्टालिन ने TVK के आरोपों को खारिज किया है।

India Today के अनुसार, स्टालिन ने कहा कि DMK सरकार की ओर से मामले में किसी को बचाने का कोई आदेश नहीं दिया गया था। उन्होंने TVK की ओर से लगाए गए संरक्षण संबंधी आरोपों को “झूठा और मानहानिकारक” बताया।

स्टालिन का कहना था कि उनकी सरकार के दौरान महिलाओं और नाबालिग लड़कियों से जुड़े अपराधों में बिना भेदभाव कार्रवाई की गई और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए।

उन्होंने सत्तारूढ़ दल पर नाबालिग पीड़िताओं की पीड़ा को उपचुनाव की राजनीति में इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया और कहा कि प्रभावित लड़कियों को न्याय दिलाना सभी का एकमात्र उद्देश्य होना चाहिए।

DMK का दावा: जांच बंद नहीं हुई थी

DMK ने पुलिस कार्रवाई की अलग व्याख्या पेश की है।

पार्टी के लीगल विंग सचिव और वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आर. एलंगो ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान जांच को पूरी तरह बंद नहीं किया गया था। उनके अनुसार, उस समय पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण आगे की जांच को अतिरिक्त साक्ष्य मिलने तक लंबित रखा गया था।

एलंगो ने यह भी कहा कि पुलिस ने उपलब्ध सामग्री की जांच और परिसरों की तलाशी ली थी।

वीरमणि और स्टालिन की पूर्व मुलाकात को लेकर उठे सवालों पर एलंगो ने कहा कि यह मुलाकात मुख्यमंत्री के कोविड-19 राहत कोष में योगदान से संबंधित थी।

अब पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

मामला अब केवल वीरमणि के खिलाफ आरोपों तक सीमित नहीं है।

The Indian Express ने 24 सितंबर को बताया कि Central Crime Branch ने एक सहायक पुलिस आयुक्त और दो इंस्पेक्टरों को समन जारी किया है, जो पहले इस मामले की जांच से जुड़े थे।

जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि शुरुआती जांच में कोई लापरवाही हुई थी या किसी ने जांच को प्रभावित अथवा कमजोर करने की कोशिश की थी। वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

इन पहलुओं की जांच अभी चल रही है। इसलिए किसी अधिकारी या राजनीतिक दल की भूमिका को जांच पूरी होने से पहले स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

चार सदस्यीय SIT गठित

विवाद बढ़ने के बीच मामले की जांच के लिए वरिष्ठ महिला IPS अधिकारियों वाली चार सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है।

मुख्यमंत्री विजय ने इससे पहले चेन्नई पुलिस को निर्देश दिया था कि यदि मामले को दबाने या कार्रवाई में देरी करने के लिए कोई व्यक्ति जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

राजनीति से अलग, जांच के नतीजे पर रहेगी नजर

वीरमणि मामला अब तमिलनाडु में TVK और DMK के बीच राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन चुका है। एक तरफ विजय पिछली सरकार से यह जवाब मांग रहे हैं कि शुरुआती जांच के बाद पुलिस क्लोजर रिपोर्ट तक क्यों पहुंची; दूसरी तरफ स्टालिन और DMK का कहना है कि सरकार ने किसी आरोपी को संरक्षण नहीं दिया और पर्याप्त सबूत उपलब्ध होने तक जांच की गुंजाइश खुली थी।

इन राजनीतिक दावों से अलग कुछ तथ्य स्पष्ट हैं: वीरमणि के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था, पुलिस ने बाद में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, विशेष POCSO अदालत ने उसे स्वीकार नहीं किया, आगे की जांच हुई, वीरमणि गिरफ्तार हुए और कई पीड़ितों के बयान दर्ज किए गए हैं। पुलिस अब शुरुआती जांच से जुड़े अधिकारियों और अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच कर रही है।

मामला अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया में है, इसलिए आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण अदालत करेगी।

स्रोत : The Indian Express, India Today, The New Indian Express और Hindustan Times की 22–25 सितंबर 2026 की रिपोर्टिंग। मामले से जुड़े राजनीतिक आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है; जांच अभी जारी है और आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला नहीं हुआ है।

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